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बजट के बाद कैसे करें फाइनेंशियल प्लानिंग

जानिए बजट के बाद आपको अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग किस तरह करनी चाहिए और क्या उनमें किसी तरह के बदलाव की जरूरत है।
अपडेटेड Mar 02, 2013 पर 14:43  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बजट पेश कर दिया है और कुछ लोगों को खुश किया तो कुछ को निराश। लेकिन अगर बात की जाए टैक्सपेयर्स की तो उनके हाथ कुछ खास नहीं लगा है। सिर्फ 2 लाख से 5 लाख के बीच कमाने वालों को 2 हजार रुपए का टैक्स क्रेडिट देकर उन्होंने बाकी टैक्सपेयर्स के लिए कोई बदलाव नहीं किया है।

ऐसे में बजट के बाद आपको अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग किस तरह करनी चाहिए, क्या उनमें किसी तरह के बदलाव की जरूरत है आइए जानते  है रूंगटा सिक्योरिटीज के हर्षवर्धन रूंगटा और लैडरअप वेल्थ मैनेजमेंट के एमडी राघवेंद्र नाथ जी से।


लैडरअप वेल्थ मैनेजमेंट के एमडी राघवेंद्र नाथ का कहना है कि फाइनेंशियल प्लानिंग संपत्ति बनाने का एक लॉन्ग टर्म जरिया है। जब तक टैक्स में कोई बड़ा बदलाव ना आएं तब तक फाइनेंशियल प्लानिंग ज्यादा असर नहीं पड़ता है।


इस बजट में वित्त मंत्री ने व्यक्तिगत निवेशकों के लिए डेट फंड में जो डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स बढ़ाया है उसकी वजह से जो शॉर्ट टर्म डेट फंड में पैसा डालकर टैक्स की बचत करते थे वो अवसर अब खत्म हुआ है। इसलिए अगर निवेशक फिक्स डिपॉजिट या शॉर्ट टर्म में जाता है तो ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा। बजट में कोई ऐसे प्रावधान नहीं हुए जिससे फाइनेंशियल प्लानिंग में बदलाव किए जा सकें। लॉन्ग टर्म डेट फंड में निवेशित व्यक्ति को कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है।


बजट में हाउसिंग सेक्टर से सबंधित बड़ा प्रावधान निकाला गया है। पहली बार घर खरीदने वाले 25 लाख से कम के होमलोन लोन पर 2.5 लाख तक के ब्याज पर सालाना टैक्स छूट ले सकेंगे। इससे 5 लाख तक कमाई वाले को 10,000 रुपये तक की बचत होगी। 5-10 लाख तक कमाने वाले को 20,000 रुपये और 10 लाख से ऊपर वाले 30,000 रुपये तक की बचत हो सकेगी। लेकिन घर की वैल्यू 40 रुपये लाख रुपये तक होनी चाहिए। ये बदलाव रिटेल निवेशकों के हिसाब से बड़ा फायदेमंद है।


रूंगटा सिक्योरिटीज के हर्षवर्धन रूंगटा का कहना है कि बजट में जो छोटे बदलाव हुए है उनका फाइनेंशियल प्लानिंग पर ज्यादा असर नहीं होगा। बजट में सरचार्ज करीब 10 फीसदी हुआ है। सरचार्ज 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाने वाले व्यक्ति और कंपनियों दोनों पर अगले 1 साल के लिए लागू होगा। सिर्फ 2 लाख से 5 लाख के बीच कमाने वालों को दो हजार रुपए का टैक्स क्रेडिट देकर उन्होंने बाकी टैक्सपेयर्स के लिए कोई बदलाव नहीं किया है।


हर्षवर्धन रूंगटा के मुताबिक अगर आपने 100 रुपये किसी एक बॉन्ड में निवेश किया है। 1 साल बाद जब ब्याज देने का वक्त आता है तो आपको 100 रुपये पर 6 फीसदी के हिसाब से ब्याज मिलता है।  इंफ्लेक्शन इंडेक्स बॉन्ड में आपकी प्रिसिपल वैल्यू 107 रुपये गिनी जाएगी क्योंकि इंफ्लेशन 7 फीसदी होगा तो 107 रुपये पर 6 फीसदी ब्याज यानि 6.42 रुपये ब्याज मिलेगा। पेंशनर के लिहाज से इंफ्लेक्शन इंडेक्स बॉन्ड काफी अच्छा है।


25 लाख तक के होम लोन पर 1 लाख रुपये तक की छूट देकर घर खरीदारों को थोड़ी राहत जरूर दी है और इसके साथ ही आरईजीएसएस स्कीम का दायरा बढ़ाकर उसे भी और आकर्षक बनाने की कोशिश की है।


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