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कम करें अपने ब्याज एवं लोन का बोझ

बढ़ती महंगाई के दौर में हमें तुरंत कदम उठाने होंगे जिनसे ब्याज एवं लोन के भार को कम कर सकें।
अपडेटेड Jun 04, 2011 पर 12:53  |  स्रोत : Moneycontrol.com

4 जून 2011

सीएनबीसी आवाज़



आज अधिकांश व्यक्तियों की आय का बड़ा हिस्सा लोन की किस्तों के रूप में जा रहा है। एक तरफ बढ़ती हुई महंगाई ने हमारा बजट बिगाड़ रखा है, वहीं दूसरी तरफ आरबीआई ने महंगाई को कम करने के लिए जो ब्याज दर बढ़ाई है उसका भी हमारे बजट पर नकारात्मक असर पड़ा है।



यही नहीं 16 जून 2011 को जारी होने वाली मौद्रिक नीति में ब्याज दर के और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में हमें तुरंत ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे हम अपने ब्याज एवं लोन के भार को कम कर सकें। इनके बारे में चर्चा करने के पूर्व हमें यह समझना आवश्यक है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का हमारे ऊपर क्या असर पड़ रहा है।



समझें ब्याज का राज : आप सोच रहे होंगे ब्याज दर में 1%-2% की ही तो वृद्धि हुई है एवं इस पर ध्यान देंगे भी तो हमारे बजट पर बहुत अधिक फर्क नहीं पड़ेगा। वास्तविकता यह है लंबी अवधि में मात्र 3% अधिक ब्याज दर से हमें दुगुना पैसा अदा करना होता है। उदाहरण के लिए यदि एक लाख रुपए 25 वर्ष के लिए लोन पर लिए जाएं तो विभिन्न ब्याज दर पर तालिका -1 अनुसार राशि अदा करना होगी।



तालिका क्रमांक-1

ब्‍याज दर                                           6%        9%      12%
25 वर्ष बाद अदा की जाने वाली राशि   42,9187    86,2308    1,70,0006



उपरोक्त तालिका देखकर आप समझ ही गए होंगे मात्र 3% अधिक ब्याज दर लंबी अवधि में हमारे ऊपर कितना बड़ा प्रभाव डालती है।



कैसे कम करें अपने ब्याज और लोन का भार: सबसे पहले अपने सभी लोन पर पोस्ट टैक्स इफेक्टिव यिल्ड निकाल लें। उदाहरण के लिए यदि किसी सेलेरीड व्यक्ति ने हाउसिंग लोन 11.50% वार्षिक की दर से एवं कार लोन 12.50% वार्षिक की दर से ले रखा है एवं वह टैक्स के दायरे में आता है तो उसके लिए पोस्ट टैक्स इफेक्टिव यिल्ड निम्न प्रकार से निकाली जाएगी।



स्टेप-1 : सबसे पहले हमें इफेक्टिव यिल्ड की गणना करना होगी जो उपरोक्त उदाहरण के हिसाब से तालिका-2 में की गई है।


तालिका क्रमांक-2


लोन        ब्‍याज दर   ब्‍याजअदायगी  इफेक्टिव यिल्‍ड


हाउसिंग    11.5%     मासिक            12.13%


कार       11.5%         मासिक               13.24%




स्टेप-2 : इफेक्टिव यिल्ड निकालने के बाद पोस्ट टैक्स इफेक्टिव यिल्ड निकाली जानी चाहिए। पोस्ट टैक्स इफेक्टिव यिल्ड निकालने के लिए सबसे पहले यह जान लेना चाहिए कि किस लोन की किस्तों पर टैक्स में छूट प्राप्त हो रही है एवं किन पर नहीं जैसे सेलेरीडी व्यक्ति को हाउसिंग लोन के चुकाए गए ब्याज एवं मूल दोनों पर टैक्स छूट प्राप्त होती है परंतु कार के ब्याज एवं मूल पर कोई छूट प्राप्त नहीं होती है। उपरोक्त उदाहरण पर विभिन्न टैक्स दर के अनुसार पोस्ट टैक्स इफेक्टिव तालिका-3 में दी गई है।

तालिका क्रमांक-3


पोस्‍ट टैक्‍स इफेक्टिव यिल्‍ड

टैक्‍स दर    कार लोन    हाउसिंग लोन
10.30%    13.24%    10.88%
20.60%    13.24%    09.63%
30.90%    13.24%    8.38%



पोस्ट टैक्स इफेक्टिव यिल्ड निकालने के बाद निम्न विकल्पों से आप अपने लोन एवं ब्याज के भार को कम कर सकते हैं-

1. कम रिटर्न वाले निवेश को भुनाए-
अपने सभी निवेश को रिव्यू करें और यह निकाल ले कि उन पर वार्षिक इफेक्टिव यिल्ड क्या आ रही है, उदाहरण के लिए 8% प्रतिवर्ष की दर से फिक्स डिपॉजिट पर यदि तिमाही आधार पर ब्याज अर्जित/अदा किया जाता है तो इस पर वार्षिक इफेक्टिव यिल्ड 8.24% होगी। इसके साथ यह भी ज्ञात कर लेना चाहिए कि निवेश को भुनाने में कितनी पेनल्टी अदा करनी होगी एवं पेनल्टी चुकाने के बाद आपके निवेश पर इफेक्टिव यिल्ड यदि आपके लोन की पोस्ट टैक्स इफेक्टिव यिल्ड से कम है तो ऐसे निवेश को भुनाकर लोन के भार को कम किया जाना चाहिए।



2.
इंश्योरेंस पॉलिसी को भी रिव्यू करें-इंश्योरेंस के साथ रिटर्न भी मिल सके इस वजह से अधिकांश व्यक्तियों ने मनी बैंक, एंडावमेंट, होल लाइफ या यूलिप पॉलिसियां ही ले रखी हैं। सामान्यतः मनी बैंक, एंडावमेंट एवं होल लाइफ पॉलिसियों में 6% वार्षिक से अधिक रिटर्न नहीं मिल पाता है एवं यूलिप पॉलिसियों में खर्चों की अधिकता के कारण रिस्क लेने के बावजूद कम ही रिटर्न मिल पाता है अतः इन पॉलिसियों को रिव्यू कर सरेंडर करने की योजना बनाई जा सकती है। परंतु सरेंडर करने के पूर्व सरेंडर चार्जेंस के प्रभाव को समझना एवं इंश्योंरेंस के लिए टर्म प्लान लिया जाना अति आवश्यक है। अतः इस विकल्प को सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर की सलाह से ही चुनना चाहिए।



3. एकमुश्त राशि भरें- यदि आप किसी भी तरह से अतिरिक्त बचत कर सकते हैं या अचानक कोई राशि आपको मिलती है तो उसे भी लोन चुकाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।



4. अधिक ब्याज दर वाले लोन को कम ब्याज में तब्दील करें- सामान्यतः अनसिक्योर्ड लोन जैसे पर्सनल लोन आदि पर सिक्योर्ड लोन की तुलना में अधिक ब्याज दर होती है। अतः हमें ऐसे विभिन्न विकल्पों जिससे ब्याज दर को कम किया जा सके, के बारे में जानकारी हासिल कर अपने अधिक ब्याज वाले लोन को कम ब्याज वाले लोन में तब्दील करने की योजना बनानी चाहिए।



उपरोक्त सभी विकल्पों के प्रभाव हमारे जीवन पर लंबे समय तक पड़ते हैं एवं इन विकल्पों को चुनने पर हमें कुछ पेनल्टी भी अदा करना पड़ सकती है। अतः इनके बारे में अंतिम निर्णय सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर की सलाह से ही करें।


यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है