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म्युचुअल फंड कंपनियों ने सेबी पर साधा निशाना

म्युचुअल फंड कंपनियों का कहना है कि बड़े और छोटे निवेशकों के लिए एक जैसे शुल्क नहीं हो सकते हैं।
अपडेटेड Jul 26, 2010 पर 08:54  |  स्रोत : Hindi.in.com

26 जुलाई 2010



सीएनबीसी आवाज़



म्युचुअल फंड कंपनियों ने फंड शुल्कों पर सेबी के प्रस्ताव का विरोध किया है। कंपनियों का कहना है कि बड़े और छोटे निवेशकों के लिए एक जैसे शुल्क नहीं हो सकते हैं।



सेबी ने कुछ दिन पहले प्रस्ताव रखा था कि म्युचुअल फंड हाउसेस छोटे और बड़े निवेशकों से शुल्क बिल्कुल एक जैसे वसूले। आमतौर पर एक साल से कम समय में निकलने पर छोटे निवेशकों से एक फीसदी का निकासी प्रभार वसूला जाता है, जबकि बड़े निवेशकों को कुछ भी नहीं देना पड़ता है।



सेबी इस पर रोक लगाना चाहता है ताकि छोटे निवेशकों को भी बराबरी का हक मिले। वहीं म्युचुअल फंड हाउसेज की दलील है कि छोटे निवेशकों को लाने और उनके खाते की देखभाल करने में ज्यादा खर्च आता है, जबकि बड़े निवेशकों पर उनके निवेश के मुकाबले खर्च बहुत मामूली होता है। साथ ही फंड हाउसेस बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए शुल्कों को बढ़ाकर उन्हें खोना नहीं चाहती हैं।



कोई भी निवेशक जब म्युचुअल फंड से अपने पैसे निकालते हैं तो उस समय निकासी प्रभार वसूला जाता है।
 इस शुल्क के बारे में निवेशकों को निवेश के समय ही बता दिया जाता है। फंड हाउसेस अपने हिसाब से बड़े संस्थागत ग्राहकों को ऐसे शुल्क छोड़ देती है।



म्युचुअल फंड को रिटेल निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने के लिए सेबी चाहता है कि उन्हें बड़े निवेशकों के बराबर लाया जाए। उन्होंने अपना पक्ष सेबी के सामने रखा है और म्युचुअल फंड उद्योग की शीर्ष संस्था एम्फी (एएमएफआई) से कहा है कि वो इस मामले को नियामक से सुलझाने में मदद करे।