Moneycontrol » समाचार » स्टॉक व्यू खबरें

किन पीएसयू के ओएफएस में लगाएं पैसे

आज हम उन कंपनियों के बारे में आपको रणनीति बताएंगे जिनमें सरकार जल्द ही हिस्सा बेचने वाली है।
अपडेटेड Jul 03, 2013 पर 12:07  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार ने मौजूदा कारोबारी साल में 54,000 करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा है। इसलिए आने वाले महीनों में ओएफएस यानि ऑफर फॉर सेल की भरमार देखने को मिलेगी। लेकिन क्या सिर्फ पीएसयू देखकर ही आपको पैसे इन कंपनियों में लगा देने चाहिए, या फिर कंपनी के कारोबार और ग्रोथ पर अच्छी रिसर्च के बाद ही कोई फैसला लेना चाहिए।


ये सवाल इसलिए अहम है क्योंकि पहले आए ओएफएस में कई सरकारी कंपनियों के शेयर ओएफएस के भाव के नीचे पहुंच गए हैं। लिहाजा मोटी कमाई की आस लगाए बैठे निवेशकों को निराशा हाथ लगी है। आज हम उन कंपनियों के बारे में आपकी रणनीति बनाएंगे जिनमें सरकार जल्द ही हिस्सा बेचने वाली है।


अविनाश गोरक्षकर की ओएफएस वाले शेयरों पर राय


नेवेली लिग्नाइटः


नेवेली लिग्नाइट में सरकारी हिस्सा 93.56 फीसदी है और इसमें सरकार की 3.56 फीसदी के विनिवेश की योजना है। पिछले वर्ष कंपनी ने 5600 करोड़ रुपये का राजस्व और 1500 करोड़ रुपये का मुनाफा दिखाया था। ईपीएस 8-8.50 रुपये आई थी। कंपनी के कारोबार की संभावनाएं काफी बेहतर हैं। अगर नेवेली लिग्नाइट अच्छे डिस्काउंट स्तर पर ओएफएस लेकर आता है तो इसमें निवेश किया जा सकता है। मध्यम से लंबी अवधि में शेयर में अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं।


नेशनल फर्टिलाइजरः 


नेशनल फर्टिलाइजर में सरकारी हिस्सा 97.64 फीसदी है और इसमें सरकार की 7.64 फीसदी के विनिवेश की योजना है। एनएफएल के वित्त वर्ष 2013 के नतीजों में 170 करोड़ रुपये का घाटा देखने को मिला था। आने वाले 2 तिमाही में शेयर में तेजी की उम्मीद नहीं है। अन्य फर्टिलाइजर कंपनियों के मुकाबले इसके फाइनेंशियल काफी कमजोर हैं। ओएफएस आने पर भी शेयर में निवेश ना करने की सलाह है।


फैक्टः


फैक्ट में सरकारी हिस्सा 98.56 फीसदी है और इसमें सरकार की 8.56 फीसदी के विनिवेश की योजना है। कंपनी के नतीजे आश्चर्यजनक रहे हैं। वित्त वर्ष 2013 में 2800-2900 करोड़ रुपये की आय पर कंपनी ने सिर्फ 25 करोड़ रुपये का मुनाफा दिखाया है। कंपनी का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है और इसमें जल्द सुधार की उम्मीद नहीं है। पिछले 3-4 सालों में शेयर ने निवेशकों को नुकसान ही कराया है। इस शेयर का ओएफएस आने पर भी इसमें निवेश नहीं करना चाहिए।


एंड्र्यू यूले एंड कंपनीः


एंड्र्यू यूले एंड कंपनी में सरकारी हिस्सा 93.3 फीसदी है और इसमें सरकार की 3.3 फीसदी के विनिवेश की योजना है। वित्त वर्ष 2013 के नतीजों में 300 करोड़ रुपये की आय और 10-11 करोड़ रुपये का मुनाफा दिखाया है। आगे आने वाली तिमाहियों में भी ज्यादा अच्छे नतीजों की उम्मीद नहीं है। इसके ओएफएस में निवेश ना करें।


स्कूटर्स इंडियाः


स्कूटर्स इंडिया में सरकारी हिस्सा 95.38 फीसदी है और इसमें सरकार की 5.38 फीसदी के विनिवेश की योजना है। वित्त वर्ष 2013 में कंपनी ने 250-300 करोड़ रुपये की आय दिखाई और 20 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया था। फंडामेंटल के लिहाज से शेयर में ज्यादा दम नहीं है। कंपनी की कमाई बढ़ने की उम्मीद नहीं है और इसके ओएफएस में निवेश नहीं करना चाहिए।


आईओसीः


आईओसी में सरकारी हिस्सा 78.92 फीसदी है और इसमें सरकार की 10 फीसदी के विनिवेश की योजना है। अगल 1.5-2 साल का नजरिया है तो शेयर में निवेश कर सकते हैं। हालांकि छोटी अवधि में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। अगर डीजल पर कंपनी की अंडररिकवरी कम होती है तो इसका शेयर को फायदा मिल सकता है।

कुणाल सरावगी की ओएफएस वाले शेयरों पर राय

एचएमटीः


एचएमटी में सरकारी हिस्सा 98.88 फीसदी है और इसमें सरकार की 8.88 फीसदी के विनिवेश की योजना है। शेयर में अगर और सप्लाई आती है तो भी इस पर कोई सकारात्मक असर देखने को नहीं मिलेगा। शेयर एतिहासिक रुप से कमजोर ही लग रहा है और इस समय ओएफएस आने से भी शेयर को कोई फायदा नहीं मिलेगा। शेयर 37 रुपये से लेकर 28 रुपये के बीच ही कारोबार करेगा। शेयर में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है।


आईटीआईः


आईटीआई में सरकारी हिस्सा 92.98 फीसदी है और इसमें सरकार की 2.98 फीसदी के विनिवेश की योजना है। शेयर में रिटेल निवेशकों को दूर ही रहने की सलाह है। शेयर में 15 रुपये पर सपोर्ट है लेकिन इस स्तर पर भी 1-1.5 रुपये से ज्यादा तेजी नहीं आएगी। आगे चलकर भी शेयर में तेजी की उम्मीद नहीं है। इसका ओएफएस आने पर भी शेयर में निवेश नहीं करना चाहिए।


एसटीसीः


एसटीसी में सरकारी हिस्सा 91.02 फीसदी है और इसमें सरकार की 1.02 फीसदी के विनिवेश की योजना है। इसमें 80 रुपये के आसपास सपोर्ट है और इसी स्तर के आसपास ओएफएस आने की उम्मीद है। इसमें अगर लंबी अवधि का लक्ष्य है तो निवेश कर सकते हैं अन्यथा छोटी अवधि में इस शेयर से दूर ही रहें तो बेहतर है।


वीडियो देखें