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एलआईसी नोमुरा इक्विटी फंड की समीक्षा

निवेशकों को सलाह है कि अपनी निवेश की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी लार्जकैप म्यूचुअल फंड स्कीम में दांव लगाएं।
अपडेटेड Oct 03, 2013 पर 12:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

एलआईसी नोमुरा इक्विटी फंड ओपन एंडेड ग्रोथ स्कीम है। ये स्कीम अप्रैल 1998 से बाजार में है। अगस्त 2013 तक इस स्कीम का एयूएम 287 करोड़ रुपये था। इस स्कीम के फंड मैनेजर नोबुताका किताजिमा हैं।


एलआईसी नोमुरा इक्विटी फंड में फरवरी 2012 तक पोर्टफोलियो का 20 फीसदी निवेश बैंकों में था, जबकि सॉफ्टवेयर कंपनियों में निवेश 15 फीसदी से ज्यादा का था। पोर्टफोलियो के शेयरों की बात करें तो आईटीसी में सबसे ज्यादा 9 फीसदी, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और टाटा मोटर्स जैसे दिग्गज शामिल थे। स्कीम के लिए बेंचमार्क सेंसेक्स है, लेकिन दिसंबर 2011 में ये स्कीम 1-3 साल की समीक्षा के लिए अंडरपरफॉर्मर रहा। 6 महीने बाद भी स्कीम के पोर्टफोलियो में कोई ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला।


फरवरी 2013 के अंत तक इस स्कीम के पोर्टफोलियो में बैंक शेयरों का हिस्सा बढ़कर 1/4 हो गया। इसके अलावा सॉफ्टवेयर और एफएमसीजी कंपनियों का हिस्सा भी ज्यादा था। लेकिन आईटीसी को पछाड़ कर इंफोसिस का हिस्सा ज्यादा हो गया। फिर अगस्त 2013 में बैंक, सॉफ्टवेयर, कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और ऑटो सेक्टर ने पोर्टफोलियो में जगह बनाई। लेकिन जून 2013 के अंत में भी 1-3 साल के प्रदर्शन के लिहाज से स्कीम अंडरपरफॉर्मर ही रहा।


लिहाजा निवेशकों को यही सलाह है कि उनको अपनी निवेश की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी लार्जकैप वाले म्यूचुअल फंड स्कीम में दांव लगाना चाहिए। दरअसल एलआईसी नोमुरा इक्विटी फंड ने हाल में कभी भी दमदार प्रदर्शन नहीं किया जिस कारण स्कीम से बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है।


वित्तीय सलाहकार अर्णव पंड्या ने एलआईसी नोमुरा इक्विटी फंड की समीक्षा की है।