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नए वित्तीय वर्ष में करें पोर्टफोलियो की समीक्षा

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ व्यक्ति को अपने पोर्टफोलियो का लेखा-जोखा करना चाहिए।
अपडेटेड Apr 05, 2012 पर 10:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वित्त वर्ष 2013 की शुरुआत हो चुकी है, वहीं अब समय आ गया है कि इस नए वित्त वर्ष के लिए निवेश और टैक्स प्लानिंग जरूरत है। जो कि आम व्यक्ति कई साल से करता चला आ रहा है, तो वहीं कुछ ऐसे लोग भी देखे गए हैं जो कभी भी निवेश और टैक्स को लेकर कोई प्लानिंग नहीं करते हैं और ना ही अपने पोर्टफोलियो में किए गए निवेश की समीक्षा करते है। जिसके चलते भविष्य के लक्ष्यों को हासिल कर पाने में अक्सर ऐसे लोग पीछे छूट जाते हैं।


जिस तरह एक नए साल की शुरुआत के साथ ही प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में नए संकल्प करता है। वह खुद की समीक्षा करता है, सोचता है कि बीते साल में उसने क्या खोया और क्या पाया, अपने लक्ष्यों को हासिल करने में  वह कितना सफल रहा और कितना असफल। इन सारी बातों की समीक्षा करके वह नए साल में अपनी कमियों को सुधारने का संकल्प करता है। ठीक उसी तरह ही व्यक्ति को हर नए वित्तीय वर्ष के साथ अपने पोर्टफोलियों की भी समीक्षा करनी चाहिए। अपने निवेश का लेखा-जोखा देखना चाहिए कि कितना बढ़ा और कितना घटा है, कहां मुनाफा हुआ और कहां नुकसान उठाना पड़ा है। इसी परिपाठी को अपनाकर वह अपने निवेश को सुरक्षित बना सकता है और भविष्य में वित्तीय जरूरत से पूरा कर सकता है।


वाइज इवेंस्टा एडवाइजर्स के सीईओ हेमंत रुस्तगी का कहना है कि व्यक्ति को साल में एक बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करनी चाहिए। वहीं यह समीक्षा नए वित्तीय वर्ष के साथ शुरू हो तो ज्यादा बेहतर होता है, जिससे वित्त वर्ष की समाप्ति के समय टैक्स चुकाने के मोर्चे पर भी मदद मिल जाती है।


हेमंत रुस्तगी के मुताबिक बजट में टैक्स और निवेश के नियमों में बदलाव किया गया है। जिसको देखते हुए व्यक्ति को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करना जरूरी है। निवेशक को देखना चाहिए अपने पोर्टफोलियो में रखे फंड क्या बेहतर तरीके से रिटर्न देने की राह पर अग्रसर हैं या नहीं। यदि पोर्टफोलियो की समीक्षा करते समय संदेह हो कि कोई फंड आपके भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने में रोड़ा बन सकता है, तो बिना किसी विचार के उसे अपने पोर्टफोलियो से निकाल दें, वहीं उसकी जगह अच्छा रिटर्न देने वाला कोई दूसरा फंड अपने पोर्टफोलियो में रख सकते हैं।


फ्रीडम फाइनेंशियल प्लानर के सीईओ हेमंत रुस्तगी के अनुसार नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही व्यक्ति की टैक्स प्लानिंग शुरू कर देनी चाहिए। क्योंकि अक्सर देखा गया है कि साल के अंत में टैक्स भरने के दौरान लोग टैक्स बचाने की प्लानिंग करते हैं। जिसके चलते सिर्फ टैक्स बचाने के नजरिए से कोई इंश्योरेंस पॉलिसी या म्यूचुअल फंड ले लेते हैं। टैक्स प्लानिंग करने की यह बेहद गलत प्रक्रिया है। व्यक्ति हर नए वित्तीय वर्ष के साथ निवेश की समीक्षा और टैक्स बचाने की नीति तैयार करनी चाहिए।


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