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रिलायंस विजन फंड: फिलहाल निवेश से बचें

सितंबर 2013 में रिलायंस विजन फंड का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 1,589 करोड़ रुपये रहा है।
अपडेटेड Nov 13, 2013 पर 11:27  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रिलायंस विजन फंड: इस फंड का प्रमुख उद्देश्य इक्विटी और इससे संबंधित विकल्पों में निवेश करके लंबी अवधि के लक्ष्यों को हासिल करना है। सितंबर 2013 में रिलायंस विजन फंड का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 1,589 करोड़ रुपये रहा है। ये एक लार्ज कैप फोक्स्ड फंड है और काफी पुरानी निवेश स्कीम होने के साथ-साथ लंबे समय से फंड हाउसेस का पसंदीदा भी रहा। लेकिन लगातार उतार-चढ़ाव के चलते रिलायंस वीजन फंड में फिलहाल निवेश से बचना ही निवेशकों के लिए उचित फैसला होगा।


सितंबर 2011 के दौरान रिलायंस विजन फंड का फार्मा सेक्टर पर 17 फीसदी का एक्सपोजर रहा था। इसके अलावा पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, बैंक और ऑटो सेक्टर पर फंड ने डबल डिजीट के साथ अपना निवेश किया था। हालांकि इस दौरान एसबीआई रिलायंस विजन फंड के पोर्टफोलियो में सबसे ऊपर था। इसके अलावा मारुति सुजुकी, डिवीज लैब, इंफोसिस, सीमेंस, आईसीआईसीआई बैंक, बीपीसीएल और एवेंटिस फार्मा कुछ ऐसे शेयर हैं जिसपर फंड ने ज्यादा फोकस किया था।


साथ ही इस दौरान बीएसई 100 ने फंड के लिए काफी बेहतर प्रदर्शन दिखाया था। वहीं 6 महीने बाद भी फार्मा शेयर रिलायंस विजन फंड के पोर्टफोलियो की प्राथमिकता बने रहे, दूसरे शब्दों में कहा जाए तो उस अवधि के दौरान फंड के लिए रामबाण साबित हुए। वहीं इस कड़ी में दूसरा स्थान बैंक शेयरों का रहा था। पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स ऑर ऑटो शेयरों पर भी फंड का 10 फीसदी का एक्सपोजर बरकरार रहा। लेकिन इस बाजार के इस प्रदर्शन के बावजूद रिलायंस वीजन फंड की दशा और दिशा सकारात्मक नहीं हो पाई, फंड अंडर परफॉर्मर ही रहा।


सितंबर 2012 के दौरान भी रिलायंस विजन फंड में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रहा। वहीं तब तक इस फंड को सहारा देने वाले सेक्टर्स बदल चुके थे। बैंक अब रिलायंस वीजन फंड के पोर्टफोलियो में सबसे ऊपर आ चुके थे। साथ ही फार्मा, इंडस्ट्रियल कैपिटल गुड्स और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट में फंड का 10 फीसदी तक एक्सपोजर हो गया था। लेकिन इस दौरान भी पूरे साल की समीक्षा करने पर फंड का प्रदर्शन निराशाजनक रही रहा।


वहीं कुछ 6 महीनों के बाद फंड के पोर्टफोलियो में बैंकिंग सेक्टर का एक्सपोजर बढ़कर 20 फीसदी से भी ज्यादा पहुंच गया। इस दौरान एसबीआई अब भी सबसे ऊपर बना हुआ था। साथ ही आईसीआईसीआई बैंक, डिविस लैब, मारुति सुजुकी, एलएंडटी, भारत फोर्ज, सनोफी, बीपीसीएल और ओएनजीसी का प्रदर्शन भी फंड के लिए बेहतर साबित हुए। बावजूद इसके पूरे साल के दौरान फंड का प्रदर्शन मायूस करने वाला ही रहा था।


रिलायंस विजन फंड में उतार-चढ़ाव की ये दास्तान सिंतबर 2013 अंत में भी जारी रही। फंड के पर्टफोलियो में करीब 20 फीसदी का एक्सपोजर रखने वाले बैंकिंग शेयर लुढ़ककर 12 फीसदी की हिस्सेदारी पर आ गए। हालांकि बैंकिंग शेयर अब भी फंड के लिए पहली पसंद थे, लेकिन पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और सॉफ्टवेयर जैसे सेक्टर्स अब पोर्टफोलियो से नदारद हो चुके थे। वहीं फंड के पोर्टफोलियो में फिर उठापटक का दौर देखने को मिला और इस बार इंफोसिस केवल 7 फीसदी के एक्सपोजर के साथ फंड की पसंदीदा शेयरों की फेहरिस्त में सबसे ऊपर था। जबकि एचडीएफसी बैंक इस कड़ी में 4 फीसदी से भी कम एक्सपोजर पर आ गया।


इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, आईटीसी, टीसीएस, बीपीसीएल, जिंदल स्टील एंड पावर और टीवीएस मोटर्स पर भी फंड ने प्राथमिकता के साथ दांव लगाया लेकिन एक बेहतर रिटर्न की नींव रख पाने में नाकाम साबित हुआ। इस दौरान भी फंड का प्रदर्शन मायूस करने वाला ही रहा। इस पूरे आकलन से यहां ये साबित होता है कि रिलायंस वीजन फंड का प्रदर्शन लगातार निराशाजनक रहा है। अस्थिरता का दौर फंड में हाल ही में भी देखा गया है। ऐसे में निवेशकों को इस फंड को अपने पोर्टफोलियो में रखने के लिए थोड़ा इंतजार करना चाहिए।


नोट: इस फंड की समीक्षा फाइनेंशियल एडवाइजर अर्णव पंड्या ने की है।