प्रणव मुखर्जी के बजट से निराश बाजार

बजट में सरकार ने वित्तीय हालात सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं
अपडेटेड Mar 16, 2012 पर 20:00  |  स्रोत : Moneycontrol.com

प्रणव मुखर्जी के लिए अच्छा रहा है कि बजट पर राजनीति को देखते हुए लोगों ने बहुत थोड़ी उम्मीदें ही रखी थीं। बाजार को फिर भी सब्सिडी में कटौती, खर्चों में कमी, निवेश को बढ़ावा और जीएसटी-डीटीसी को लागू करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। लेकिन, प्रणव मुखर्जी ने लोगों की इतनी कम उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया।


बाजार को डर है कि सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और सर्विस टैक्स का दायरा बढ़ने से महंगाई में उछाल आ सकता है। कंपनियां टैक्स में बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर ही डालेंगी। इस चिंता से बॉन्ड यील्ड 8.4 फीसदी तक चढ़ गए हैं।


कुछ अर्थशास्त्रियों के मुताबिक देश के विकास के पीछे की वजह निवेश न होकर बढ़ती मांग होना चिंता की बात है। वहीं, बजट में उत्पादन बढ़ाने के लिए कोई कदम न उठाए जाने से, महंगाई की स्थिति और बिगड़ने की आशंका है। ईंधन और बिजली के दाम अगर बढ़ते हैं तो महंगाई और दबाव बनेगा।


वित्त वर्ष 2013 के लिए सरकार ने वित्तीय घाटे का लक्ष्य 5.1 फीसदी रखा है और सरकार की 5.69 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने की योजना है। इन दोनों आंकड़ों पर बाजार को भरोसा नहीं है। होगा भी कैसे, जब वित्त वर्ष 2012 में वित्तीय घाटा और उधारी दोनों ही लक्ष्य से कहीं ज्यादा रहे। कच्चे तेल में उबाल, वैश्विक बाजारों में उठलपथुल की वजह से पूंजी प्रवाह कम होने और आर्थिक सुधारों की ओर कदम उठाने में सरकार की हिचक को देखते इस साल भी घाटा और कर्जा लक्ष्य में रखना नामुमकिन नजर आ रहा है।


अब नजर आरबीआई पर है। आरबीआई पहले ही संकेत दे चुका है कि जब तक सरकार वित्तीय घाटे को कम करने के लिए कदम नहीं उठाती है, तब तक दरों में कटौती नहीं की जाएगी। साथ ही, कच्चे तेल में उबाल की वजह से आरबीआई को


महंगाई की चिंता सताने लगी है। चाहे बजट लोकलुभावन न रहा हो, लेकिन इसमें ठोस कदमों की कमी है। सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी की अपेक्षित ही थी, क्योंकि सरकार पर आय बढ़ाने का दबाव था। लेकिन, माना जा रहा था कि प्रणव मुखर्जी आम आदमी को आयकर छूट बढ़ाकर कुछ राहत भी देंगे। महंगाई के इस हाल में आयकर छूट सीमा में 20000 रुपये की बढ़ोतरी, ना के बराबर है। जबकि टैक्स कम होने से महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।


शेयर बाजार के नजरिए से बजट में 2 अहम प्रस्ताव रखे गए। पहला है राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम, जिसमें नए रिटेल निवेशकों को 50000 रुपये तक के निवेश पर 50 फीसदी की टैक्स छूट मिलेगी। दूसरा, सिक्योरिटीज ट्रांसजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में महज 0.025 फीसदी की कटौती की गई, जिससे बाजार निराश हुए।


पहले के बजट के मुकाबले बाजार में भारी उतार-चढ़ाव नजर नहीं आया। बाजार में थोड़ी प्रतिक्रिया दिखी, लेकिन ज्यादा वक्त सीमित दायरे में ही घूमता रहा। इसका मतलब है कि बाजार को बजट से थोड़ी भी उम्मीद नहीं थी और सभी नकारात्मक घोषणाओं का अंदाजा बाजार को पहले से ही था।


एकमात्र अच्छा संकेत है बाकी वैश्विक बाजारों में लिक्विडिटी काफी है, जिससे घरेलू बाजार में विदेशी निवेश बढ़ रहा है। लेकिन, अगर हालात जल्द नहीं सुधरते हैं तो एफआईआई निवेश भी बाजार को तार नहीं पाएगा।


(ये लेख संतोष नायर ने लिखा है, जो मनीकंट्रोल डॉट कॉम के एडिटर हैं)