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राजधानी दिल्ली 100 बरस की हुई, पर कोई समारोह नहीं!

देश की राजधानी नई दिल्ली आज सौ वर्ष की हो गई, लेकिन इस मौके पर किसी बड़े समारोह का आयोजन नहीं हुआ।
अपडेटेड Dec 13, 2011 पर 15:53  |  स्रोत : Hindi.in.com

13 दिसम्बर 2011
वार्ता

नई दिल्ली।
देश की राजधानी नई दिल्ली आज सौ वर्ष की हो गई, लेकिन इस मौके पर किसी बड़े समारोह का आयोजन नहीं हुआ। इस महानगर की संपन्नता और चकाचौंध के बावजूद इसके दिल में बसने वाली यमुना नदी के गंदे नाले के रुप में परिवर्तित होना शासकों और नागरिकों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

गुलामी के दौर में अंग्रेज सम्राट जॉर्ज पंचम ने 12 दिसम्बर 1911 को कोलकाता के स्थान पर दिल्ली को राजधानी बनाया। इसकी रूपरेखा और निर्माण कार्यों की देखरेख ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुचेंस (लुटियन) ने की थी। एक सौ पचास वर्षों तक कोलकाता के जरिये भारत पर शासन करने के बाद अंग्रेजों ने अपनी साम्राज्य विस्तार के मद्देनजर राजधानी को उत्तर भारत स्थानांतरित कर दिल्ली को नए स्थान के रूप में चुना था तथा यहां नयी राजधानी बनाने का महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया।

राजधानी दिल्ली के सौ बरसों का सफर...


पिछली शताब्दी की शुरूआत में दो लाख 30 हजार की आबादी वाला शहर दिल्ली आज दुनिया का सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला शहर बन गया है तथा अपने उपनगरों गुड़गांव, नोएडा को मिलाकर इसकी जनसंख्या दो करोड़ का आंकड़ा छू रही है।

दिल्ली के राजधानी बनने पर कल तो कोई बड़ा समारोह नहीं हुआ, किंतु अगले वर्ष जनवरी से एक वर्ष तक कई समारोहों के आयोजन की योजना है। दिल्ली सरकार और अन्य संस्थाए इन आयोजनों में भागीदार बनेंगी।

राजधानी के प्रमुख अखबारों में दिल्ली की स्थापना का शतक पूरा होने पर आज कोई विशेष कवरेज नजर नहीं आई। दिल्ली की स्थापना का शतक पूरा होने के मौके पर कुछ छिटपुट कार्यक्रम और एक प्रदर्शनी का आयोजन हुआ।

जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी ने 15 दिसम्बर 1911 को किंग्जवे कैंप स्थित दिल्ली दरबार में नए शहर की इमारत का शिलान्यस किया।

दिल्ली के सौ वर्ष पूरा होने के मौके पर बाबा खड़क सिंह मार्ग पर एक बड़ा खाद्य उत्सव ‘दिल्ली के पकवान’ पिछले कई दिन से चल रहा है, जहां राजधानी के प्रमुख पकवानों का लुत्फ उठाया जा सकता है।

सौ वर्ष पूरा होने के मौके पर दिल्ली के लोगों ने राजधानी के बेतरतीब विकास को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि राजधानी में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाये गए।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों के दौरान दिल्ली के स्वरुप में काफी बदलाव नजर आया है। यहां की मेट्रो रेल सेवा की चर्चा विश्व में होती हैं। एक हजार से अधिक धरोहर भवन और स्मारक स्थल दुनिया के पर्यटकों को दिल्ली खींच लाते हैं।

पुराने समय में थोक बाजार के रूप में उत्तर भारत में अपनी पहचान बनाने वाला दिल्ली शहर आज सूचना प्रौद्योगिकी, अचल संपत्ति और प्रबंधन के क्षेत्र में दुनिया की बड़ी कंपनियों का पसंदीदा मुकाम बन गया है।

महानगर की इस सफलता की गाथा में सबसे बड़ा बदनुमा दाग राजधानी की जीवनधारा समझी जाने वाली यमुना का एक गंदे नाले के रूप में परिवर्तित होना है। राजधानी बनने के पहले यमुना एक साफ-सुथरी पवित्र नदी थी, लोगों की आस्था की इस नदी का आज हाल यह है कि इसका पानी मनुष्यों के पीने या नहाने लायक नहीं रह गया तथा यह पशु-पक्षियों के लिए भी खतरनाक हो चुका है।

यमुना नदी को साफ करने के लिए कई योजनाएं बनाई गईं और करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बाद भी नदी गंदा नाला ही बनी हुई है।