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विनिवेश का लक्ष्य होगा पूराः विनिवेश सचिव

विनिवेश सचिव के मुताबिक वित्त वर्ष 2013 में सरकारी कंपनियों के आईपीओ में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले बढ़ोतरी होगी।
अपडेटेड Apr 04, 2012 पर 11:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

विनिवेश के जरिए पैसे जुटाना सरकार को चुनौतियों में इस वक्त सबसे ऊपर है। पिछले साल विनिवेश की गाड़ी को लगे जोरदार झटके के बाद सरकार इस साल ज्यादा व्यवहारिक दिख रही है। लेकिन क्या इस साल 30,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य भी सरकार हासिल कर पाएगी, बाजार को इसी बात की फिक्र है। इसके अलावा एसयूयूटीआई, नीलामी की प्रक्रिया में बदलाव, ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनपर बाजार सफाई चाहता है।


सरकार इन चुनौतियों का सामना कैसे करेगी इस पर विनिवेश सचिव हलीम खान का कहना है कि विनिवेश का सफल होना बाजार के माहौल और किस दाम पर विनिवेश होता है उस पर निर्भर होगा। वित्त वर्ष 2013 में विनिवेश के जरिए 30,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने का पूरा भरोसा है। वहीं वित्त वर्ष 2013 में सरकारी कंपनियों के आईपीओ में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले बढ़ोतरी होगी।


हलीम खान के मुताबिक 30,000 करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य वित्तीय घाटे के आंकड़े को ध्यान में रखते हुए किया गया है। 30,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य में हिंदुस्तान जिंक और बाल्को को शामिल किया गया है, इसपर अभी कुछ कहना मुश्किल है।


हलीम खान ने बताया कि ओएनजीसी ऑक्शन की प्रक्रिया में गलती की वजह दोनों एक्सचेंजों पर बोली लगवाना था। दोनों एक्सचेंजों द्वारा एक ही समय पर बोली के आंकड़े दिखाने में तालमेल नहीं होने से भी दिक्कत हुई। एक ही समय पर बोली के आंकड़े नहीं मिलने के कारण आखिरी समय पर पैसा डालने वाले निवेशकों में असमंजस पैदा हो गया।


हलीम खान का मानना है कि ऑक्शन की प्रक्रिया में बोली लगाने की समय सीमा पूरे दिन के मुकाबले 3 घंटे होनी चाहिए। ऑक्शन की प्रक्रिया के जरिए हिस्सा बेचना एक बेहतर और कम लागत का जरिया है। सरकार की वित्त वर्ष 2013 में आरआईएनएल और एचएएल की आईपीओ लाने की तैयारी है।


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