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चिदंबरम का सधा हुआ खेल, पर बाजार निराश

कांग्रेस पार्टी जिस आम आदमी को लेकर आगे बढ़ रही उसके हाथ तो निराशा ही लगी है।
अपडेटेड Feb 28, 2013 पर 16:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बजट 2013 में जो पेश किया वो ज्यादातर उम्मीद के मुताबिक ही रहा। पिछले कुछ दिनों से वित्त मंत्री ने विदेशी संस्थागत निवेशकों को लुभाने के लिए जोर मारा था। ऐसे में वित्त मंत्री के पिटारे से निकलने वाले अहम ऐलानों से ज्यादातर लोग परिचित थे। हालांकि वित्त मंत्री का बजट वित्तीय व्यवस्था और टैक्स दरों के आसपास ही घूमता रहा। दरअसल बाजार को ये उम्मीद थी कि बजट में विकास दर में बढ़ोतरी और निवेश का माहौल सुधारने को लेकर ऐलान किया जाएंगे। साथ ही बाजार को बजट में सब्सिडी बोझ को कम करने के ऐलानों की उम्मीद थी। लेकिन बजट में इन अहम ऐलानों को लेकर कोई बात नहीं हुई है।


सुस्त अर्थव्यवस्था की चाल में टैक्स दरें बढ़ाना संभव नहीं होता, और वित्त मंत्री ने इस ओर सही कदम उठाया। वित्त मंत्री ने एक अच्छी बात जरूर की कि खर्चों में कटौती का ऐलान किया। फिर भी इंडस्ट्री से सवाल उठ रहा है कि आखिर वित्त मंत्री लागत में कटौती कर वित्तीय लक्ष्य को कैसे हासिल कर पाएंगे। एक ओर जहां प्राइवेट सेक्टर से निवेश ठप पड़ा हुआ है, उस पर सरकारी योजनाओं के खर्चों में कटौती से ग्रोथ कैसे हासिल कर पाएंगे। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2014 में वित्तीय घाटा 4.8 फीसदी रहने का अनुमान दिया है, लेकिन इसे हासिल कैसे किया जाएगा ये जानना अहम होगा। 4.8 फीसदी के वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने के लिए योजनीय खर्चों में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की कटौती करनी पड़ेगी।


हालांकि बजट ये बात अच्छी निकलकर आई है कि वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2014 के योजनीय खर्चों में कोई कटौती नहीं करने का फैसला किया है। सरकार की वित्त वर्ष 2014 में 5.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है, जो वित्त वर्ष 2013 के 4.29 लाख करोड़ रुपये से 29 फीसदी ज्यादा है।


फूड सिक्योरिटी बिल के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो बाजार के अनुमान से कम है। वित्त वर्ष 2014 का सब्सिडी बिल 2.31 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जो पिछले साल कम है। वित्त मंत्री ने करेंट अकाउंट घाटे पर ज्यादा चिंता जताई है, लेकिन इसको काबू में करने के लिए कोई उपाय नहीं सुझाए हैं। अगले साल के आम चुनाव की आहट बजट में देखने को मिली जिस कारण ग्रामीण विकास मंत्रालय का बजटीय आवंटन बढ़ाया गया। वित्त मंत्री के इस फैसले से एफएमसीजी सेक्टर के लिए हाथ खुशी लगी है।


वित्त मंत्री ने अमीरों पर शिकंजा कसने की कोशिश जरूर की है। हालांकि अर्थशास्त्रियों की दलील है कि यूपीए सरकार के इस कदम से गरीबों में उसकी पैठ बढ़ सकती है। शेयर बाजार को लेकर कई ऐलान हुए। एफआईआई और एफडीआई निवेश की नई परिभाषा बनाई गई है। राजीव गांधी इक्विटी स्कीम का दायरा बढ़ा दिया गया है। एसटीटी में मामूली कटौती की गई है। नॉन-एग्री कमोडिटीज पर सीटीटी लगाने का ऐलान हुआ।


कांग्रेस पार्टी जिस आम आदमी को लेकर आगे बढ़ रही उसके हाथ तो निराशा ही लगी है। दरअसल उम्मीद की जा रही थी कि आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर शहरी युवा वोटरों को रिझाने का हथकंडा अपनाया जाएगा। लेकिन ऐसी कोई घोषणा नहीं हो पाई।


(ये लेख संतोष नायर ने लिखा है, जो मनीकंट्रोल डॉट कॉम के एडिटर हैं)