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महंगाई से कैसे बचाएं अपना निवेश

महंगाई से जल्द राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में निवेश को महंगाई के असर से बचाना जरूरी है। कुछ बातें अगर ध्यान में रखी जाएं तो ऐसा करना मुमकिन है।
अपडेटेड Aug 07, 2010 पर 15:27  |  स्रोत : Hindi.in.com

07 अगस्त 2010

सीएनबीसी आवाज़


 


महंगाई की मार सब पर बराबर पड़ रही है। चाहे वो नौकरीपेशा लोग हों, उद्योग या फिर सरकार ही क्यों न हो। बढ़ती महंगाई के पीछे कई वजहें हैं- पिछले साल का खराब मानसून, आर्थिक विकास की धीमी पड़ती रफ्तार, महंगा कच्चा तेल और विश्वीय मंदी के हालात।



इस साल मानसूनी बारिश बेहतर है, लेकिन महंगाई से जल्द राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में अपने निवेश को महंगाई के असर से बचाना जरूरी है। कुछ बातें अगर ध्यान में रखी जाएं तो ऐसा करना मुमकिन भी है और आसान भी।



सबसे पहले अगर इस साल आपकी तनख्वाह में बढ़ोतरी नहीं हुई है तो आपको ज्यादा पैसों की बचत करनी होगी। दूसरा, फिलहाल लंबे अवधि के फिक्स्ड डिपॉजिट में अपना पैसा लगाने से बचें, क्योंकि अभी जमा दरें काफी कम हैं। आगे चलकर दरें बढ़ने पर फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाकर आपको ज्यादा ब्याज मिलेगा।



बैंक में जरूरत से ज्यादा नकद न रखें। महंगाई बढ़ने पर बैंक में रखे पैसे पर कमाई होना तो दूर, असल रकम का भी मूल्य कम हो जाता है। रियल एस्टेट और सोने में निवेश करना समझदारी होगी। फ्लोटिंग ब्याज दर पर कर्ज लेकर निवेश करने से बचें, क्योंकि निवेश पर रिटर्न कर्ज के ब्याज से कम होने की काफी संभावना है।



महंगाई दर बढ़ती क्यों है- ये जानना भी बहुत जरूरी है। अगर अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी बढ़ती है तो महंगाई बढ़ेगी। वैसे ही, अगर उद्योग और कृषि उत्पादन में गिरावट आती है, तब भी महंगाई में बढ़ोतरी दिखती है। रिजर्व बैंक भारत सरकार के वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए भी नई मुद्रा छापती है जिससे अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी बढ़ती है।



ब्याज दरें कम होने पर लोग ज्यादा कर्ज ले पाते हैं, जिससे सामान की पूर्ति पर दबाव पड़ता है। नतीजा होता है मांग बढ़ने की वजह से कीमतें बढ़ती हैं। रिजर्व बैंक महंगाई पर काबू करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। कर्ज महंगा होने से कम लोग कर्ज लेते हैं और सामानों की मांग भी घटती है।



लेखक रामगणेश अय्यर www.fintotal.com के डायरेक्टर हैं और उनसे info@fintotal.com पर संपर्क किया जा सकता है।