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आरजीईएसएस की मिससेलिंग ने पकड़ा जोर

मोटे कमीशन के लालच में डिस्ट्रीब्यूटर आरजीईएसएस स्कीम के म्यूचुअल फंड की मिस सेलिंग कर रहे हैं।
अपडेटेड Mar 19, 2013 पर 08:10  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार की महत्वाकांक्षी योजना राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम (आरजीईएसएस) फ्लॉप हो गई है। ये लोगों का फायदा कराने के बजाए नुकसान करा रही है क्योंकि मोटे कमीशन के लालच में डिस्ट्रीब्यूटर इस स्कीम के म्यूचुअल फंड की मिस सेलिंग कर रहे हैं।


वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने राजीव गांधी इक्विटी स्कीम लॉन्च करते समय ये नहीं सोचा होगा कि इसका दुरूपयोग होगा। सरकार ने शेयर बाजार में नए निवेशकों को लाने के लिए टैक्स छूट के साथ आरजीईएसएस लॉन्च की थी। लेकिन कुछ म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर इसका गलत फायदा उठा रहे हैं।


दरअसल इस स्कीम को बढ़ावा देने के लिए म्यूचुअल फंड कंपनियां अपफ्रंट 6 फीसदी तक कमीशन दे रही हैं। आमतौर पर एजेंटो को 1.5-2.5 फीसदी तक ही कमीशन मिलता है। सिर्फ नए निवेशकों के लिए लाई गई इस स्कीम को डिस्ट्रीब्यूटर बड़े निवेशकों को 3 साल का प्रोडक्ट बताकर बेच रहे हैं।
 
कुछ डिस्ट्रीब्यूटर तो पुराने निवेशकों से उनका पोर्टफोलियो बिकवाकर 3 साल के लॉक इन वाली इस स्कीम में पैसा लगवा रहे हैं ताकि उन्हें ज्यादा कमीशन मिले। सूत्रों के मुताबिक करीब 70 फीसदी ऐसे लोगों को ये स्कीम बेची गई जो टैक्स छूट के लिए पात्र नहीं हैं यानि सिर्फ 30 फीसदी सही निवेशक ही इससे जुड़े हैं।


उधर सेबी के नियम के मुताबिक म्यूचुअल फंड कंपनियों को इस स्कीम के लिए 10 करोड़ रुपये के कलेक्शन का टारगेट पूरा करना है। नहीं तो उन्हें निवेशकों को पूरा पैसा लौटाना होगा। जो कि निवेशकों के लिए ठीक नहीं होगा। इसके अलावा ऐसे बाजार में नए निवेशकों को लाना मुश्किल है। इसके लिए कंपनियां इंसेटिव देकर इस टारगेट को पूरा करने में लगी हैं। आरजीईएसएस के तहत नए निवेशक 50,000 रुपये के निवेश पर 25,000 रुपये तक की टैक्स छूट पा सकते हैं। अगर आपके पास पहले से डीमैट अकाउंट है तो आपको टैक्स छूट नहीं मिलेगी।


अगर आपका म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर आपको कहता है कि 3 साल में आपको बेहतर रिटर्न मिलेंगे तो भी संभलकर रहें क्योंकि इस स्कीम का कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है। तो सिर्फ डिस्ट्रीब्यूटर के कहने पर न जाएं खुद भी रिसर्च करें और ऐसी मिससेलिंग से बचें।


उधर म्यूचुअल फंड की मिस सेलिंग पर लगाम लगाने के लिए जिस संस्था से उम्मीद थी वही इस तरह की खबरों को दबाने की कोशिश कर रहा है। म्यूचुअल फंड संगठन एम्फी ने इस सिलसिले में कंपनियों को एक चिट्टी लिखी है। सूत्रों का कहना है कि चिठ्ठी में आरजीईएसएस से जुड़ा डेटा एम्फी को भी देने की मांग की गई है। दूसरों को दिए गए डेटा की एक कॉपी एम्फी को भेजनी होगी। आरजीईएसएस की बदनामी के डर से एम्फी ने ये कदम उठाया है।


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