Moneycontrol » समाचार » म्यूचुअल फंड विशेषज्ञ

म्यूचुअल फंड केवाईसी प्रक्रिया के बारे में जानें

जो निवेशक केवाईसी नियमों का पालन नहीं करते हैं उनके बाजार में निवेश पर रोक लगा दी जाती है।
अपडेटेड Nov 18, 2013 पर 10:43  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केवाईसी यानि नो योर क्लाइंट। सेबी द्वारा लाई गई ये एक प्रक्रिया है जिसका वित्तीय संस्सथानों, इंटरमीडियरीज और डिपॉजिटरीज इत्यादि को पालन करना होता है। हर निवेशक के लिए जरूरी है कि वह केवाईसी के नियमों का पालन करे। वहीं जो निवेशक ऐसा नहीं करते हैं उन्हें बाजार में निवेश पर रोक लगा दी जाती है। जिसके तहत निवेशक इक्विटी, म्यूचुअल फंड किसी भी विकल्प में निवेश नहीं कर सकता है।


केवाईसी की ये प्रक्रिया मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत लागू की गई है। वहीं इस प्रक्रिया के लिए लगने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर की पूर्ति की जिम्मेदारी सीएसडीएल को गई है। बता दें कि सीएसडीएल सेंट्रल डिपॉजटरी सर्विस ऑफ इंडिया की सब्सिडरी है। भारतीय बाजारों के सभी वित्तीय रिकॉर्ड इस सब्सिडरी के द्वारा ही नियंत्रित किए जाते हैं।


म्यूचुअल फंड केवाईसी कंप्लेंट के लिए कैसे आवेदन करें-


म्यूचुअल फंड्स की वेबसाइट पर म्यूचुअल फंड केवाईसी फॉर्म उपलब्ध होता है। निवेशक को इस कॉपी का प्रिंटआउट निकालकर, उसे ठीक तरह से भरकर रजिस्ट्रेशन एजेंसीज के पास जमा करना होता है। केवाईसी के लिए आवेदन हेतु फोटो, पैन कार्ड, पहचान पत्र के लिए पासपोर्ट और पर्मानेंट एड्रेस प्रूफ इत्यादि की आवश्यकता होती है। वहीं सभी डॉक्युमेंट किसी भारतीय बैंक की शाखा से रजिस्टर्ड करवाना होता है। इसके अलावा इन पर्सन वेरीफिकेशन (आईपीवी) जो एनआरआई और पीआईओ के लिए जरूरी होता है यह एनआईएसएम अथवा एएमएफआई द्वारा किया जाता है।


केवाईसी की इस प्रकिया के दौरान यदि कोई डॉक्युमेंट इंग्लिश के अलावा दूसरी भाषा में हो तो उस पहले इंग्लिश भाषा में कंन्वर्ट कर लें, उसके पास ही उस डॉक्युमेंट को जमा करें। यदि किसी एनआरआई, पीओआई ने भारत में अपने निवेश पर किसी को पावर ऑफ अटॉर्नी नियुक्त किया है तो ऐसे मामले में दोनों की व्यक्तियों को केवाईसी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। म्यूचुअल फंड केवाईसी प्रक्रिया पूरी तरह से मुक्त है, इसलिए आवेदन करने पर निवेशक को किसी भी प्रकार के शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ता है।


म्यूचुअल फंड केवाईसी के फायदे-


यदि निवेशक एक बार केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करता है तो वह एक ही केवाईसी से कई म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर सकता है। वहीं निवेशक को म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में एड्रेस में बदलाव करना है तो इसके लिए निवेशक यदि केवाईसी में नया एड्रेस अपडेट करता है तो यह बदलाव उसके म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में भी हो जाएगा। इसके लिए निवेशक को अलग से एड्रेस में बदलाव करने के लिए आवेदन देने की जरूरत नहीं होती है। अक्सर देखा गया है कि एनआरआई निवेशक को म्यूचुअल फंड केवाईसी प्रक्रिया काफी जटिल लगती है। किंतु वह यदि उपरोक्त जानकारियों का सही तरीके से पालन करे तो यह प्रक्रिया काफी आसान और सुविधाजनक हो सकती है।


नोट: इस लेख को हॉलिस्टिक इंवेस्ट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर रामलिंगम के ने लिखा है।