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निवेशकों पर कैसे होगा बजट का असर!

राजीव गांधी इक्विटी स्कीम में 50,000 रुपये तक के निवेश पर 50 फीसदी रकम में आयकर छूट मिलेगी।
अपडेटेड Mar 31, 2012 पर 12:19  |  स्रोत : Moneycontrol.com

1. राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम से शेयरों में बढ़ेगा निवेश


राजीव गांधी इक्विटी स्कीम में 50,000 रुपये तक के निवेश पर 50 फीसदी रकम में आयकर छूट मिलेगी। हालांकि राजीव गांधी इक्विटी स्कीम के तहत शेयरों में निवेश पर 3 साल का लॉक-इन पीरियड लागू होगा।


असर


भारत में इक्विटी में निवेश का अनुपात बेहद कम है। 100 रुपये की बचत में से इक्विटी पर सिर्फ 5 रुपये का निवेश होता है। वहीं बाकी की रकम को फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स में निवेश करने को तरजीह दी जाती है। लेकिन राजीव गांधी इक्विटी स्कीम से शेयरों में निवेश बढ़ने के आसार हैं।


2. रिटेल निवेशकों के लिए टैक्स-फ्री इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्डों में निवेश का अच्छा मौका


इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों को वित्तीय मदद के लिए 2011-12 में टैक्स-फ्री बॉन्ड जारी करने का फैसला किया गया। निवेशकों की ओर से टैक्स-फ्री बॉन्ड को काफी अच्छा प्रतिसाद भी मिला और निवेशकों के हाथ टैक्स सेविंग का मौका भी मिल गया। अब सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर बॉ़न्डों में निवेश पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने का ऐलान किया है जिससे निवेशकों को अच्छी सौगात मिली है।


3. एसटीटी में कटौती से म्यूचुअल फंडों की लागत घटेगी


बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में 20 फीसदी (0.125 फीसदी से घटकर 0.1 फीसदी) की कटौती की गई है।


असर


शेयर बाजारों में डिलीवरी आधारित शेयरों की खरीद-बिकवाली पर एसटीटी घटाए जाने से लागत घट जाएगा। इस कदम से प्रत्यक्ष निवेशकों के साथ-साथ म्यूचुअल फंडों को फायदा मिलेगा।


4. बचत खाते की ब्याज आय पर टैक्स छूट


बैंक बचत खाते, डाकघर की बचत योजना और को-ऑपरेटि सोसायटी में जमा की जानेवाली रकम पर सेक्शन 80टीटीए के तहत 10,000 रुपये की ब्याज आय पर टैक्स छूट मिलेगी।


5. बढ़ते वित्तीय घाटे से ब्याज दर पर असर


वित्त वर्ष 2012 में देश का वित्तीय घाटा जीडीपी का 5.9 फीसदी रहा है। वित्त वर्ष 2013 में देश का वित्तीय घाटा 5.1 फीसदी रहने का अनुमान है।


असर


क्रिसिल के मुताबिक वित्त वर्ष 2013 में देश का वित्तीय घाटा 5.5 फीसदी रह सकता है। लिहाजा सरकार की उधारी योजना में बढ़ोतरी होगी और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो सकती है। बढ़ते वित्तीय घाटे से आरबीआई की ओर से प्रमुख ब्याज दरों में कटौती करने का फैसला कमजोर पड़ जाएगा।


इस लेख के लिए क्रिसिल रिसर्च की मदद ली गई है।