Moneycontrol » समाचार » टैक्स

टैक्स की उलझन सुलझाएं टैक्स गुरु के संग

प्रकाशित Sat, 12, 2012 पर 15:18  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया जी से जानिए टैक्स की बारीकियां और टैक्स से जुड़ी उलझनों पर सुझाव -


सवाल : वित्त मंत्री ने फाइनेंस बिल में जो बदलाव किए है वो किस तरह दिख रहे हैं और सबसे अहम बदलाव कौन-सा है? 


सुभाष लखोटिया : फाइनेंस बिल 2012 में हुए बदलावों पर चिंता करने की बात नहीं है। फाइनेंस बिल 2012 में सरकार ने जीएएआर को 1 साल के लिए टाल दिया है। अब जीएएआर अप्रैल 2013 से लागू होगा। जीएएआर लागू होगा या नहीं इसको सिद्ध करने का जिम्मा टैक्स विभाग है। साथ ही सरकार ने जीएएआर के नियमों पर एक पैनल भी बनाया है।


इसके अलावा फाइनेंस बिल में रिट्रोस्पेक्टिव अमेंडमेंड के प्रोविजन हटने की आशा थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। लेकिन, वित्त मंत्री ने रिट्रोस्पेक्टिव अमेंडमेंड पर स्पष्टीकरण दिया कि जहां पर एसेसमेंट पूरा हो गया है वहां रिट्रोस्पेक्टिव अमेंडमेंड लागू नहीं होगा और इसके लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ डिरेक्ट टैक्सेस एन ड्यू कोड्स एक क्लियरिफिकेशन या सर्क्यूलर भी जारी कर देगा।


टैक्स वसूली के निपटे हुए पुराने मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा। अनिवासी प्राइवेट इक्विटी निवेशक के लिए लॉंन्ग टर्म कैपिटल गेन घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। इसके अलावा अनलिस्टेड शेयरों पर 0.2 फीसदी एसटीटी का प्रस्ताव जारी किया। फाइनेंस बिल में आए प्रस्तावों का ज्यादा फायदा नहीं होगा, लेकिन इन प्रावधानों से देश की तरक्की होने की उम्मीद है।        


सवाल : जीएएआर क्या है?
  
सुभाष लखोटिया : जीएएआर जनरल एंटी अवाइडेंस रुल्स। जीएएआर नियमों से नौकरी पेशा कर्मचारियों को कोई परेशानी नहीं होगी। अगर सरकार को सैलरी-भत्तों के नियमों के दुरुपयोग का अंदेशा हुआ तो आईटी कानून में बदलाव करेगी।


जो टैक्स करदाता अग्रेसीव टैक्स प्लानिंग कर रहा है या टैक्स की चोरी के उद्देश से ही खरीद फरोख्त का कोई प्रावधान कर रहा है, तो वैसे प्रावधान से सरकार जीएएआर के जरिए टैक्स की चोरी रोकने की कोशिश कर रहा है।


सवाल :  प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त पर टीडीएस हटा देना ये कितनी फायदेमंद होगा?


सुभाष लखोटिया : रियल्टी सेक्टर में काला धन रोकने के लिए प्रॉपर्टी पर टीडीएस काटने प्रस्ताव लाया गया था। ये प्रस्ताव छोटे शहरों में 20 लाख रुपये और बड़े शहरों में 50 लाख रुपये से ऊपर के प्रॉपर्टी सौंदों पर 1 फीसदी टीडीएस काटने के लिए लाया गया था और लेकिन ये प्रावधान काफी चिंताजनक था। लेकिन सरकार ने करदातों की समस्याओं को समझ लिया और इस प्रावधान को लुप्त कर दिया।


बजट में 2 लाख रुपये तक के कैश में ज्वेलरी खरीदने पर टैक्स कटने का प्रावधान था और ज्वेलर को गहने बेचते वक्त ही टैक्स काटना था। लेकिन अब 5 लाख तक की ज्वेलरी कैश में खरीदने पर टैक्स नहीं कटेगा।      
  
सवाल : सालाना 8000 रुपये प्रीमियम का लॉन्ग टर्म प्लान लेते हैं और 50 लाख सम एश्योर्ड है तो क्या सेक्शन 80 सी के तहत छूट मिलेगी?   
 
सुभाष लखोटिया : सालाना प्रीमियम सम एश्योर्ड का 10 फीसदी या उससे कम है तो टैक्स छूट लेने में कोई परेशानी नहीं होगी।        


सवाल : कोई ऐसी स्कीम है जिसकी तहत एनआरआई व्यक्ति सेक्शन 80 सी के तहत फायदा ले सकते हैं?


सुभाष लखोटिया : इनकम टैक्स में एनआरआई व्यक्तियों के लिए सेक्शन 80 सी का फायदा लेने पर कोई पाबंदी नहीं है। एनआरआई व्यक्तियों को सेक्शन 80 सी के तहत 1 लाख रुपये तक का फायदा मिल सकता है।


सवाल : ई-रिटर्न कैसे भरते है, पूरी प्रक्रिया के बारे में बताएं।
  
सुभाष लखोटिया : ई-रिटर्न भरने की प्रक्रिया बेहद आसान है। आप  incometaxindia.gov.in  पर लॉग-इन करें और सही फॉर्म का चुनाव करके रिटर्न फाइल करें।   


सवाल : पुश्तैनी जमीन बेचकर सेविंग्स अकाउंट में रखी और 1 साल में नई प्रॉपर्टी खरीदी, क्या कैपिटल गेन टैक्स लगेगा?


सुभाष लखोटिया : प्रॉपर्टी बेचने पर रकम कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम में रखनी चाहिए। अगर रकम सेविंग अकाउंट में रखी जाती है टैक्स छूट का फायदा नहीं मिल सकेगा।


सवाल : इनकम टैक्स के तहत अपने पास सोना रखने की सीमा क्या है? मां पुराना सोना बेचकर प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहती है। टैक्स की देनदारी कैसे बनेगी?


सुभाष लखोटिया : इनकम टैक्स के तहत अपने पास सोने की ज्वेलरी, बिस्किट यानि फिजिकल गोल्ड रखने की कोई सीमा नहीं है। लेकिन 30 लाख रुपये से ज्यादा सोना रखने पर वेल्थ टैक्स देना होगा। गहने बेचकर मिली हुई रकम नई प्रॉपर्टी में निवेश करने पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा।    


सवाल : 5.7 लाख रुपये सालाना सैलरी है। सेक्शन 80सी की छूट के बाद कितना टैक्स देना होगा?


सुभाष लखोटिया : 5.7 लाख रुपये में से सेक्शन 80सी की छूट निकालाकर कुल 30,488 टैक्स बनेगा।


सवाल : आईटीआर, टीडीएस क्या हैं और टैक्स बचने के विकल्पों के बारे में जानकारी चाहिए?


सुभाष लखोटिया : आईटीआर मतलब इनकम टैक्स रिटर्न। अगर कुल इनकम एक्ज्मशन लिमिट से ज्यादा है तो आईटीआर जरूर भरना चाहिए। टीडीएस मतलब टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स। टीडीएस यानि तनख्वाह, ब्याज और दूसरे स्त्रोत से आय पर टैक्स कटता है। इनकम टैक्स बचाने के लिए 80सी के तहत निवेश करके 1 लाख रुपये तक का टैक्स छूट पाया जा सकता है।


वीडियो देखें