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भारत का जासूस ड्रोन ‘रुस्तम-2’ जल्द तैयार होगा!

सरकार ने रक्षा अनुसंधान संस्थान, यानी डीआरडीओ को यूएवी यानी मानव रहित विमान ‘रुस्तम-2’ बनाने की मंज़ूरी दे दी है।
अपडेटेड May 21, 2012 पर 18:51  |  स्रोत : Hindi.in.com

21 मई 2012
आईबीएन-7

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नई दिल्ली।
देश की सीमाओं के पार होने वाली कोई भी हरकत अब भारतीय फौज की नजरों से छिप नहीं सकेगी। सरकार ने रक्षा अनुसंधान संस्थान, यानी डीआरडीओ को यूएवी यानी मानव रहित विमान ‘रुस्तम-2’ बनाने की मंज़ूरी दे दी है। अमेरिकी टोही विमान ड्रोन की तर्ज पर बनने वाले इस विमान को 2017 तक भारतीय सेना में शामिल करने की योजना है।

दरअसल मानव रहित जिस टोही विमान 'ड्रोन' पर अमेरिकी सेना को नाज है, उसे टक्कर देगा भारत का 'रुस्तम-2'। ‘रुस्तम-1’ की सफलता के बाद अब ‘रुस्तम-2’ को विकसित करने का काम शुरू हो गया है। मानव रहित विमान ‘रुस्तम-1’ का सफल परीक्षण नवंबर 2009 में हो चुका है और अब इसे सेना को सौंपने की तैयारी है।

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लेकिन साइबर वार और स्पेस वार के इस दौर में खासकर चीन के मद्देनजर ऐसे हाईटेक टोही विमान की सख्त जरूरत है, जो दुश्मन की हर हरकत पर पैनी नजर रख सके। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सीसीएस यानी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने ‘रुस्तम-2’ को हरी झंडी दे दी है। ‘रुस्तम-2’ को बनाने की जिम्मेदारी डीआरडीओ यानी डिफेंस रिसर्च एंड डिवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन को सौंपी गई है।

‘रुस्तम-2’ को उन सभी खूबियों से लैस किया जा रहा है, जो एक अत्याधुनिक टोही विमान में होनी चाहिए। ‘रुस्तम-2’ को अमेरिकी विमान ड्रोन प्रिडेयर की तर्ज पर बनाया जाएगा। इस पर करीब 1540 करोड़ रुपये की लागत आएगी। फरवरी 2014 में इसका पहला ट्रायल किया जाएगा। अगस्त 2017 में फौज में शामिल करने की योजना है।

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225 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ने वाले इस विमान में शुरू में ढाई घंटे तक का ईंधन होगा। बाद में इसे बढा़कर 24 घंटे तक उड़ान भरने की क्षमता की जा सकेगी। ईंधन के लिए बार-बार लैंड न करना पड़े इसके लिए इसमें सौर ऊर्जा का भी विकल्प होगा। ‘रुस्तम-2’ का इस्तेमाल मिलिट्री मिशन के दौरान निगरानी रखने के लिए होगा। यह दुश्मन के इलाके में हो रही रही हर हरकत और बातचीत का रिकॉर्ड फौज को तुरंत देगा। लड़ाई के दौरान हुए नुकसान का सही आकलन करने में इसका इस्तेमाल होगा। फिलहाल सरकार ने कुल 10 ‘रुस्तम-2’ बनाने को मंजूरी दी है।


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