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एजुकेशनल स्कॉलरशिप से कैसे पाएं टैक्स में छूट

प्रकाशित Sat, 15, 2012 पर 14:23  |  स्रोत : Moneycontrol.com

एजुकेशनल स्कॉलरशिप में टैक्स छूट सुविधा मिलती है। लेकिन इसके लिए कई नियम और प्रावधान हैं, जिसकी पूर्ति के बाद ही करदाता उस छूट लिए योग्य हो पाता है। इन्हीं छोटी-छोटी बातों को करदाता को ध्यान में रखना जरूरी होता, ताकि टैक्स फाइल करते समय कर में छूट पाने में दिक्कतों का सामना ना करना पड़े।


जानें एजुकेशनल स्कॉलरशिप में कैसे पाएं कर छूट-


टैक्स फ्री नेचर ऑफ रिसिप्ट यह सबसे महत्वपूर्ण है। नेचर ऑफ रिसिप्ट स्कॉलरशिप के तौर पर प्रूफ हो जाने के बाद ही कर में छूट के लिए आवेदन किया जा सकता है। साथ ही इसमें यह देखने भी जरूरी है, स्कॉलरर्शिप की इसी प्रक्रिया में उन जरूरतों को पूरा किया गया है या नहीं जो कर में छूट पाने के लिए उपयोगी हैं। साथ ही यहां ये भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है स्कॉलरशिप का दुरुपयोग नहीं होने पाए, उसका इस्तेमाल शिक्षा के लिए ही किया गया हो।


एजुकेशनल स्कॉलर्शिप के लिए ली गई राशि जरूरी नहीं किसी सरकारी संस्थान से ली गई हो, निजी संस्थानों से ली गई स्कॉलरशिप से भी करदाता कर में छूट के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि इस प्रक्रिया में शिक्षा के लिए लगने वाली फीस भी महत्वपूर्ण है, जिसमें ट्यूशन फीस के अलावा पढ़ाई के लिए लगने वाले दूसरे खर्चों का भी समावेश होता है। जिससे यह तय हो पाता है कर में कितनी छूट मिलेगी। 


कई बार स्कॉलर्शिप में ऐसे नियम होते हैं, जिनकी पूर्ति के बाद ही स्कॉलरशिप मिल पाती है। वहीं यहां देखना भी जरूरी होता है कि मिलने वाली राशि स्कॉलरशिप के तौर पर ही दी जा रही है। स्कॉलरशिप के अलावा दूसरे प्रारूप में मिलने वाली राशि से कर में छूट के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता है।


वहीं इस प्रक्रिया में यह भी देखना जरूरी होता स्कॉलर्शिप के पीछे कारण कौन से हैं। क्योंकि इन कारणों को टैक्स छूट पाने के समय देखा जाता है। स्कॉलरशिप के लिए मिली राशि पढाई की फीस के लिए इस्तेमाल की गई है तो कर छूट मिलेगा। वहीं यदि स्कॉलरशिप में मिली राशि का पूरा इस्तेमाल फीस भरने के लिए नहीं किया गया है, तो ऐसी परिस्थितियों में कर में छूट के लिए करदाता योग्य नहीं होता है। हालांकि कुछ परिस्थितियों में यह मान्य भी हो सकता है लेकिन इसके लिए इससे संबंधित जानकारी ली गई स्कॉलरशिप के दस्तावेजों में उपलब्ध होनी चाहिए। वहीं ऐसे मामलों में शिक्षा पर खर्च किए गई रकम पर ही छूट मिलती है।


नोट: इस लेख के लेखक अर्नव पंड्या फाइनेंशियल प्लानर और चार्टर्ड अकाउंटंट हैं।