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एयूएम घटने से निराश ना हों, निवेश बनाएं रखें

इस समय म्यूचुअल फंड निवेशकों की स्ट्रैटेजी क्या होनी चाहिए जानते हैं वाइजइंवेस्ट एडवाइजर्स के हेमंत रुस्तगी से।
अपडेटेड Jun 15, 2013 पर 12:53  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

शेयर बाजार और रुपये की उठापटक का असर म्यूचुअल फंडों पर भी पड़ रहा है। निवेशक इक्विटी म्युचुअल फंड्स से तेजी से पैसा निकाल रहे हैं। एम्फी की रिपोर्ट के मुताबिक मई में निवेशकों ने इक्विटी फंड्स से करीब 3,400 करोड़ रुपये निकाले हैं जो पिछले 8 महीने में सबसे ज्यादा है। जबकि पूरी म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट 5 फीसदी बढ़कर ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है।


जाहिर सी बात है कि निवेशक बाजार की गिरावट से घबराकर इक्विटी फंड्स से पैसे निकाल रहे हैं। लेकिन क्या ऐसा करना सही है और इस समय म्यूचुअल फंड निवेशकों की स्ट्रैटेजी क्या होनी चाहिए जानते हैं वाइजइंवेस्ट एडवाइजर्स के हेमंत रुस्तगी से।


निवेशकों ने इस साल मई में इक्विटी फंडों से 33.57 अरब रुपये की निकासी की है, जबकि अप्रैल में 2.7 अरब रुपये की निकासी हुई थी। वहीं इस साल अब तक इक्विटी फंडों से 57.12 अरब रुपये की निकासी हुई है। बैलेस्ड फंडों में मई के दौरान 3.38 अरब रुपये की निकासी हुई, जबकि अप्रैल में 40 लाख रुपये की निकासी हुई। साथ ही इस गिल्ट फंडों से 1,912 करोड़ रुपये की निकासी हुई है।


हेमंत रुस्तगी की निवेशकों को सलाह है कि हड़बड़ी में पैसे निकालना शुरू ना कर दें। निवेशकों के निवेश की अवधि तय होनी चाहिए। दरअसल निवेश की अवधि तय नहीं होने पर निवेशक बाजार की उठापटक में घबरा कर निकलने लगते हैं। लेकिन निगेटिव रिटर्न देखते ही फंड से निकलना नहीं चाहिए, क्योंकि इक्विटी फंड का प्रदर्शन बाजार पर निर्भर होता है।


हेमंत रुस्तगी के मुताबिक घबराहट में निकलने से पहले गिरावट की वजह जानना जरूरी है। गौरतलब है कि बाजार में तेजी रहने पर ज्यादातर पोर्टफोलियो के रिटर्न अच्छे होते हैं। ऐसे में निवेशकों को लंबी अवधि के प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा किसी फंड का एयूएम लगातार घट रहा हो तो सतर्क हो जाएं। एयूएम लगातार घटने का मतलब है कि मौजूदा निवेशक निकल रहे हैं और नए निवेशक नहीं जुड़ रहे हैं।


हेमंत रुस्तगी ने बताया कि निवेशकों को डेट, इक्विटी और गोल्ड तीनों एसेट क्लास में निवेश रखना चाहिए। साथ ही घबराहट में निकलने से अच्छा है कि पोर्टफोलियो रीबैलेंस करते रहना चाहिए। गिल्ड फंड और डेट फंड पर कहा कि ब्याज दरें घटने के माहौल में गिल्ड और डेट फंड का रिटर्न बढ़ता है। बॉन्ड की कीमतों और ब्याज दरों के बीच उल्टा रिश्ता होता है। लेकिन गिल्ट फंड में उठापटक की गुंजाइश ज्यादा होती है। लिहाजा रिटेल निवेशकों को गिल्ट फंड से दूर रहना चाहिए। हालांकि मौजूदा माहौल में 18-24 महीने के डायनामिक बॉन्ड फंड में निवेश की सलाह है। डायनामिक बॉन्ड फंड में भी समय-समय पर उठापटक जारी रह सकती है।


हेमंत रुस्तगी का मानना है कि जो लोग इक्विटी, डेट और गोल्ड में सीधे निवेश नहीं करना चाहते उनके लिए म्यूचुअल फंड अच्छा विकल्प है। 5 साल के लिए इक्विटी ओरिएंटेड बैलेंस्ड और लार्ज कैप ओरिएंटेड इक्विटी फंड चुनने की सलाह है। 5 साल के लिए एचडीएफसी प्रूडेंस, आईसीआईसीआई प्रू बैलेंस्ड, आईसीआईसीआई फोकस्ड ब्लूचिप और बिड़ला सन लाइफ फ्रंटलाइन इक्विटी में निवेश किया जा सकता है। 30,000 रुपये प्रति महीने के निवेश पर सालाना 10 फीसदी रिटर्न मिला तो 5 साल में 23 लाख रुपये जुटने के आसार हैं।


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