Moneycontrol » समाचार » म्यूचुअल फंड खबरें

एमएफ से निकला पैसा

म्यूचुअल फंड स्कीम्स से जून के महीने में करीब 20 प्रतिशत पैसा निकल गया है।
अपडेटेड Jul 01, 2010 पर 12:52  |  स्रोत : Hindi.in.com

01 जुलाई, 2010 


सीएनबीसी आवाज़ 


 


लिक्विड या पूंजी बाज़ार योजनाओं पर खास तौर पर भारी दबाव के चलते म्यूचुअल फंड स्कीम्स से जून के महीने में करीब 20 प्रतिशत पैसा निकल गया है।

 

फंड कंपनियों की बड़ी परेशानी ये है कि नया पैसा जुटाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

 

स्पेक्ट्रम नीलामी से सरकारी खजाना तो भर गया, लेकिन बैंक और म्यूचुअल फंड कंपनियों की परेशानी बढ़ गयी। परेशानी बढ़ाने का काम एडवांस टैक्स ने भी किया। इस टैक्स की पहली किश्त जमा कराने की आखिरी तारीख 15 जून थी।

 

कुल मिलाकर हालात ये बने कि तमाम देनदारियों के लिए कंपनियों ने बैंकों से भारी कर्ज लिया। इसी के साथ कंपनियों और बैंकों ने जहां-जहां थोड़े समय के लिए पैसे जमा थे, वो निकाल लिए। इसकी भारी मार म्यूचुअल फंड कंपनियों पर पड़ी। नतीजा ये हुआ कि जून के महीने में म्यूचुअल फंड की विभिन्न स्कीमों से करीब एक लाख 60 हजार करोड़ रुपये निकाल लिए गए।

 

ये इंडस्ट्री में औसत मासिक निवेश का करीब 20 प्रतिशत है। सबसे ज्यादा पैसे लिक्विड या मनी मार्केट म्यूचुअल फंड स्कीम्स से निकले, जबकि इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड स्कीम्स पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।

 

म्यूचुअल फंड की तमाम योजनाओं की रकम का आधे से भी ज्यादा लिक्विड या पूंजी बाज़ार की योजना से आती है। छोटे-छोटे मियाद के लिए इन योजनाओं में कंपनियां पैसा जमा कराती हैं। मई के महीने में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से करीब 63 हजार करोड़ रुपये निकल गए थे।

 

फंड कंपनियों का रोना ये है कि नया निवेश लाना काफी मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर ब्याज दरों में तेजी के आसार ने भी पूंजी बाज़ार के उपकरण पर असर डाला है। फंड कंपनियों का ये भी कहना है कि एंट्री लोड खत्म होने की वजह से एजेंट और ब्रोकरों में नए निवेश लाने का उत्साह नहीं रहा।

 

अब फंड कंपनियों को 27 जुलाई की पॉलिसी का इंतजार है। पॉलिसी में ब्याज दरों की स्थिति साफ होने के बाद ही पूंजी बाज़ार में नए सिरे से गतिविधि देखने को मिलेगी और उसका असर निवेश पर पड़ेगा।