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रूसी पोत ‘गोर्श्कोव’ से उड़ान भरेंगे भारतीय लड़ाकू विमान

रूस से भारतीय नौसेना को मिलने वाले विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्श्कोव के फ्लाइट डैक से लड़ाकू विमान जल्द उड़ान भरेंगे।
अपडेटेड Jun 29, 2012 पर 13:46  |  स्रोत : Hindi.in.com

28 जून 2012
वार्ता

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नई दिल्ली।
रूस से भारतीय नौसेना को मिलने वाले विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्श्कोव के फ्लाइट डैक से लड़ाकू विमानों की उड़ान के परीक्षणों का सबसे महत्वपूर्ण दौर आगामी 15 जुलाई से शुरू होने जा रहा है।

एडमिरल गोर्श्कोव को भारत के सुपुर्द किए जाने से पहले यह सबसे अहम परीक्षण है जिसमें विमानवाहक पोत की विभिन्न विमानन प्रणालियों की कड़ी जांच परख की जाएगी। इन परीक्षणों की निगरानी के लिए नौसेना के उच्च विशेषता प्राप्त अधिकारियों की पंद्रह सदस्यीय टीम गोर्श्कोव पर सवार है जो परीक्षणों का बारीकी से जायजा ले रही है।

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नौसेना के अधिकारियों ने आज बताया कि एडमिरल गोर्श्कोव रूस के सेवमाश शिपयार्ड से 9 जून को निकल चुका है और श्वेत सागर में उसके समुद्री परीक्षण शुरू हुए विमानन सुविधा परीक्षण भी समुद्री परीक्षणों का हिस्सा हैं जिसमें पोत के हजारों पुर्जों और प्रणालियों की जांच की जा रही है। 45 हजार टन का यह जंगी पोत अब मुर्मांस्क के पास बैरेंट्स सागर में पहुंच गया है और समुद्री परीक्षण पूरे होने तक अब यह वहीं रहेगा। पोत के डैक पर दो रूसी मिग-29 के विमान 15 जुलाई से उड़ान भरने लगेंगे। अगले तीन महीने तक इन विमानों की लगातार उड़ानें होंगी।

अधिकारियों ने बताया कि विमानन सुविधा परीक्षण के दौरान 1000 फुट के गोर्श्कोव के रनवे से मिग लड़ाकू विमानों की उड़ान से जुड़ी अनेक प्रणालियों की सख्त जांच होगी। इसमें नेविगेशन सिस्टमों, दिकसूचक प्रणालियों जैसे राडार और दीर्घ रेंज के प्रिसीसन राडारों, ईंधन सप्लाई, विद्युत आपूर्ति और अरेस्टर वायर की जांच शामिल है। इस विमानवाहक पोत के रनवे से मिग-29 के विमान शार्ट टेक आफ करते हैं और रनवे के किनारे पर लगे अरेस्टर वायर से विमान के नीचे लगे हुक से अटका कर रोका जाता है। इन सभी सिस्टमों की इस दौरान जांच होगी।

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रूसी व्यवस्था के अनुसार शिपयार्ड से जंगी पोत लेते समय स्वीकार्यता परीक्षण किए जाते हैं और इसके बाद रूसी सरकार भारत को पोत देने के लिए सुपुर्दगी परीक्षण करेगी। ये परीक्षण करीब दो माह चलेंगे और पूरी संभावना है कि नौसेना दिवस पर यह विमानवाहक पोत भारतीय नौसेना के ध्वज तले ‘आईएनएस विक्रमादित्य’ नाम से आ जाएगा।