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पटरी पर लौटेगी एचएसबीसी एएमसी की गाड़ी!

एचएसबीसी म्यूचुअल फंड के सामने में कड़ी चुनौतियां हैं।
अपडेटेड Mar 14, 2013 पर 13:17  |  स्रोत : Moneycontrol.com

एचएसबीसी म्यूचुअल फंड के सामने में कड़ी चुनौतियां हैं। एचएसबीसी एएमसी के एसेट अंडर मैनेजमेंट में काफी गिरावट आई है। पिछले 2 सालों से एएमसी घाटे में चल रही है। एएमसी के स्कीमों का प्रदर्शन भी खास अच्छा नहीं रहा है।


एचएसबीसी के कारोबार के शुरुआत धमाकेदार हुई थी। 2002 में लॉन्च होने के बाद एचएसबीसी ब्रैंड और एचएसबीसी इक्विटी फंड के अच्छे प्रदर्शन का फायदा एएमसी को मिला था। एचएसबीसी इक्विटी फंड को शानदार रिस्पॉन्स मिला था, जिसके चलते एएमसी के एसेट अंडर मैनेजमेंट में बढ़ोतरी हुई थी।


दिसबंर 2002 में एचएसबीसी इक्विटी फंड लॉन्च करने के बाद 2004-2008 के बीच एएमसी ने हर साल नए इक्विटी फंड बाजार में उतारे। 2009 में इंडिया एडवांटेज फंड का नाम बदलकर एचएसबीसी प्रोग्रेसिव थीम्स किया गया था और एसेट एलोकेशन में बदलाव हुआ था।


एचएचबीसी की स्कीमों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। जैसे एचएसबीसी मिडकैप इक्विटी फंड के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव रहा है। वहीं, एचएसबीसी इक्विटी फंड का प्रदर्शन 2003 और 2004 में शानदार रहा था। 10 साल के बेहतरीन फंड की सूची में एचएसबीसी इक्विटी फंड में ऊपर है, लेकिन बाकी लंबी अवधि की रैकिंग में फंड को खास स्थान नहीं मिल पाया है।


अच्छा प्रदर्शन न होने की वजह से एचएसबीसी एएमसी के एसेट अंडर मैनेजमेंट में काफी गिरावट आई है। दिसंबर 2007-दिसंबर 2012 में एसेट अंडर मैनेजमेंट 53 फीसदी घटे हैं। एचएसबीसी एएमसी के सीईओ पुनीत चड्ढा का कहना है कि लिक्विड फंड्स से बाहर निकलने के फैसले की वजह से एसेट अंडर मैनेजमेंट घटे हैं।


घटते एसेट अंडर मैनेजमेंट और खराब प्रदर्शन के साथ एचएसबीसी एएमसी मुनाफे के मोर्चे पर भी सफल नहीं रही है। साल 2010 के अलावा 2009-2012 के दौरान एएमसी ने घाटा दिखाया है। 2007 और 2008 में एएमसी मुनाफे में रही थी।


पुनीत चड्ढा पर एचएसबीसी एएमसी के कारोबार को फिर पटरी पर लाने की जिम्मेदारी है। पुनीत चड्ढा ने 2 सालों में निवेश प्रक्रिया में बदलाव किए हैं, फिर भी स्कीमों के प्रदर्शन में सुधार आना बाकी है। एचएसबीसी एएमसी फंड ऑफ फंड्स के जरिए इंटरनेशनल प्रोडक्ट्स उतारने के विचार में है। एचएसबीसी इमर्जिंग मार्केट्स और एचएसबीसी ब्राजील घरेलू निवेशकों को अच्छे विकल्प देते हैं।


(ये लेख लारिसा फर्नांड ने लिखा है, जो फंडसुपरमार्ट की संपादक हैं)