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म्युचुअल फंड के ‘क्लाइंट ब्रोकर’ करार में बदलाव

ग्राहक के पैसों का नाजायज इस्तेमाल करने पर ब्रोकर भरेगा जुर्माना।
अपडेटेड Apr 17, 2010 पर 16:01  |  स्रोत : Hindi.in.com

15 दिसंबर 2009

आवाज समाचार


 

बाजार नियामक सेबी ने ग्राहक और ब्रोकर या एजेंट के बीच झगड़े खत्म करने और पारदर्शिता लाने के लिए ‘ब्रोकर क्लाइंट’ करार में बदलाव का परिपत्र जारी किया है। सेबी ने कहा है कि ब्रोकर अगर ग्राहक के पैसों का नाजायज इस्तेमाल करता है तो उसे जुर्माना भरना होगा।

 

इसके साथ ही ग्राहक को भुगतान देर से देने पर ब्याज भी देना होगा। सेबी का कहना है कि ब्रोकर अब ग्राहक को तय सीमा से ज्यादा का ‘क्रेडिट’ नहीं देगा,  इसके कारण ही ग्राहक ‘डिफॉल्ट’ करता है और फिर उससे भारी ब्याज लेकर रकम वसूली जाती है।

 

सेबी ने म्युचुअल फंड कंपनियों को लताड़ा

 

सेबी ने अपने परिपत्र में एक्सचेंजों से कहा है कि 31 मार्च से पहले ‘क्लाइंट ब्रोकर’ करार के नए नियम लागू हो जाने चाहिए।