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निवेश के 3 मंत्र - रिटर्न, जोखिम, लिक्विडिटी

निवेश करते वक्त निवेशकों को 3 बातें ध्यान में रखनी चाहिए - रिटर्न, जोखिम और लिक्विडिटी।
अपडेटेड Oct 07, 2011 पर 14:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

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निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है, किसमें निवेश किया जाए। निवेश करते वक्त निवेशकों को 3 बातें ध्यान में रखनी चाहिए - रिटर्न, जोखिम और लिक्विडिटी।

निवेशकों के लिए रिटर्न के अलावा जोखिम और लिक्विडिटी का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। वही पोर्टफोलियो सही माना जाता है कि जिसमें ज्यादा से ज्यादा रिटर्न के साथ-साथ जोखिम और लिक्विडिटी में भी तालमेल बिठाया गया हो।

जरूरी है कि निवेशक जितना जोखिम उठाने की क्षमता रखता हो, उतना ही रिटर्न का लक्ष्य बनाएं। इक्विटी में जोखिम ज्यादा होता है, इसलिए रिटर्न भी ज्यादा होता है। वहीं, डेट और डिबेंचर्स में जोखिम कम होने से रिटर्न भी कम होता है। पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट का अनुपात निवेशक की जोखिम क्षमता के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए।

इसके अलावा जरूरी है कि निवेश के विकल्प की लिक्विडिटी को ध्यान में रखना है। लिक्विडिटी का मतलब है कि कितनी जल्दी निवेश को नकदी में बदला जा सकता है। निवेश का कुछ हिस्सा लिक्वड एसेट में डाला जाना चाहिए, जैसे सोना, ताकि जरूरत पड़ने पर निवेशक को जल्द से जल्द नकदी मिल पाए।

इस लेख के लेखक लोवाई नवलखी इंटरनेशनल मनी मैटर्स के एमडी और चीफ फाइनेंशियल प्लानर हैं।