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क्यों रहा चिदंबरम का बजट फ्लॉप शो

बजट 2013-14 की सबसे बड़ी कमजोरी ये है कि इसमें किसी भी दिशा में निर्णायक कदम नहीं उठाए गए हैं।
अपडेटेड Feb 28, 2013 पर 18:07  |  स्रोत : Moneycontrol.com

वित्त मंत्री पी चिदंबरम का बजट पेश करते समय सबसे पहला लक्ष्य निवेशकों की उम्मीदों को ठेस ना पहुंचाना रहा जो वो करने में सफल रहे। 2008 में जो बजट पी चिंदबरम ने पेश किया था जिसने महंगाई को बढ़ाया और अर्थव्यवस्था को ढलान पर ला दिया, इस बार ये बजट उस बजट के विपरीत है। बजट 2013-14 में उन्होंने कम महत्वाकांक्षी और कम जोखिम वाला बजट पेश किया है।


इस बजट में किसी के लिए कुछ भी उत्साहजनक नहीं रहा, उनकी खुद की पार्टी के लिए भी नहीं। उन्होंने एक जिम्मेदार बजट पेश करने की कोशिश की है। वित्त मंत्री ने खुद को ज्यादा पॉपुलिस्ट बजट पेश करने से बचाए रखा है। इस बजट में वित्त मंत्री ने संतुलन बनाने की कोशिश की है। 


बजट के बाद बाजार में गिरावट देखी जा रही है, सेंसेक्स और निफ्टी नीचे जा रहे हैं। इसका कारण है कि बजट से पहले ही चिदंबरम बाजार के लिए उम्मीदें बढ़ा चुके थे। बाजार को बजट से कुछ ज्यादा ही उम्मीदें थी लेकिन वित्त मंत्री उन्हें पूरा नहीं कर पाए।


बाजार की गिरावट के लिए दुख प्रकट करने से पहले बजट की मुख्य बातों को जान लेना जरूरी है। चिदंबरम ने डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स के जरिए 18000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटा लिया है। बेस रेट में कोई बदलाव ना करने से एक्साइज और कस्टम ड्यूटी पहले जैसे ही रहेंगी। 


बजट में मध्यम वर्ग और गरीब तबके को ज्यादा छूट नहीं दी गई है। सोनिया गांधी के फूड सिक्योरिटी बिल के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आयकर में कुछ बहुत ही मामूली राहत दी गई है। इसके साथ ही पहली बार घर खरीदने वालों के लिए अतिरिक्त 1 लाख रुपये तक की छूट दी गई है (जो 1.5 लाख की मौजूदा छूट से अलग होगी)। साथ ही पोस्ट ऑफस के जरिए बेचे जाने वाले नए सेविंग इंस्ट्रूमेंट को महंगाई के साथ जोड़ा जाएगा। हालांकि ये बचत के मौजूदा साधनों से कुछ ज्यादा अलग नहीं होंगे।


कॉर्पोरेट जगत के लिए कुछ अच्छी और कुछ खराब खबरें हैं। 10 करोड़ रुपये से ज्यादा आय वाली कंपनियों के लिए सरचार्ज 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। लेकिन इसकी भरपाई के लिए के लिए वित्त मंत्री मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को छूट दी है। जो मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां प्लांट और मशीनरी पर 100 करोड़ रुपये खर्च करेंगी उनको 2 सालों (2013-15) में 15 फीसदी टैक्स छूट देने का प्रावधान किया गया है।


हालांकि चिदबंरम ने अपने एक वादे को पूरा किया है जिसके तहत उन्होंने वित्त वर्ष 2012-13 के लिए वित्तीय घाटा 5.2 फीसदी रहने का अनुमान दिया है और वित्त वर्ष 2013-14 के लिए वित्तीय घाटा 4.8 फीसदी तक ले आने का अनुमान दिया है।


हालांकि अभी ये बहुत बड़ा सवाल है कि वो इस लक्ष्य को कैसे हासिल करेंगे। पिछले बजट के 5.21 लाख करोड़ रुपये के प्लान एक्सपेंडिचर के अनुमान के बदले इस बार ये 4.29 लाख करोड़ रुपये रहा है। उन्होंने पूंजी को छुपाकर रखने की कोशिश नहीं है जिसके तहत प्लान एक्सपेंडिचर में 30 फीसदी का उछाल का अनुमान दिया है और ये बढ़कर 5.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।


छोटी अवधि के विकास के लिए ये अच्छा कदम है। इसका मतलब है कि सरकार अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाने के लिए 1 अप्रैल से खर्च करना शुरु करेगी।


लेकिन हमेशा की तरह चिदंबरम के बजट में आगे के खर्च के अनुमानों पर संशय देखा जा रहा है।


बजट में 13.4 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रहने का अनुमान दिया गया है जो कि वित्त वर्ष 2012-13 की तरह ही है जिसमें सरकार असफल रह सकती है। आर्थिक सर्वे में जीडीपी ग्रोथ 6.1-6.7 फीसदी रहने की बात कही गई है, अगर हम मान लें कि 2013-14 में महंगाई दर 6 फीसदी के आसपास रहेगी तो जीडीपी ग्रोथ ज्यादा से ज्यादा 12 फीसदी के आसपास आ सकती है, इससे ज्यादा नहीं।


इससे ज्यादा संदेहात्मक आंकड़े राजस्व ग्रोथ के लिए दिए गए हैं। बजट में 21 फीसदी की राजस्व ग्रोथ का अनुमान दिया गया है जिसमें 33 फीसदी का गैर टैक्स राजस्व शामिल है। कैपिटल खातों जिसमें विनिवेश और स्पेक्ट्रम बिक्री से आने वाली कमाई शामिल है, में दोगुनी से ज्यादा बढ़त का अनुमान दिया गया है। ये 24,000 करोड़ रुपये स बढ़कर 55,814 करोड़ रुपये होने का अनुमान दिया गया है वहीं कोर टैक्स राजस्व सबसे धीमा यानी 19 फीसदी की दर से बढ़ने की बात कही गई है।


देखा जाए तो पी चिदंबरम कुल राजस्व (टैक्स और गैर टैक्स) में 21 फीसदी बढ़त की बात कर रहे हैं जबकि जीडीपी ग्रोथ में 13.4 फीसदी बढ़त का अनुमान दिया गया है।


इसके अलावा सरकार की उधार राशियों में 4 फीसदी की बढ़त होने का अनुमान भी संदेहात्मक लगता है जिसके बाद ये 5,42,499 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि बहुत से मौजूदा लोन की रीडेम्पशन उस पूंजी द्वारा की जाएंगी जो विभिन्न मंत्रालयों को दिसबंर से खर्च करने की अनुमति नहीं थी। इस संख्या पर अधिक विस्तृत जांच की जरूरत है।


लेकिन एक आदमी के लिए बजट 2013-14 से कोई उत्साहजनक बात निकलकर सामने नहीं आई है क्योंकि इस बजट में उनके लिए बहुत कम दिया गया है।


मध्यम वर्ग और पूंजी बाजार के लिए पी चिदंबरम द्वारा उठाए गए कदम मात्र औपचारिकता है। हालांकि मूल टैक्स लिमिट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है लेकिन 5 लाख रुपये तक की आय वालों को 2000 रुपये का टैक्स क्रेडिट दिया जाएगा।


वो 42,000 लोग जो अपनी आय 1 करोड़ रुपये से ज्यादा दिखाते हैं उवके लिए बजट में 10 फीसदी सरचार्ज लगाया गया है। प्रॉपर्टी बेचने वालों को 50 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी बेचने पर 1 फीसदी टीडीएस कटाना होगा। इसके अलावा अमीरों को एसयूवी पर भी ज्यादा खर्च करना होगा। (30 फीसदी एक्साइज ड्यूटी होने की वजह से)


रिच और सुपर रिच के बीच का फर्क खत्म करने के लिए डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स पर सरचार्ज लगाया गया है। इसे अगले साल के लिए 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा सिगरेट पर भी टेक्स बढ़ा दिया गया है।


इक्विटी डेरिवेटिव्स के लिए जहां सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) में कटौती की गई है, वहीं म्यूचुअल फंड और एक्सचेंज ट्रेडड फंड नॉन फूड कमोडिटी फ्यूचर्स के लिए अनूकूल बना दिए गए हैं।


राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम जो अपने पहले अवतार में फ्लॉप शो साबित हुई थी इस बार उसमें और जान फूंकने की कोशिश की गई है। इसके तहत पहली बार निवेश करने वाले निवेशकों के लिए आय सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई है। इस स्कीम को और उदार बनाने की कोशिश की गई है लेकिन अभी भी ये थोड़ी फीकी लगती है।


बजट 2013-14 की सबसे बड़ी कमजोरी ये है कि इसमें किसी भी दिशा में निर्णायक कदम नहीं उठाए गए हैं।


हालांकि आज के समय के हिसाब से पी चिदंबरम का बजट सुरक्षित और समझदारी भरा बजट लग सकता है लेकिन इससे किसी की भी उम्मीदें बढ़ी नहीं हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वित्त मंत्री सुरक्षित रहना चाहते हैं और कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते। इसी लिए इस बजट में कोई जोखिम भरे फैसले नहीं लिए जा सके।


ये लेख आर जगन्नाथम द्वारा लिखा गया है जो वेब18 के एडिटर हैं।