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म्यूचुअल फंडों की शेयर खरीद पर सेबी की नजर

सूत्रों के मुताबिक सेबी ने म्यूचुअल फंडों की ब्रोकरेज फीस को खर्च की सीमा में शामिल करने की योजना बनाई है।
अपडेटेड Jul 15, 2011 पर 13:29  |  स्रोत : Moneycontrol.com

15 जुलाई 2011



सीएनबीसी आवाज़



सीएनबीसी आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्यूचुअल फंडों की ब्रोकरेज फीस को खर्च की सीमा में शामिल करने की योजना बनाई है।



फिलहाल सेबी की म्यूचुअल फंड सलाहकार समिति म्यूचुअल फंडों की ब्रोकरेज फीस को खर्च की सीमा में शामिल करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। सूत्रों का कहना है कि सेबी ने म्यूचुअल फंड हाउसेस यानि एएमसी के खर्च की सीमा को कुल कारोबार के 2.5 फीसदी तक सीमित करने की योजना बनाई है।



हालांकि म्यूचुअल फंडों की ओर से दिए जाने वाले ब्रोकरेज फीस को अभी शेयर की खरीद का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में एएमसी और ब्रोकरों के बीच ब्रोकरेज फीस को लेकर आपस में ही सीमा तय की जाती है। लेकिन म्यूचुअल फंड हाउसेस की ओर से ब्रोकरेज फीस के तौर पर 0.1-0.5 फीसदी प्रति शेयर का भुगतान किया जाता है। वहीं एएमसी के खर्च की सीमा को कुल कारोबार के 1.25-1.5 फीसदी हिस्से के बराबर तय किया गया है।



सूत्रों का कहना है कि एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इन इंडिया यानि एएमएफआई की ओर से सेबी के नए फैसले पर इंडस्ट्री की राय ली जाएगी। इंडस्ट्री पर सेबी के फैसले से होनेवाले असर को मार्केट रेगुलेटर से अवगत कराया जाएगा।



फिलहाल म्यूचुअल फंड हाउसेस की शेयर खरीद की लागत में ही ब्रोकरेज फीस और एसटीटी को शामिल किया जाता है। ऐसे में म्यूचुअल फंड कारोबार में भी ब्रोकरेज फीस को खर्च सीमा में शामिल किया गया तो ब्रोकिंग फर्मों को बड़े पैमाने पर नुकसान झेलना पड़ सकता है।