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बीओआई एक्सा इक्विटी फंड: लगातार अंडरपरफॉर्मर

अर्णव पांड्या के मुताबिक जो निवेशक कम जोखिम उठाना चाहते हैं, उन्हें इस फंड से दूर ही रहना चाहिए।
अपडेटेड Jun 24, 2013 पर 12:37  |  स्रोत : Moneycontrol.com

बीओआई एक्सा इक्विटी फंड पहले भारती एक्सा इक्विटी फंड के नाम से जाना जाता था। ये ओपन एंडेड फंड है, जो ज्यादातर निवेश इक्विटी और इक्विटी से जुड़े सिक्योरिटीज में करता है। लॉन्च होने के वक्त से ही ये फंड अपने बेंचमार्क के मुकाबले अंडरपरफॉर्मर रहा है। फाइनेंशियल एडवाइजर अर्णव पांड्या के मुताबिक जो निवेशक कम जोखिम उठाना चाहते हैं, उन्हें इस फंड से दूर ही रहना चाहिए।


वर्ग: इक्विटी ओरियंटेड ओपन एंडेड


आरंभ: अक्टूबर 2008


एसेट अंडर मैनेजमेंट: मार्च 2013 के अंत तक 53 करोड़ रुपये


फंड मैनेजर: गौरव कपूर


विश्लेषण


बीओआई एक्सा इक्विटी फंड लार्ड कैप शेयरों में निवेश करता है और बीओआई म्यूचुअल फंड के आने से पहले इसका नाम भारती एक्सा इक्विटी फंड था। मई 2011 के अंत में फंड का सबसे ज्यादा एक्सपोजर फाइनेंशियल सर्विसेज में था और फाइनेंशियल सर्विसेज में करीब 20 फीसदी हिस्सा निवेश किया हुआ था। एनर्जी और आईटी सेक्टर में 15-15 फीसदी और कंज्यूमर गुड्स में 9 फीसदी हिस्सा निवेश किया गया था। फंड का टर्नओवर रेश्यो 3.8 गुना था। फंड के कुल पोर्टफोलियो का करीब 6 फीसदी हिस्सा नकदी और करंट एसेट के तौर पर रखा हुआ था। फंड का टॉप स्टॉक रिलायंस इंडस्ट्रीज था। इंफोसिस, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, एचसीएल टेक और एसबीआई में भी निवेश किया गया था। इस फंड का बेंचमार्क सीएनएक्स निफ्टी था और फंड 1 साल की अवधि में और लॉन्च से अंडरपरफॉर्मर रहा था।


6 महीने बाद भी बीओआई एक्सा इक्विटी फंड ने पोर्टफोलियो का 19 फीसदी फाइनेंशियल सर्विसेज में निवेश किया हुआ था। एनर्जी, कंज्यूमर गुड्स और आईटी सेक्टर में 14-16 फीसदी का निवेश था। फंड का पोर्टफोलियो टर्नओवर रेश्यो गिरकर 1.7 गुना हो गया था। इंफोसिस में 9 फीसदी का निवेश था और टॉप स्टॉक था। आईटीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, टीसीएस, एसबीआई और एलएंडटी में भी पैसा लगाया गया था। सितंबर 2011 को खत्म हुई 1 साल की अवधि में और लॉन्च से फंड अंडरपरफॉर्मर रहा था।


मई 2012 तक बीओआई एक्सा इक्विटी फंड के पोर्टफोलियो के मैनेजमेंट में स्थिरता लाने की प्रक्रिया जारी रहा और फंड का पोर्टफोलियो टर्नओवर रेश्यो गिरकर 0.9 गुना के नीचे पहुंच गया। वहीं, फाइनेंशियल सर्विसेज का पोर्टफोलियो में हिस्सा बढ़कर 29 फीसदी हो गया। एनर्जी और कंज्यूमर गुड्स में 10 फीसदी से ज्यादा का निवेश था। फंड का टॉप स्टॉक आईटीसी था, जिसमें 8 फीसदी का निवेश था। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और इंफोसिस में भी पैसा लगाया गया था। मार्च 2012 को खत्म हुई 1 साल की अवधि में फंड ने थोड़ा आउटपरफॉरमेंस दिखाया था। हालांकि, 3 साल की अवधि में फंड अंडरपरफॉर्मर ही था।


6 महीने बाद फंड के पोर्टफोलियो में फाइनेंशियल सर्विसेज का हिस्सा बढ़कर 33 फीसदी हो गया। कंज्यूमर गुड्स में 13 फीसदी हिस्सा निवेश किया गया था। एनर्जी और फार्मा सेक्टर में बड़ा हिस्सा लगाया गया था। फंड का पोर्टफोलियो टर्नओवर रेश्यो 0.67 गुना था। एचडीएफसी बैंक में 10 फीसदी का निवेश था और फंड का टॉप स्टॉक था। आईटीसी, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, एसबीआई, इंफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचयूएल में भी निवेश किया गया था। सितंबर 2012 को खत्म हुई 1 साल और 3 साल की अवधि में फंड अंडरपरफॉर्मर रहा था।


अप्रैल 2013 के अंत तक बीओआई एक्सा इक्विटी फंड ने अपनी पोर्टफोलियो स्ट्रैटेजी कायम रखी और पोर्टफोलियो में फाइनेंशियल सर्विसेज का 34 फीसदी हिस्सा था। आईटी, फार्मा और एनर्जी सेक्टर में भी बड़ा निवेश किया गया था। पोर्टफोलियो के 8 फीसदी के साथ आईसीआईसीआई बैंक फंड का टॉप स्टॉक बन गया था। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस, आईटीसी, एसबीआई, टेक महिंद्रा, एनटीपीसी, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक में भी निवेश किया गया था। मार्च 2013 को खत्म हुई 1 साल और 3 साल की अवधि में फंड अंडरपरफॉर्मर रहा था।


कम जोखिम चाहने वाले निवेशकों के लिए बीओआई एक्सा इक्विटी फंड के बजाय दूसरे लार्ज कैप इक्विटी फंड में निवेश करना बेहतर होगा। पैसा लगाते वक्त निवेशकों को लंबी अवधि में फंड का प्रदर्शन देखना चाहिए।