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इंश्योरेंस-निवेश की उपयोगिताओं को समझें

रूंगटा सिक्योरिटीज के हर्षवर्धन रूंगटा बता रहे हैं इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
अपडेटेड Nov 08, 2013 पर 12:41  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

व्यक्ति के जीवन में इंश्योरेंस और निवेश दोनों का महत्व और उद्देश्य अलग है। ऐसे में इंश्योरेंस और निवेश दोनों को एक साथ जोड़ना एक नकारात्मक कदम होता है। इंश्योरेंस आपकी सुरक्षा के लिए है ना कि निवेश का एक जरिया। निवेश के लिए बाजार में मौजूद दूसरे विकल्पों पर विचार करना उचित होगा। रूंगटा सिक्योरिटीज के हर्षवर्धन रूंगटा बता रहे हैं इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है, वहीं निवेश के लिए क्या बेहतर विकल्प हैं।


सवाल: मेरी उम्र 25 साल है और मैंने हाल ही में एलआईसी की जीवन आनंद पॉलिसी ली है। जिसका सम एश्योर्ड 15 लाख रुपये है। इसके अलावा आईसीआईसीआई की गारंटीड मनी पॉलिसी में भी निवेश किया है। ये दोनों पॉलिसी कैसी हैं, क्या इनसे अच्छे रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है?


हर्षवर्धन रूंगटा: सबसे पहले आपको अपने नजरिए में स्पष्टता लाने की जरूरत है। दोनों की पॉलिसी में आपका नजरिया इंश्योरेंस का है या फिर निवेश का। इंश्योरेंस और निवेश को कभी भी एक दायरे में नहीं रखना चाहिए। दोनों की उपयोगिताएं अलग-अलग हैं। निवेश के लिए म्युचुअल फंड, पीपीएफ और रिकरिंग डिपॉजिट जैसे विकल्पों का चुनाव करना चाहिए। वहीं यदि इंश्योरेंस और निवेश को लेकर दुविधा में हैं तो किसी फाइनेंशियल प्लानर की मदद ले सकते हैं।


सवाल: एलआईसी की जीवन सुरभि पॉलिसी नवंबर 2010 में खरीदी थी, अब तक 3 प्रीमियम का भुगतान कर चुका हूं। ये पॉलिसी कैसी है, क्या इसमें बने रहना उचित होगा?


हर्षवर्धन रूंगटा: एलआईसी की जीवन सुरभि पॉलिसी में हर 5 साल में बढ़त के साथ लाइफ कवर मिलता है। आप पॉलिसी में 3 प्रीमियम भर चुके हैं, ऐसे में पेड-अप या सरेंडर जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इंश्योरेंस कंपनी से दोनों ही विकल्पों के बारे में जानकारी हासिल करें, जो उचित लगे उस विकल्प के साथ जा सकते हैं। वहीं सरेंडर प्रक्रिया में काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


सवाल: एचडीएफसी संपूर्ण लाइफ समृद्धि में निवेश कैसा रहेगा। या फिर निवेश के लिए इक्विटी का विकल्प उचित होगा?


हर्षवर्धन रूंगटा: पहले यह निश्चित करें आप इंश्योरेंस चाहते हैं या फिर निवेश। निवेश के लिए किसी ट्रेडिशनल प्लान में जाने के बजाय इक्विटी में पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। जिससे आपको इंश्योरेंस प्लान की तुलना में ज्यादा रिटर्न प्राप्त होगा। वहीं यदि कोई टर्म प्लान खरीदना चाहते हैं तो एचडीएफसी क्लिक टू प्रोटेक्ट एक बेहतर प्लान है।


सवाल: मेरी उम्र 24 साल है, मुझे साल 2008 में ब्रेन हैमरेज हुआ था, किंतु अब मैं बिलकुल ठीक हूं। बावजूद इसके इंश्योरेंस कंपनियां मुझे हेल्थ प्लान देने से कतराती हैं। क्या मैं अपनी बीमारी के बारे में इंश्योरेंस कंपनी से छुपाकर कोई प्लान ले सकता हूं। वहीं इससे क्लेम सेटलमेंट में कोई समस्या तो नहीं आएगी?


हर्षवर्धन रूंगटा: यह काफी दूर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी कम उम्र में आपको एक भयंकर बीमारी का सामना करना पड़ा। किंतु इंश्योरेंस कंपनी से अपनी बीमारी के बारे में छुपाकर प्लान खरीदना एक गलत फैसला होगा। इससे भविष्य में आपका क्लेम रद्द हो सकता है। इंश्योरेंस कंपनी को अपनी बीमारी के बारे में पूरी जानकारी देना जरूरी है, हालांकि प्लान मिलने में कुछ दिक्कतें जरूर आ सकती हैं। लेकिन कंपनियां कुछ विकल्पों के तहत प्लान दे सकती हैं।


सवाल: मेरी उम्र 42 साल है, घर में पत्नी के अलावा 2 बच्चे हैं। मैंने एक प्राइवेट कंपनी से खुद और पत्नी के लिए एक इंश्योरेंस पॉलिसी ली है। लेकिन मुझे जानकारी मिली है कि प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम सेटलमेंट में काफी दिक्कतें पैदा करती हैं। क्या सरकारी कंपनी से प्लान खरीदना उचित होगा?


हर्षवर्धन रूंगटा: यह एक बेहद गलत धारणा है कि प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम सेटलमेंट में दिक्कतें पैदा करती हैं। भारत में सभी इंश्योरेंस कंपनियां आईआरडीए के तहत रेगुलेट होती हैं। पॉलिसी खरीदते समय यदि आपने अपने बारे में संपूर्ण और सही जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को मुहैया कराई है तो क्लेम रिजेक्ट होने की कोई गुंजाइश नहीं होती है।


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