Moneycontrol » समाचार » म्यूचुअल फंड खबरें

पीएसयू फ़ंड: क्या आपको निवेश करना चाहिए?

किसी भी कंपनी का चयन गुणवत्ता के आधार पर करना चाहिए। सरकार के अधीन स्थित सभी कंपनियां अच्छी नहीं हैं।
अपडेटेड Jun 12, 2010 पर 15:14  |  स्रोत : Hindi.in.com

12 जून, 2010


moneycontrol.com


 


ज़िंदगी में रोमांच होना चाहिए। अगर नहीं है, तो आपको उसे रोमांचक बनाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो ज़िंदगी की एकरसता आपको निचोड़ कर रख देती है और आप उसकी गिरफ़्त में आ जाते हैं। आजकल टीवी सीरियल वाली साड़ियां ज़ोर पर हैं। सीधे बाल फैशन में हैं (मुझे जानकारी मिली है कि यह फैशन भी जाने वाला है!), जिम में निजी प्रशिक्षक होना तथा विदेश यात्रा पर जाना बढ़िया माना जाता है।




यहां तक कि वित्त की नीरस दुनिया में भी झक्कियों की अपनी-अपनी सनक हैं। अचानक किसी को आईपीओज़ से परेशानी होने लगती है और अगले ही पल वहां कोई कैपिटल प्रोटेक्शन फ़ंड आ जाता है जो लोगों को डरा देता है। म्युचुअल फ़ंड (एमएफ) के भी उटपटांग संक्षिप्त अक्षर बन गए हैं, जैसे स्माइल, टाइगर, फोर्स (SMILE, TIGER, FORCE) आदि, ताकि वे लोगों को लुभावने लगें। उसके बाद आई थीम्स। तीन साल पहले इंफ्रास्ट्रक्चर और जीवन शैली फ़ंड ज़ोरों पर थे। उसके बाद मिडकैप फ़ंड और फिर फिक्स्ड मैच्योरिटी योजनाएं – एफएमपी और अन्य डेट फ़ंड ने काफी कमाई की। अब एमएफ में पीएसयू फ़ंड – पब्लिक सेक्टर कंपनी फ़ंड का मौसम है।




एक पीएसयू फ़ंड के पीछे क्या तर्क है?



सरकारी कंपनियों में अब विनिवेश किया जा रहा है और इसमें हिस्सा लेने में दिलचस्पी भी दिखाई देती है। सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों में निवेश अपने आपमें कोई थीम नहीं लगती। एमएफ कंपनियों के रूख के मुताबिक इन कंपनियों में जबर्दस्त वैल्यू है और जब यह वैल्यू सामनी आएगी, निवेशक बहुत अमीर हो जाएंगे। लेकिन ये कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों की हो सकती हैं जो इसे विविधतापूर्ण फ़ंड बना देती हैं। लेकिन फ़ंड में अधिकांश कंपनियां सरकार के अधीन हैं। इसलिए, ये स्वामित्व-आधारित विभाजित फ़ंड हैं।




क्या यह एक अच्छा विचार है?



किसी भी कंपनी का चयन गुणवत्ता के आधार पर किया जाना चाहिए। सरकार के अधीन स्थित सभी कंपनियां अच्छी नहीं होतीं हैं। इनमें हीरे भी हैं और कंकड़ भी। इन सभी को पीएसयू के छाते के नीचे रखना और इनमें निवेश करना बहुत अच्छा विचार नहीं है। फ़ंड मैंजर को इनमें छंटनी करनी होगी एवं अच्छी कंपनियां चुननी होंगी। ऐसे किसी फ़ंड को लेने से कोई भी बेहतर योजना नहीं पा सकता जो कि आज उपलब्ध है।




सरकारी कंपनियों में काफी विविधता है। उनमें कुछ अच्छी हैं, जैसे भेल, एनटीपीसी आदि और कुछ खराब भी हैं (कुछ का प्रदर्शन इतना बुरा है कि नाम लेना भी ठीक नहीं है। जो वाकई बुरी हैं, उनमें किसी भी तरह विनिवेश नहीं हो सकता। कुछ और भी हैं जो सरकारी स्वामित्व एवं नीतियों के शिकार होंगी, जैसे बीपीसीएल, एचपीसीएल और अन्य तेल कंपनियां, जो अपने मालिक द्वार लादे गए बोझ के तले दबकर मरणासन्न हैं।


सरकारी कंपनियों को नीतियों के तहत कुछ फायदेमंद बर्ताव मिलना चाहिए जो उन पर अत्यधिक ध्यान दे जैसे सरकारी अनुबंधों में प्राथमिकता, प्रतियोगिता से बचाव आदि। लेकिन सरकारी स्वामित्व की कई बुराइयां भी हैं – रोजगार नीतियां, क्षतिपूर्ति नीतियां, निर्णय लेने की गति, बेकार ग्राहक सेवा एवं उनकी लगातार बनी हुई छवि, नौकरशाही पद्धतियां आदि। उनमें से कुछ इनसे निजात पा चुकी हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश को इनसे और अन्य रुकावटों से पार पाना है। 


कुल मिलाकर, सरकारी स्वामित्व अपने आपमें किसी व्यापार के लिए सकारात्मक चिह्न नहीं है। इन फ़ंड से दूर रहने में ही भलाई है। एमएफ अब नई सनक की ओर बढ़ रहे हैं। आपको ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है। आखिर यह आपका पैसा है!!