अंतरिक्ष में भारत की छलांग, ‘जीसैट-12’ कक्षा में स्थापित

प्रकाशित Sat, 16, 2011 पर 10:07  |  स्रोत : Hindi.in.com

16 जुलाई 2011
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
वेंकटचारी जगन्नाथन

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)।
भारत ने शुक्रवार को आधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-12 को अंतरिक्ष कक्षा में स्थापित करने वाले एक ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस उपग्रह से दूरस्थ शिक्षा, चिकित्सा और ग्राम संसाधन केंद्र को उन्नत बनाने में मदद मिलेगी।

जीसैट-12 उपग्रह के जरिये भारत ने अपने अंतरिक्ष आधारित नेटवर्क में 12 और संचार ट्रांसपोंडर्स का इजाफा कर दिया है। इसमें 12 अतिरिक्त सी-बैंड ट्रांसपोंडर, स्वचालित रिसीवर और ट्रांसमीटर लगाए गए हैं। इससे देश में संचार और ब्रॉडकास्ट को नई दिशा मिलेगी।
यह उपग्रह संचार के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे दूरस्थ शिक्षा, दूरस्थ चिकित्सा और ग्राम संसाधन केंद्र को उन्नत बनाया जा सकता है।

संचार उपग्रह जीसैट-12 का प्रक्षेपण आज होगा

 
इस उपग्रह की उम्र आठ वर्ष मानी जा रही है। यह भारतीय राष्ट्रीय सैटेलाइट प्रणाली को मजबूत बनाएगा। इस समय इस प्रणाली में आठ उपग्रह- इनसैट-2ई, इनसैट-3ए, इनसैट-3सी, इनसैट-3ई, इनसैट-4ए, इनसैट-4बी, इनसैट-4सीआर और जीसैट-8 हैं।

इस संचार उपग्रह से वेरी स्मॉल अपर्चर टर्मिनल (वी-सैट) सेक्टर को मदद मिलेगी। वीसैट का उपयोग आंकड़ों के आदान-प्रदान और सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए किया जाता है। इसमें लगे ट्रांसपोंडरों का इस्तेमाल टेलीमेडिसिन, टेलीएजुकेशन और ग्रामीण सेवाओं के लिए किया जा सकता है।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कई विदेशी उपग्रहों से 86 और ट्रांसपोंडरों को पट्टे पर लिया है। ऐसा अनुमान है कि एजेंसी को अभी 170 ट्रांसपोंडरों की जरूरत है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने शाम 4.48 बजे रॉकेट के प्रक्षेपण के बाद पत्रकारों से कहा कि यह अभियान सफल रहा।

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से 80 किलोमीटर उत्तर प्रक्षेपण स्थल पर वैज्ञानिकों के साथ खुशी का इजहार करते हुए राधाकृष्णन ने कहा, "यह काफी पेचीदा अभियान है। मैं यह बताकर बेहद खुश हूं कि ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) से संचार उपग्रह जीसैट-12 को प्रक्षेपित करने का अभियान सफल रहा। उपग्रह को निर्धारित कक्षा में प्रक्षेपित किया गया है।"

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने कहा, "मैं उपग्रह के सफलतापूर्वक प्रक्षेपण पर काफी खुश हूं। मैं यहां दूसरी बार आया हूं और यह दूसरा सफल प्रक्षेपण है।"

उन्होंने कहा, "इस शानदार सफलता के लिए मैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को बधाई देता हूं।"

पीएसएलवी रॉकेट को शाम 4.48 बजे प्रक्षेपित किया गया। वह 1410 किलोग्राम वजन वाले जीसैट-12 उपग्रह को अपने साथ ले गया।

रॉकेट के प्रक्षेपित किए जाने के समय आसमान में बादल छाए थे, लेकिन पीएसएलवी बादल भरे आसमान को चीरते हुए आगे बढ़ा जिसे देखकर वैज्ञानिकों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।

ज्ञात हो कि पीएसएलवी- सी17 के निर्माण में कुल 90 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसकी ऊंचाई 44 मीटर और वजन 320 टन है। यह अपने साथ 80 करोड़ रुपये की लागत वाले जीसैट-12 को ले गया है।


रॉकेट छोड़े जाने के करीब 20 मिनट के बाद इसने उपग्रह को निर्धारित उप जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑरबिट में स्थापित कर दिया।
रॉकेट ने उपग्रह को पृथ्वी के सबसे करीबी बिंदु 284 किलोमीटर और सबसे दूर के बिंदु 21000 किलोमीटर की दूरी पर उप जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑरबिट में स्थापित किया है।

राधाकृष्णन ने बताया कि रॉकेट के संचालन प्रणाली में भारत निर्मित उन्नत विक्रम प्रोसेसर्स लगे हैं।

उन्होंने कहा, "इस अभियान के लिए हमें रॉकेट के संचालन सॉफ्टवेयर में कुछ बदलाव करने की जरूरत महसूस हुई।"

इसरो उपग्रह केंद्र के निदेशक टी.के. एलेक्स ने कहा कि उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने के बाद प्रारम्भिक कार्य प्रणाली बिना किसी समस्या के सम्पन्न हुई।

उन्होंने बताया, "सौर पैनल काम कर रहे हैं और ऊर्जा उत्पन्न कर रहे हैं। उपग्रह की कक्षा को 22020 किलोमीटर शीर्ष बिंदु से 36,000 किलोमीटर शीर्ष बिंदु पर एक दिन बाद उठाया जाएगा। उपग्रह में लगे सभी 12 ट्रांसपोंडर्स की जांच इस महीने के अंत में की जाएगी।"

उपग्रह के कक्ष में स्थापित होने के बाद इसरो ने अपने प्रक्षेपण स्थल से उसकी स्थिति की निगरानी की।

उल्लेखनीय है कि आम तौर पर पीएसएलवी का इस्तेमाल रिमोट सेंसिंग उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में किया जाता है। यह पहली बार है जब पीएसएलवी के जरिए किसी उपग्रह को जियोस्टेशनरी ट्रांसफर ऑरबिट में स्थापित किया जा रहा है।