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फंड मैनेजर बाज़ार की गिरावट का लाभ उठायेंगे

रॉयटर के एक सर्वे के मुताबिक घरेलू फंड मैनेजर अगले तीन महीनों में स्टॉक्स में अपना एक्सपोज़र बढ़ायेंगे।
अपडेटेड Jun 12, 2010 पर 15:50  |  स्रोत : Hindi.in.com

12 जून, 2010


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हाल ही में हुए रॉयटर के एक सर्वे में ये बात सामने आयी है कि घरेलू फंड मैनेजर अगले तीन महीनों में स्टॉक्स में अपना एक्सपोज़र बनाये रखेंगे या और बढ़ायेंगे। इसके लिये ऑटोमोबाइल और आर्थिक कंपनियां उनकी पहली पसंद होंगी।  


24 मई से 31 मई के बीच हुए रॉयटर के सर्वे में शामिल सभी 7 फंड मैनेजरों ने ये बात मानी कि इस समय भारतीय शेयरों की कीमत निवेश के लिहाज से एकदम ठीक है। वहीं 7 में से 4 ने कहा कि वो इस समय बाज़ार की गिरावट का लाभ उठाने के लिये इक्विटी में और अधिक पैसै लगायेंगे।



यूरो क्षेत्र के ऋण संकट और कोरियाई पेनिनसुएला मसले पर निवेशकों की जोखिम चिंताओं के कारण भारत का बेंचमार्क स्टॉक सूचकांक मई में 3% से अधिक नीचे गिरा।


एल एंड टी के सीईओ संजय सिन्हा कि मुताबिक "इस समय भी बाज़ार में 2008 की ही तरह अनिश्चितता है लेकिन यह उतनी गंभीर नहीं है। इसके कारण एसेट की कीमत का सही मूल्यांकन नहीं होगा और हम इसका फ़ायदा उठाने की कोशिश करेंगे।"


उन्होंने कहा "16,500 के स्तर को हम बचा सकते हैं। वैश्विक बाज़ारों में कमज़ोरी के कारण जोखिम वाले एसेट के प्रति निवेशकों की उत्सुकता कम हुई है। इसकी वज़ह से विदेशी फंड दबाव में आ गये हैं।"


विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से मई में 2.3 बिलियन डॉलर का निवेश हटाया जिसके कारण पिछले मंगलवार को बेंचमार्क सूचकांक (सेंसेक्स) साढ़े तीन महीनों के निम्न स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही फ़रवरी के बाद ये पहली बार 16000 के नीचे आया।


7 में 4 फंड मैनेजरों ने सर्वें में कहा कि अगले तीन महीनों में शेयर बाज़ार और अधिक गिरेगा जबकि 2 के मुताबिक बाज़ार में 5% से अधिक की बढ़त होगी।



सर्वे के मुताबिक इस समय फंड मैनेजर मिड कैप क्षेत्र से ज़्यादा स्टॉक खरीदने की योजना बना रहे हैं और अगले तीन महीनों में जोखिम वाली स्मॉल कैप कंपनियों से पैसा हटाने की भी सोच रहे हैं।


सात में से तीन की प्रतिक्रया थी कि वो और अधिक मिड कैप स्टॉक खरीदेंगे जबकि दो लोगों ने कहा कि इस समय वे छोटी फर्मों से एक्सपोज़र घटायेंगे।


ऑटो और आर्थिक शेयरों पर नज़र



जिस तरह से मार्च तिमाही में ऑटो कंपनियों ने अनुमान से भी बढ़कर बढ़िया नतीजे दिखाये हैं, उन्हें देखकर घरेलू फंड मैनेजर ऑटोमोबाइल कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजनाओं पर विचार कर रहे हैं।


भारत की शीर्ष वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने बाज़ार के अनुमानों को पछाङ़ते हुए मार्च तिमाही में जोरदार उछाल दिखाई जबकि भारत की सबसे बङ़ी मोटर साईकिल निर्माता कंपनी हीरो होंडा ने अपने कुल मुनाफ़े में 49% की तिमाही बढ़त दर्शायी। इस सब के आधार पर सात में से छह लोगों ने कहा कि वो ऑटो क्षेत्र में निवेश पर ज्यादा ध्यान देंगे।   


अगस्त 2008 से फंड मैनेजरों का पसंदीदा आर्थिक क्षेत्र आगे भी शीर्ष पर रहेगा। 5 फंड मैनेजरों ने इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की बात कही।


आईडीएफसी ऐसेट मैनेजमैंट के इक्विटी डायरेक्टर त्रिदीब पाठक ने कहा कि वैश्विक विकास में गिरावट के डर से भारत में मौद्रिक नीति पर बढ़ता दबाव कम हो सकता है। अतः आर्थिक स्टॉक्स में हम अभी भी काफ़ी संभावनायें देख रहे हैं।


7 मई को जारी आंकङ़ों के अनुसार भारतीय बैंकों का कर्ज़ 17.2% बढ़ा है। बाज़ार के विशलेषक 2010/11 के प्रथम हिस्से में ऋण की मांग और बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि औद्योगिक कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने के लिये अधिक पैसे की आवश्यकता पङ़ेगी। 


मार्च 2010 के आंकङ़े के मुताबिक पिछले 6 महीनों में किसी तिमाही में  भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेज़ी से विकसित हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक खपत के बढ़ते चलन के कारण उपभोक्ता क्षेत्र भी केंद्र बिंदू रहेगा। सभी के मुताबिक इस क्षेत्र में उनका एक्सपोज़र बना रहेगा या और अधिक विकसित होगा।


कुछ ऐसे फंड मैनेजर हैं जो स्टॉक्स और बॉण्ड दोनों में निवेश का संतुलन बनाये रखते हैं। सर्वे में ये बात निकलकर सामने आई कि वो भी अब नकद साधनों से अपने पैसे हटाना चाहते हैं।