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स्पेशल रिपोर्ट: जो पहले न हुआ, खबरों में रहा आर्मी चीफ का पद

जनरल वी. के. सिंह रिटायर हो गए हैं, उनका कार्यकाल भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
अपडेटेड Jun 02, 2012 पर 16:16  |  स्रोत : Hindi.in.com

01 जून 2012
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नई दिल्ली।
आजादी के बाद देश के 24वें थलसेनाध्यक्ष जनरल वी. के. सिंह कल रिटायर हो गए। जनरल सिंह का कार्यकाल भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम के लिए हमेशा याद किया जाएगा। इसके अलावा वे पहले जनरल हैं, जिन्होंने सरकार के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया। विवाद उनकी उम्र को लेकर था। बहरहाल, जनरल सिंह की यात्रा हरियाणा के एक छोटे-से गावं से शुरू हुई थी। पेश है 1971 की लड़ाई में जांबाजी दिखाने वाले कमांडो से कमांडर बनने की कहानी।

1971 की लड़ाई भारतीय सेना के इतिहास का सबसे चमकदार पन्ना है। वह लड़ाई जिसने हिंदूओं और मुसलमानों के दो राष्ट्र होने के पाकिस्तानी आधारभूत सिद्धांत की धज्जियां उड़ा दीं, जिसने दुनिया के नक्शे पर एक बांग्लादेश नाम के एक नए राष्ट्र को जन्म दिया। इस लड़ाई में भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर तैनात किए गए सेकेंड लेफ्टिनेंट विजय कुमार सिंह नाम के एक नौजवान अफसर ने आला अफसरों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। जम्मू-कश्मीर की ऊंची और दुर्गम पहाड़ियों पर तैनात इस अफसर और उसकी टीम ने दुश्मनों के हौसले पस्त करने में जो बहादुरी और रणकौशल दिखाया, उसने सबका दिल जीत लिया। यही अफसर 30 मार्च 2010 को भारतीय थलसेना का मुखिया बना।

हरियाणा के एक छोटे-से गांव में पैदा हुए जनरल सिंह का खानदान सेना से ही जुड़ा रहा। दादा और पिता, दोनों ही सेना में अफसर रहे। लिहाजा फौज में जाकर देश की सेवा करने का जज्बा, उनमें शुरू से ही रहा। पिलानी के बिड़ला पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने वो सबकुछ किया जो उनके सपने को पूरा करने में मददगार हो सकता था। उनके सहपाठियों को वह विजय आज भी याद है।

विजय कुमार सिंह को 14 जून 1970 को कमीशन मिला। वे राजपूत रेजीमेंट में शामिल किए गए। इसके बाद एक फौजी बतौर विजय की विजययात्रा शुरू हुई। उनकी पहली पोस्टिंग भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर हुई। इसी के साथ उन्हें पहले इम्तहान से गुजरना पड़ा। ये मोर्चा था 1971 की लड़ाई का। उन्हें कई अहम मोर्चों पर फतह का जिम्मा सौंपा गया जिसे उनकी टीम ने बखूबी अंजाम दिया। उन्हें युद्ध सेवा मेडल से भी नवाजा गया। उनकी रणनीतिक क्षमता को देखते हुए उन्हें सेना के सबसे अहम विभाग यानी सैन्य ऑपरेशन निदेशालय में तैनात किया गया। इसके बाद उनकी उपलब्धियां का सिलसिला चल पड़ा। वे कमांडो ट्रेनिंग लेने अमेरिका भेजे गए।

उन्हें अमेरिका के आर्मी इंफेंट्री स्कूल ने ग्रेजुएशन की मानद उपाधि दी। बाद में अमेरिकी वार कॉलेज से उन्होंने रेंजर कमांडो कोर्स किया और कम्बैट ऑपरेशन में अव्वल आए। जनरल सिंह अकेले ऐसे सेना प्रमुख हैं जिनकी वर्दी पर अमेरिकी रेंजर टैब लगा है। उपद्रवग्रस्त क्षेत्र में मोर्चा संभालना हो या फिर उत्तर-पूर्व के दुर्गम इलाकों में, हर तरह का तजुर्बा उनके नाम दर्ज है। उनके हौसले का लोहा सभी मानते हैं।

2001 में संसद पर हुए हमले के बाद ऑपरेशन पराक्रम में जनरल सिंह को ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ की जिम्मेदारी दी गयी। हालांकि बाद में सरकार ने ऑरेशन पराक्रम को रोक दिया। इसके अलावा जनरल सिंह ने पंजाब के अंबाला और जालंधर स्थित दो सबसे अहम आर्मी कोर की बागडोर संभाली। भूटान में इंडियन मिलिट्री ट्रेनिंग टीम यानी इम्ट्राट के मुखिया रहे। काउंटर इंसरजेंसी फोर्स में बेहतरीन काम के लिए जनरल सिंह को अति विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा गया।

जनरल वी. के. सिंह की उपलब्धियां बताती हैं कि उनका कार्यकाल कितना चमकदार रहा। लेकिन इससे भी ज्यादा चमकदार बात यह है कि उन्होंने देश को भरोसा दिलाया कि सेना को भ्रष्टाचार का रोग लगाने की कोशिश करने वाले उनके जैसे अफसर के रहते कामयाब नहीं हो पाएंगे।

जनरल वी.के. सिंह 26 महीने तक सेनाध्यक्ष के पद पर रहे, लेकिन जैसी छाप उन्होंने छोड़ी है, वो 26 साल बाद भी शायद ही धूमिल पड़ पाए। वे कमांडो से कमांडर तक का सफर करने वाले ऐसे योद्धा के रूप में याद किए जाएंगे, जिन्होंने हिंदुस्तानी सैनिक की काबिलियत का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया।

सेना में अधिक पारदर्शिता आई है : वी. के. सिंह

निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह ने कहते हैं कि देश की सेना में पहले के मुकाबले अधिक पारदर्शिता आई है और इसकी मानसिकता भी बदली है। जनरल वी. के. सिंह ने देश की 11.30 लाख जवानों की सेना का दायित्व नए सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह को सौंप दिया। जनरल वी. के. सिंह का कार्यकाल सेना में 26 महीने का रहा। इस दौरान कई विवादों को लेकर वे सुर्खियों में रहे।

अपना कार्यकाल पूरा होने पर इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति पर पुष्पचक्र अर्पित करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में जनरल वी. के. सिंह ने कहा, "हम सेना की मानसिकता बदलने में कामयाब रहे। हम उस खोखलेपन को भी दूर करने में सफल रहे जिसके कारण सशस्त्र बल स्पष्ट तरीके से समस्याओं का समाधान नहीं कर पाते थे।"

उन्होंने कहा, "हमें रक्षा मंत्री से बहुत सहयोग मिला। हमने लक्ष्य हासिल किए। कुछ नीतियां पाइपलाइन में हैं, जो शेष खोखलेपन को दूर करेंगी।"

उन्होंने कहा कि सेना में शुचिता आई है और यह चीजों को अधिक आसान बनाएगा। जनरल वी. के. सिंह के अनुसार, "पारदर्शिता के कारण आप (मीडिया) सेना के बारे में अधिक बातें जान पाते हैं।"

किसी भी विवाद को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा: जनरल बिक्रम सिंह


उधर, कल ही शपथ ग्रहण करनेवाले नए सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने पदभार सम्भालने के बाद पहले ही दिन सेना के सामने खड़ी कठिनाइयों के सम्बंध में सख्त संदेश देते हुए कहा कि किसी भी विवाद को नजर अंदाज नहीं किया जाएगा, चाहे संयुक्त राष्ट्र कांगो मिशन में तैनाती के दौरान यौन दुराचार सम्बंधी आरोप ही क्यों न हों।

बिक्रम सिंह, संयुक्त राष्ट्र कांगो मिशन के डिप्टी कमांडर थे, जब संयुक्त राष्ट्र के निगरानी दल ने भारतीय बलों पर स्थानीय महिलाओं के यौन शोषण में लिप्त होने का संकेत दिया था।

सेना प्रमुख ने कहा, "मैं आपको आश्वस्त कर दूं कि कुछ भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। इसकी जांच होगी और मैं आपको आश्वस्त करता हू कि हम इसे उचित निष्कर्ष तक ले जाएंगे।"

ब्रिकम सिंह ने यहां साउथ ब्लॉक लॉन में गार्ड ऑफ ऑनर के बाद संवाददाताओं से कहा कि उनकी प्राथमिकता सेना को धर्मनिरपेक्ष, गैरराजनीतिक बल बनाए रखने का होगी। बिक्रम सिंह दुनिया की इस दूसरी सबसे बड़ी सेना का प्रतिष्ठित पद सम्भालने वाले 27वें सेना प्रमुख हैं तथा 25 वें भारतीय हैं।

बिक्रम सिंह, सेना प्रमुख का पद सम्भालने वाले सिख समुदाय के दूसरे व्यक्ति हैं। उन्हें कई कठिनाइयों से उबरना है। इसमें एक कानूनी जंग भी शामिल है, जिसके कारण उन्हें सेना प्रमुख का पद सम्भालने से रोकने की कोशिश भी हुई थी।

यह पूछे जाने पर कि पिछले 10 महीनों के दौरान असैन्य-सैन्य सम्बंधों में आए तनाव को दूर करने के लिए क्या प्रयास किए जाएंगे, उन्होंने कहा, "हम अपना सर्वोत्तम प्रयास करेंगे। हम एक धर्मनिरपेक्ष बल बने रहेंगे, हम एक गैरराजनीतिक बल बने रहेंगे और हमें अपना काम उसी तरह करने दें, जिस तरह उसे किया जाना है।"

सेना के अंदर और असैन्य नेतृत्व के साथ उसके सम्बंधों में आई कटुता पर सिंह ने कहा, "मेरा इरादा अतीत को पीछे छोड़ने का है। यदि आपको सेना को आगे ले जाना है तो सामने के शीशे से देखकर गाड़ी चलाइए, पीछे के दृश्य देखने वाले आईने को देखकर नहीं।"

जनरल वी.के. सिंह से कार्यभार ग्रहण करने वाले बिक्रम सिंह ने कहा कि 11.30 लाख सैनिकों वाली इस सेना की सभी इकाइयां और इसके कमांडर इस संगठन की आंतरिक सेहत सुधारने के लिए काम करते हैं और यह प्रयास लगातार जारी रहेगा।

बिक्रम सिंह गुरुवार तक कोलकाता स्थित पूर्वी सैन्य कमान अधिकारी थे, जिनके मातहत दीमापुर स्थित सेना की तीसरी पलटन काम करती थी।

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