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डेट म्यूचुअल फंड में पैसे लगाने का सही समय

अप्रैल में नई पूंजी के बाजार में आने के बाद बैंकों और म्यूचुअल फंडों को पैसे की कमी नहीं रहेगी।
अपडेटेड Mar 28, 2013 पर 15:40  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

प्रामेरिका एसेट मैनेजर्स के हेड ऑफ फिक्स्ड इनकम महेंद्र जाजू
 का कहना है कि हर साल मार्च के अंत में घरेलू बाजार में लिक्विडिटी कम रहती है और इस साल भी ऐसी ही स्थिति है। हालांकि जैसे ही अप्रैल आएगा सिस्टम में लिक्विडिटी की स्थिति सुधर जाएगी।


आरबीआई के सीआरआर में कमी ना करने की वजह से बाजार में लिक्विडिटी की कमी है। इसके अलावा बजट में सरकार के खर्च ना बढ़ाने की वजह से भी पूंजी की कमी देखी जा रही है। अप्रैल में नई पूंजी के बाजार में आने के बाद बैंकों ओर म्यूचुअल फंडों को पैसे की कमी नहीं रहेगी।


महेंद्र जाजू का कहना है कि बैंकों के कुल पोर्टफोलियो पर इस स्थिति का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इस समय डेट या डेट म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने का सही समय है। बाजार की अस्थिरता के समय डायनामिक बॉन्ड फंड में निवेशक निवेश कर सकते हैं। प्रामेरिका डायनामिक फंड और प्रामेरिका क्रेडिट अपॉर्च्युनिटी फंड में पैसा लगाया जा सकता है।


चौथी तिमाही में सरकारी बॉन्ड्स में मार्क-टू-मार्केट घाटे का डर बना है। दरों में कमी नहीं होने के संकेत से बॉन्ड यील्ड में बढ़त देखी जा रही है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बॉन्ड की कीमतों में कमी आती है। बॉन्ड्स में म्यूचुअल फंड, प्राइवेट और विदेशी बैंकों की बिकवाली हो रही है। साथ ही संस्थागत निवेशकों की बिकवाली से बॉन्ड यील्ड में बढ़त हो रही है। तीसरी तिमाही में कई बैंकों ने सरकारी बॉन्ड्स में मुनाफावसूली की है। 10 साल के बॉन्ड की यील्ड फरवरी के 7.8 फीसदी से बढ़कर 7.99 फीसदी हो गई है।


म्यूचल फंड और बैंकों की बिकवाली के दबाव से भी यील्ड में बढ़त देखी जा रही है। ज्यादातर बैंक अपने कुल निवेश का 80 फीसदी हिस्सा सरकारी बॉन्ड में करते हैं। फरवरी और मार्च में यील्ड में कमी की उम्मीद में सरकारी बैंकों ने बॉन्ड में खरीदारी की है।


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