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महंगा हो जाएगा म्यूचुअल फंड में निवेश करना

नए नियमों के मुताबिक 12 फीसदी सर्विस टैक्स का भार ग्राहकों पर डाला गया है।
अपडेटेड Aug 17, 2012 पर 07:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कल सेबी ने जहां एक ओर आईपीओ में पैसा लगाने वाले छोटे निवेशकों को राहत दी, वहीं म्युचुअल फंड में पैसा लगाने वालों को हल्का झटका दिया है। म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की हालत सुधारने के लिए भी सेबी ने कई एलान किए है। नए नियमों के मुताबिक 12 फीसदी सर्विस टैक्स का भार ग्राहकों पर डाला गया है। सेबी के मुताबिक सर्विस टैक्स का बोझ भी निवेशकों को ही उठाना होगा, म्युचुअल फंड कंपनियों को नहीं। यानी अब म्युचुअल फंड में निवेश महंगा हो सकता है।


इसके साथ ही छोटे शहरों के डिस्ट्रिब्यूटरों को अब 0.3 फीसदी का कमीशन मिलेगा। एजेंट को इससे पहले कोई कमीशन नहीं मिलता था।


इसके अलावा सेबी ने एक्सपेंस रेश्यो 0.20 फीसदी तक बढ़ाने की मंजूरी भी दे दी है। अभी एक्सपेंस रेश्यो के लिए 100 करोड़ के एएयूएम पर 2.5 फीसदी तक खर्च करने की इजाजत है। निवेशकों के लिए अच्छी बात ये भी है कि अब उनके निवेश सलाहकारों को सेबी नियंत्रित करेगा। साथ ही राजीव गांधी इक्विटी स्कीम में म्यूचुएल फंड को शामिल करने की सिफारिश की गई है।


म्युचुअल फंड के जानकारों का मानना है कि सेबी ने आज जो फैसले लिए हैं उनसे म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में नई जान डालने में मदद मिलेगी। एएमएफआई के डिप्टी सीईओ वी रमेश का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूटरों का कमीशन बढ़ेगा तो छोटे शहरों में म्युचुअल फंड की पहुंच भी बढ़ेगी। साथ ही एग्जिट लोड डिस्ट्रीब्यूटरों के पास जाएगा तो फंड का रिटर्न बढ़ेगा


हालांकि बाजार जानकार निपुण मेहता का मानना है कि सर्विस टैक्स बोझ बढ़ना निवेशकों के लिए बुरी खबर है। किस आधार पर सर्विस टैक्स लगाया जाता है ये जानना अहम होगा। सर्विस टैक्स बढ़ने से नए निवेशक म्यूचुअल फंड में निवेश से कदम पीछे हटा सकते हैं।


आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के एमडी और सीईओ निमेश शाह का कहना है कि सेबी ने म्युचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए जो नए ऐलान किए हैं उनसे इंडस्ट्री को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।


म्युचुअल फंड में पहले सर्विस टैक्स का प्रावधान नहीं था लेकिन अब सेबी ने ग्राहकों पर 12 फीसदी का सर्विस टैक्स लगाकर ठीक कदम उठाया है। हर क्षेत्र में सर्विस का लाभ उठाने वाले ग्राहकों पर सर्विस टैक्स लगता है तो फिर म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में भी ऐसा ही होना चाहिए।


निमेश शाह के मुताबिक डिस्ट्रीब्यूटरों को 0.30 फीसदी कमीशन देने का असर एमएफ इंडस्ट्री के लिए सकारात्मक रहेगा। इसके बाद छोटे शहरों से भी कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। म्युचुअल फंड कंपनियों को कमीशन पाने के लिए छोटे शहरों से करीब 40 फीसदी कारोबार लाना होगा।


निमेश शाह के मुताबिक सरकार आर्थिक मोर्चे पर मजबूती लाना चाहती है तो इसके लिए म्युचुअल फंड इंडस्टी में कारोबार बढ़ाने के लिए भी काम करना होगा। अगर सरकारी नीतियां ठीक होती है तो म्युचुअल फंड इंडस्टी में भी तेजी देखी जा सकती है और वॉल्यूम में बढ़त देखी जा सकती है।


निमेश शाह का मानना है कि महंगाई को हराना है तो म्यूचुअल फंड जैसे साधनों में निवेश करना जरूरी हो जाता है। अगर सरकार चाहती है कि नए निवेशक म्युचुअल फंड की ओर आएं तो नई सरकारी स्कीमों में म्युचुअल फंड को शामिल करना जरूरी है। कल सेबी की बैठक में राजीव गांधी इक्विटी स्कीम में म्यूचुएल फंड को शामिल करने की सिफारिश की गई है।


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