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नियमों की हुई अनदेखी, अब क्या करेगा सेबी

जिन कंपनियों ने शेयरहोल्डिंग नियमों को ताक पर रखा है उनके खिलाफ सेबी से कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।
अपडेटेड Jun 04, 2013 पर 11:07  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कंपनियों की पब्लिक शेयरहोल्डिंग कम से कम 25 फीसदी तक लाने की डेडलाइन खत्म हो गई है। करीब 65 कंपनियों ने अलग-अलग तरीकों से 15,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। लेकिन 80 से ज्यादा कंपनियां ऐसी हैं जो अपनी शेयरहोल्डिंग कम नहीं कर पाई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सेबी इन कंपनियों पर क्या कार्रवाई करेगा।


हालांकि सेबी ने अभी ये नहीं बताया है कि शेयरहोल्डिंग के नियमों को पूरा नहीं करने पर क्या कार्रवाई होगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि बार-बार कहने पर इन कंपनियों ने शेयरहोल्डिंग कम क्यों नहीं की। ऐसे में सेबी ऐसी कंपनियों के खिलाफ क्या कदम उठा सकता है बता रहे हैं फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के संस्थापक संदीप पारेख।


संदीप पारेख का कहना है कि जिन कंपनियों ने सेबी के नियम के मुताबिक अपनी हिस्सेदारी कम करने की कोशिश की है। लेकिन वह इसमें नाकाम रहे हैं, ऐसी कंपनियों को राहत देते हुए होल्डिंग कम करने के लिए थोड़ा और समय दिया जा सकता है। वहीं जिन कंपनियों से सेबी के इस आदेश को अनदेखा किया है हो सकता है कि सेबी उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए।


संदीप पारेख के अनुसार शेयरहोल्डिंग के नियम को पूरा नहीं करने वाली कंपनियों के प्रोमोटर्स पर सेबी जुर्माना लगा सकता है। वहीं शेयरधारकों के हितों का ख्याल रखते हुए सेबी शायद कंपनियों पर जुर्माना नहीं लगाए। लेकिन कंपनी के प्रोमोटर्स और दूसरे उच्च अधिकारियों पर सेबी कार्रवाई जरूर करेगा। वहीं इस प्रक्रिया में सेबी प्रोमोटर्स से उसके मत का अधिकार भी छिन सकता है।


इंस्टीट्यूशन इंवेस्टर एडवाइजरी सर्विसेस के एमडी अमित टंडन के मुताबिक जिन कंपनियों ने होल्डिंग कम करने की कोशिश की लेकिन नहीं कर पाए उनको कुछ राहत मिल सकती है। वहीं जिन कंपनियों से सेबी के नियमों की अनदेखी की है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कीए जाने की उम्मीद है। हालांकि सेबी कंपनियों को डीलिस्ट करने जैसे कदम नहीं उठाएगा।


सेबी के नियमों के तहत निजी कंपनियों में प्रोमोटर होल्डिंग घटाने की समय सीमा खत्म हो गई है। होल्डिंग कम करने के लिए 9 कंपनियों के ओएफएस खुले थे, जिसमें से केवल टाटा कम्युनिकेशन, रामा फॉस्फेट, मराठवाड़ा रीफैक्ट्रिज के ओएफएस ओवर सब्सक्राइब हो गए। जबकि बीजीआर एनर्जी, ओमैक्स और एस्सार पोर्ट्स के ओएफएस पूरी तरह नहीं भर पाए। एस्सार पोर्ट्स का ओएफएस 75 फीसदी भरा, जबकि बीजीआर एनर्जी 50 फीसदी और ओमैक्स का ओएफएस सिर्फ 25 फीसदी ही भर पाया है।


वहीं ओबेरॉय रियल्टी, मुथूट फाइनेंस, बजाज कॉर्प, एल्स्टॉम टीएंडटी, डालमिया भारत, हिंदुस्तान मीडिया, सिनेमैक्स इंडिया, हबटाउन और श्नाइडर इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियां सेबी के शेयरहोल्डिंग नियम को पूरा नहीं कर पाई है। इसके अलावा टीआरआईएल, वेंड्ट इंडिया, सुंदरम क्लेटन, बॉम्बे रेयॉन, बीजीआर एनर्जी, एस्सार पोर्ट और ओमैक्स में प्रोमोटर शेयरहोल्डिंग अब भी 75 फीसदी से ज्यादा है।


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