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म्युचुअल फंड के चुनाव से पहले तय करें निवेश रणनीति

उचित और सही म्युचुअल फंड योजना चुनने की पहली सीढ़ी के तहत पहले अपने निवेश की अवधि को तय करें।
अपडेटेड Aug 07, 2010 पर 17:09  |  स्रोत : Hindi.in.com

07 अगस्त 2010



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भारत में म्युचुअल फंड उद्योग अब भी शरूआती दौर से गुजर रहा है, और हर दिन कोई न कोई नई योजना बाजा़र में आ जाती है।



फंडों और योजनाओं की हैरान करनेवाली सूची का हवाला दें तो उचित म्युचुअल फंड योजनाओं का चुनाव करना हैरानी का सबब बन सकता है। लेकिन आपने यदि अपनी निवेश रणनीति तय की है और यह आपके निजी उद्देश्यों की पूर्ति के अनुसार है तो चीजें आसानी से हासिल हो जाती हैं।



उचित और सही म्युचुअल फंड योजना चुनने की पहली सीढ़ी के तहत पहले अपने निवेश की अवधि को तय करें, जैसे - आपके द्वारा किये गए निवेश को कितने वर्षों तक जारी रख सकते हैं। यदि आपके निवेश करने की अवधि 2 महीने या इससे कम है, तो कैश मैनेजमेंट स्कीम सबसे अच्छा विकल्प है (म्युचुअल फंडों की लिक्विड और लिक्विड प्लस योजनाएं)।



हालांकि, इस अवधि से थोड़ा ज्यादा समय यानी 2 से 12 महीने के लिए अन्य डेट स्कीम्स आपके लिये सबसे उपयुक्त होगी। यदि आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं यानी 2 साल के अधिक तो डेट और इक्विटी का मिश्रण बेहतर होगा। 5 साल से ज्यादा अवधि के लिए इक्विटी फंड सबसे उपयुक्त है।



आगे आपकी जोखिम के प्रति रवैये की समझदारी पर म्युचुअल फंड में निवेश निर्भर करता है। कितना जोखिम उठाने की योजना और क्षमता है? एक जमाने के महान निवेशक पीटर लिंच का कहना है, " निवेश करने का प्रमुख अंग पेट है, न कि दिमाग।" आपके जोखिम की सहनशीलता आपके व्यक्तित्व, आयु, नौकरी की सुरक्षितता, स्वास्थ्य और आपातकालीन निधी की योजना से भी सुनिश्चित होती है।



उदाहरण के लिए, शायद युवा निवेशक ज्यादा आक्रमता के साथ निवेश कर सकते हैं और घाटे होने की लिहाज से ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं क्योंकि इसकी भरपाई के लिए उनके पास पर्याप्त समय मौजूद होता है। नियम तो यही कहता है कि यदि आप जोखिम उठाने के पक्ष में नहीं हैं तो आपका निवेश ज्यादातर अनुदार संपत्तियों जैसे - डेट और सोने की ओर करना चाहिए, जबकि यदि आप आक्रमकता के साथ निवेश करने के पक्ष में हैं तो इक्विटी आपका सही दांव है।



एक बार आप इस बात को तय कर लेते हैं कि पैसे इक्विटी, डेट और सोने में से कहां लगाने हैं तो यह अत्यावश्यक है कि इन्हीं विकल्पों में से सही चुनाव करें।



इक्विटी फंड



ज्यादातर इक्विटी फंड इन तीन श्रेणियों में वर्गीकृत होते हैं - इंडेक्स फंड, सक्रिय रुप से प्रबंधित फंड और परिष्कृत इंडेक्स फंड। प्रत्येक रणनीति के साथ इनमें कई प्रकार के विकल्प मौजूद हैं।



इंडेक्स फंड प्रबंधकों का उद्देश्य बेंचमार्क सूचकांक यानी बीएसई सेंसेक्स के प्रदर्शन को दोहराना होता है। इसके अंतर्गत इन्हीं सूचकांकों का चुनाव करते हुए पोर्टफोलिया बनाया जाता है जिसमें बेंचमार्क के प्रदर्शन का मिश्रण होता है। उनका मानना है कि बाज़ार को मात देना संभव नहीं है और ऐसे में फंड प्रबंधक चाहता है कि कम लागत पर बेंचमार्क के अनुरुप रिटर्न दिया जा सके।



वहीं दूसरी ओर सक्रिय फंड की कोशिश रहती है कि बाज़ार की ही तरह जोरदार प्रदर्शन किया जाय और इसकी प्राप्ति के लिए वे अच्छे शेयरों, बाज़ार की गति और संपत्ति आवंटन निर्णय के मिश्रण का चुनाव करते हैं। परिष्कृत सूचकांक फंड, सामान्य रुप से इसके नाम का उपयोग इस रुप में नहीं होता है बल्कि यह उपर्युक्त दो फंडों के बीच के प्रदर्शन को दर्शाता है। इनका उद्देश्य सूचकांक को ट्रैक करना होता है, लेकिन साथ ही बाज़ार की गति, उचित शेयरों का चुनाव, और/या लाभ का फायदा उठाकर सूचकांक से अलग यानी बाज़ार से ज्यादा रिटर्न देने की कोशिश इस फंड की रहती है।



डेट फंड



डेट फंडों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है - इनकम योजनाएं, लिक्विड/मनी मार्केट योजनाएं और गिल्ट योजनाएं।



इनकम योजनाएं प्रमुख रुप से लंबी और मध्यम अवधि के सरकारी तथा कार्पोरेट डेट निवेश उपकरणों जैसे- डिबेंचर, कार्पोरेट बांड या फिक्सड डिपॉजिट में निवेश करते हैं। गौरतलब है कि फंड के साथ बने रहने पर कीमतों में तेजी आती है क्योंकि इन फंडों का प्रमुख उद्देश्य निवेशकों को स्थिर नगदी प्रदान करना होता है। रुढ़िवादी और रिटायर निवेशकों के लिए यह सबसे उपयुक्त निवेश विकल्प है।



वहीं दूसरी ओर लिक्विड या मनी मार्केट योजनाएं छोटी अवधि वाले डेट निवेश उपकरणों यानी ट्रेजरी बिल, कमर्शियल पेपर, कॉल मनी और रेपो में निवेश करते हैं। निवेश करने के लिहाज से यह सुरक्षित स्थान है। आपको बहुत ज्यादा रिटर्न नहीं मिल पायेगा लेकिन आपको अपने मूलधन से कम पैसे नहीं मिलेंगे। इनमें अधिकांशतः फिक्सड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न मिलता है और साथ ही ये ज्यादा कर-उपयुक्त और छोटी अवधि के लिए बढ़िया निवेश का विकल्प है।



गिल्ट योजनाएं केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा जारी होनेवाले स्वायत्त पेपरों में निवेश करते हैं। इन फंडों में परिपक्वता अवधि मध्यम- और लंबी अवधि की होती है। ये अलग योजना है, जो मासिक आय योजनाओं (एमआईपी) की तरह होते हैं जिनमें प्रत्येक महीने एक तय रकम जोकि लगभग 20 फीसदी होता है उसका निवेश इक्विटी और बाकी का डेट में किया जाता है।



सही चुनाव करने की तरकीब



आपके निवेश पोर्टफोलियो में निवेश रणनीति को चुनना और सही म्युचुअल फंडों का चुनाव बड़े पैमाने पर सही निर्णयों के साथ कुछ सही या गलत जवाबों के आधार पर निर्भर होता है। आपके निजी उद्दश्यों के साथ रणनीतियों की पहचान करने से आपकी वित्तीय योजना को सही तरीके से पटरी लाया जा सकता है। अपनी लंबी अवधि के लक्ष्यों के साथ बने रहें और इसी अनुरुप अपनी रणनीतियों का चुनाव करना ही निवेश की प्रमुख कुंजी है।