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म्यूचुअल फंडः एयूएम नहीं, निवेश पर बनाएं फोकस

निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी फंड जोड़ना है, तो एयूएम की बजाए फंड के प्रदर्शन और क्षमता पर गौर करें।
अपडेटेड Aug 28, 2012 पर 14:53  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पिछले साल एचडीएफसी टॉप 200 फंड और एचडीएफसी इक्विटी फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) क्रमशः 11,000 करोड़ रुपये और 9,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गए। इसके बावजूद अब भी बहस जारी है कि छोटे या बड़े एयूएम वाले फंड में निवेश करना चाहिए या नहीं। निवेश के परिप्रेक्ष्य में बात की जाए तो छोटे एयूएम वाले फंड का तात्पर्य है कि 100 करोड़ रुपये के नीचे का फंड। इन आंकड़ों के चलते वित्तीय सलाहकार और निवेशकों में भिन्नता देखने को मिलती है।


जून 2012 तक के 361 इक्विटी फंडों के एयूएम पर नजर दौड़ाएं तो उनमें से 170 फंडों का एयूएम 100 करोड़ रुपये से कम रहा। इन 170 फंडों में से 68 फीसदी का एयूएम 50 करोड़ रुपये से कम रहा, जिसमें कुछ फंड तो 10 साल पुराने थे। लेकिन करीब 11 फंड़ों का एयूएम 3,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने में कामयाब रहा।


लेखिका का मानना है कि निवेशकों को हमेशा फंड के प्रदर्शन और रणनीति से चिंता रहती है, लेकिन एयूएम पर गौर नहीं किया जाता है। हमने साल 2012 में लिस्ट जारी की थी जिसमें से 29 इक्विटी फंडों का एयूएम 100 करोड़ रुपये से कम का था। ऐसे में साफ करना चाहेंगे कि हम फंड के प्रदर्शन, खर्च के अनुपात, फंड की योग्यता आदि मुद्दों को ध्यान में रखकर निवेश की सलाह दी जाती है।


यहां बताना चाहेंगे कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के करीब 21 फंड हैं जिसमें से 9 फंडों का एयूएम 100 करोड़ रुपये से नीचे का है। एआईजी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इकोनॉमिक रिफॉर्म फंड इस सेक्टर का सबसे उम्दा फंड साबित हुआ है क्योंकि इसने सिर्फ अपने थीम के मुताबिक इंफ्रा शेयरों में निवेश को तरजीह दी। एआईजी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इकोनॉमिक रिफॉर्म फंड का एयूएम 87 करोड़ रुपये था। प्रायः ऐसा होता है कि इंफ्रा फंड का 20 फीसदी निवेश बैंक शेयरों में होता है।


कुछ ऐसी ही बात कॉन्ट्रा फंड को लेकर भी है। रेलिगेयर कॉन्ट्रा फंड ने भी अपने सेक्टर में सबसे उम्दा प्रदर्शन किया। रेलिगेयर कॉन्ट्रा फंड का एयूएम 63 करोड़ रुपये रहा। एक और उदाहरण है, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फोकस्ड ब्लूचिप इक्विटी फंड लार्जकैप कैटेगरी का है। जून 2008 में ये फंड 530 करोड़ रुपये के एयूएम से जून 2012 तक बढ़कर 3,841 करोड़ रुपये का हो गया। मतलब साफ है कि 4 साल में इस फंड के एयूएम में 625 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं इस कैटेगरी के कुछ अन्य फंडों को इस मुकाम पर पहुंचने के लिए 15 साल का वक्त लग गया।


यहां ये बताने की कोशिश है कि अगर निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी फंड जोड़ना है, तो एयूएम की बजाए फंड के प्रदर्शन और क्षमता पर गौर कर निवेश करें। किसी बड़े फंड में निवेश करने की धारणा के बजाए बेहतर प्रदर्शन वाले फंड को अपनाने का तरीका सीखें।


इस लेख की लेखिका डॉ रेणु पोथेन, फंड्ससुपरमार्ट डॉट कॉम इंडिया की रिसर्च हेड हैं।