प्रॉपर्टी निवेश पर जानकारों की राय -
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प्रॉपर्टी निवेश पर जानकारों की राय

प्रकाशित Thu, 05, 2012 पर 10:52  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

प्रॉपर्टी निवेश से जुड़े सवालों पर जानिए प्रॉपर्टी के दिग्गज जानकार नाइट फ्रैंक इंडिया के नेशनल डायरेक्टर अमित गोयनका और लीगल एक्सपर्ट उदय वावीकर की सलाह -


सवाल : मैसूर और बंगलूरू इन दो में से कहां निवेश करना बेहतर है? मैसूर के किस इलाके में निवेश फायदेमंद होगा? बजट 30-35 लाख रुपये का है। 


अमित गोयनका : मैसूर का प्रॉपर्टी बाजार ज्यादा उभरता हुआ नजर नहीं आ रहा है। लेकिन आप मैसूर के निवासी है और मैसूर में ही प्रॉपर्टी लेना चाहते है, तो विजय नगर में तुलसी ग्रुप का करीब 2000 रुपये प्रति वर्गफुट का प्रोजेक्ट मौजूद है। अगर आपका बजट थोड़ा ज्यादा है तो मैसूर में ही जेपी नगर या सिद्धार्थ नगर लोकेशन भी काफी अच्छा है। लेकिन अगर आप निवेशक है तो आपको बैंगलोर की तरफ ही फोकस करना चाहिए।


सवाल : जयपुर-अजमेर हाइवे पर महिंद्रा वर्ल्ड सिटी सेज के पास 150 स्क्वेयर यार्ड का प्लॉट लिया है। इस निवेश से कितने फायदे की उम्मीद है?  


अमित गोयनका : जमीन खरीदारी में लंबी अवधि का निवेश रखना जरूरी होता है। आपको कम से कम 8-10 साल तक निवेश बनाए रखना चाहिए। महिंद्रा वर्ल्ड सिटी बनने से इंडस्ट्रीज को काफी बढ़ावा मिला है। हालांकि जयपुर की ग्रोथ में अब धीमापन देखने को मिल रहा है। लेकिन बड़े डेवलपर्स के आने से भविष्य में कीमते बढ़ सकती है।    


सवाल : नोएडा में कमर्शियल प्रॉपर्टी किराए पर लेनी है। 10-15 साल तक प्रॉपर्टी लीज पर लेने के लिए क्या करना होगा?


उदय वावीकर : कमर्शियल प्रॉपर्टी किराए पर लेने के लिए लीज डीड बनाकर रजिस्टर्ड करना जरूरी है। इसके लिए आप अच्छे वकील की मदद लें। अगर आप डीड रजिस्टर्ड नहीं करते तो कोर्ट में अवैध मानी जाएगी। डीड रजिस्टर्ड करते वक्त आपको स्टैम्प डयूटी भरनी होगी।  


सवाल : हम तीन भाइयों ने मिलकर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी शुरू की थी, जमीन हमारी थी। जिसमें तीनों का बराबरी का निवेश था। अब भाइयों के साथ मेरा झगड़ा हुआ है। अब अगर मैं कंपनी से इस्तीफा दे दूं तो मुझे फैक्टरी में हिस्सा कैसे मिलेगा? 


उदय वावीकर : जमीन कंपनी के नाम पर है, इसलिए जमीन पर किसी एक का मालिकाना हक नहीं होगा। लेकिन शेयर होल्डिंग के मुताबिक आपको हिस्सा मिलेगा।  


सवाल : दादाजी की प्रॉपर्टी पिताजी के नाम पर रजिस्टर्ड है और इससे चाचाजी नाराज हैं। चाचाजी कोर्ट में केस करना चाहते है। रजिस्ट्रेशन के वक्त दो लोगों का दस्तखत लिया था, उनमें से एक का देहांत हुआ है, क्या हम किन्हीं और 2 लोगों के दस्तखत से अपना केस मजबूत कर सकते हैं?


उदय वावीकर : दादाजी ने अपनी मर्जी से प्रॉपर्टी पिताजी के नाम की हो तो किसी और का प्रॉपर्टी पर हक नहीं बनता। एग्रीमेंट रजिस्टर्ड हो तो गवाह ना होने से फर्क नहीं पड़ेगा। अगर दादाजी पार्टिशन केस दायर करें तो आप कोर्ट में कागजात पेश कर सकते हैं। 


सवाल : 2004 में फ्लैट लिया है, रजिस्ट्री के वक्त बिल्डर ने गलत फ्लैट नंबर दिया, इसलिए रजिस्ट्रेशन गलत नंबर पर हुआ, उसे सही करने के लिए क्या करें?


उदय वावीकर : आप डेवलपर के दस्तखत से रजिस्ट्री में सुधार कर सकते हैं। फ्लैट नंबर सही करने के लिए आप रजिस्ट्रार ऑफिस में रेक्टिफिकेशन डीड दायर कर सकते हैं।


सवाल : क्या बिल्डिंग को ओसी मिलने से पहले फ्लैट में बदलाव कर सकते हैं?


उदय वावीकर : फ्लैट में किए जाने वाले बदलाव का ओसी से कोई संबंध नहीं है। लेकिन फ्लैट में बदलाव के लिए आपको नगर निगम, डेवलपर या सोसायटी से मंजूरी जरूर लेनी चाहिए। इंटीरियर डेकोरेटर या आर्किटेक्ट से स्ट्रक्चरल बदलाव ना करने का सर्टिफिकेट लेना चाहिए।   


सवाल : घर किराए पर देने से पहले किन बातों का ख्याल रखें और साथ ही सोसायटी से किस तरह की मंजूरी लेना जरूरी है?


उदय वावीकर : को-ऑपरेटिव सोसायटी एक्ट के तहत आपको रजिस्टर्ड लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट की कॉपी सोसायटी को देनी होगी और साथ ही किराएदार का पुलिस वेरिफिकेशन भी देना होगा। अगर किराएदार का क्रिमिनल बैकग्राउंड हो तो सोसायटी मना कर सकती है।  


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