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रियल एस्टेट टीवीः एनसीआर के नए जिलों का जायजा

प्रकाशित Mon, 30, 2013 पर 15:19  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के दायरे में 3 नए इलाके जुड़े हैं भरतपुर, महेंद्रगढ़ और भिवानी। इन तीनों इलाकों के शामिल होने के बाद एनसीआर का दायरा 34 फीसदी और बढ़ गया है। एनसीआर में शामिल किए गए इन इलाकों में रियल एस्टेट के लिहाज से कितनी संभावनाएं हैं आइए जानते हैं।


एनसीआर का फैलाव लगातार जारी है। महेद्रगढ़, भिवानी और भरतपुर जैसे इलाके भी अब एनसीआर का हिस्सा बन गए हैं। और एनसीआर के दायरे में आते ही इन इलाकों में जमीन और फ्लैट्स की कीमत में उछाल हुआ है। इन इलाकों में जमीन की कीमत 60 फीसदी बढ़ी है तो फ्लैट्स अब 10-25 फीसदी महंगे हो गए हैं।


हरियाणा के भिवानी और महेंद्रगढ़ इलाके में जमीन की कीमत 60-65 लाख रुपये प्रति बीघा थी। एनसीआर में जुडने के बाद ये बढ़कर 1 करोड़ रुपये प्रति बीघा हो गई है। वहीं जो फ्लैट्स पहले 2000-2500 रुपये प्रति वर्गफीट में बिक रहे थे, उन्हीं के लिए अब 2200-3000 रुपये प्रति वर्गफीट की मांग हो रही है।


राजस्थान के भरतपुर में जमीन की कीमत पहले 55-65 लाख रुपये प्रति बीघा थी जो बढ़कर अब 90 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये प्रति बीघा हो गई है। फ्लैट्स की कीमत भी 2000 रुपये प्रति वर्गफीट से बढ़कर 3000 रुपये प्रति वर्गफीट हो गई है। प्रॉपर्टी के जानकारों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ये तीनों इलाके बेहतर ऑप्शंस साबित हो सकते हैं।


राजस्थान में पडने वाला भरतपुर दिल्ली से 160 किमी दूर है, तो हरियाणा का भिवानी 106 किमी और महेंद्रगढ़ दिल्ली से 165 किमी की दूरी पर है। निवेशकों के लिए भले ये निवेश का अच्छा वक्त हो, एंड यूजर के लिए कुछ और समय इंतजार करना बहतर होगा। क्योंकि, यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी तैयार नहीं है।


और दिल्ली से कनेक्टिवीटी में भी सुधार की काफी गुजांइश है। रियल एस्टेट डेवलपर्स बताते हैं कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के तहत आने के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी दोनों में सुधार होगा जिसके बाद यहां रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आएगी।


रियल एस्टेट कंपनियों के मुताबिक महेंद्रगढ़, भिवानी और भरतपुर इलाके हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिहाज से अच्छे लोकेशंस साबित होने के लिए अभी 5-7 साल का वक्त और लगेगा। और आने वाले इन सालों में यहां अफोर्डेबल हाउसिंग की डिमांड सबसे ज्यादा होगी।


डेवलपर्स का ये भी मानना है कि लंबे समय के नजरिए से देखा जाए तो आने वाले समय में इन इलाकों में हाउसिंग की डिमांड 100 फीसदी तक बढ़ेगी और ऐसी स्थिति में ओवरसप्लाई की स्थिति से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। कुल मिलाकर उम्मीद की जा रही है कि इन इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सुधार होगा और इंडस्ट्रीज को बढ़ावा मिलेगा। नतीजतन रियल एस्टेट सेक्टर भी इन इलाकों की ओर आकर्षित होगा।


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