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मुश्किल में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कारोबार

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के मुताबिक इंसेंटिव न होने के चलते बड़ी संख्या में डिस्ट्रीब्यूटर इंडस्ट्री से बाहर हो रहे हैं।
अपडेटेड May 08, 2012 पर 08:53  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री सेबी से वेरिएबल लोड लागू करने की मांग कर रही है। इंडस्ट्री के मुताबिक इंसेंटिव न होने के चलते बड़ी संख्या में डिस्ट्रीब्यूटर इंडस्ट्री से बाहर हो रहे हैं। जिसका खामियाजा डिस्ट्रीब्यूटर और इंडस्ट्री दोनों को भुगतना पड़ रहा है।

3 साल पहले जहां करीब 1 लाख म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर थे वहीं अब उनकी संख्या सिर्फ 20,000 के आसपास रह गई है। और महीने में 1 ट्रांजैक्शन करने वाले डिस्ट्रीब्यूटर तो सिर्फ 6,000 के आसपास ही हैं। हाल ही में सेबी के साथ हुई बैठक में फाइनेंशियल एडवाइजर की संस्था आईएफए गेलेक्सी ने डिस्ट्रीब्यूटरों के लिए वैरिएबल लोड की मांग की जिसमें निवेशक खुद डिस्ट्रीब्यूटर की फीस तय करता है।

हालांकि सेबी ने म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटरों को 100 रुपये की ट्रांजैक्शन फीस वसूलने का विकल्प दिया था। पर कम फीस होने के चलते करीब 90 फीसदी डिस्ट्रीब्यूटरों ने इस फीस के विकल्प को नहीं अपनाया और अब दोबारा इंसेंटिव की बात उठ रही है। सेबी के मुताबिक एंट्री लोड का मुद्दा उसके सामने नहीं आया है, पर वेरिएबल लोड पर विचार जारी है।

वित्त वर्ष 2012 में करीब 56,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ वहीं करीब इतने ही रुपये निवेशकों ने रिडीम भी कर लिए। इंडस्ट्री में सिर्फ डिस्ट्रिब्यूटर ही नहीं कर्मचारी भी परेशान हैं। एक कंसलटेंसी फर्म के मुताबिक इंडस्ट्री के करीब 15 फीसदी कर्मचारी बिना नौकरी के घूम रहे हैं। तो चारों और परेशानी से घिरी इस इंडस्ट्री के लिए सेबी क्या करता है ये देखने वाली बात होगी।


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