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रंगों को देखकर होगा म्यूचुअल फंड में निवेश

रंगों को देखकर अब आप तय कर सकेंगे कि किसी म्युचुअल फंड स्कीम में आपको पैसा लगाना चाहिए कि नहीं।
अपडेटेड Jun 28, 2013 पर 08:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

म्यूचुअल फंड की खरीद से कलर का कोई संबध हो सकता है क्या। जी हां 1 तारीख से ऐसा ही होगा। अब आप म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट के अप्लीकेशन फार्म पर कलर देखकर ही उससे जुड़े रिस्क का अंदाजा लगा पाएंगे।


रंगों को देखकर अब आप तय कर सकेंगे कि किसी म्युचुअल फंड स्कीम में आपको पैसा लगाना चाहिए कि नहीं। 1 जुलाई से हर म्यूचुअल फंड कंपनी को अपनी स्कीम के नाम के साथ रंगों को भी छापना होगा। ये रंग ही बताएंगे कि स्कीम कितनी रिस्की है।


जैसे अगर स्कीम के साथ नीला चिन्ह तो इसका मतलब होगा कि इसमें सबसे कम रिस्क है और पैसा डेट और फिक्स्ड फिक्स्ड मैच्युरिटी प्लान में लगेंगे। पीले रंग का मतलब होगा कि स्कीम में औसत रिस्क है। इसके पैसे मंथली इनकम प्लान, बैलेंस फंड में लगाए जाएंगे। और भूरा रंग इस बात का संकेत होगा कि ये म्यूचुअल फंड स्कीम शेयरों में पैसे लगाएगी और इसमें रिस्क सबसे ज्यादा होगा। हालांकि निवेशकों को ये भी समझना होगा कि ज्यादा रिस्क वाले स्कीम में ही ज्यादा रिटर्न की गुंजाइश भी होती है।


म्यूचुअल फंड कंपनियों को ये कलर कोड एप्लीकेशन, विज्ञापन और उस स्कीम से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट पर देना होगा। हालांकि कुछ कंपनियों का कहना है कि इतने सारे प्रोडक्ट्स को सिर्फ 3 कलर में बांटना ठीक नहीं है।


कलर कोड के अलावा कंपनियों को ये भी बताना होगा कि किस अवधि के निवेशकों के लिए उनकी स्कीम सबसे बेहतर है। हालांकि जानकारों का कहना है कि सिर्फ इस कोडिंग को देखकर म्यूचुअल फंड स्कीम में पैसा लगाना ठीक नहीं होगा, फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह तो लेनी ही चाहिए।


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