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शीतकालीन सत्र में कौन-से बिल होंगे पारित!

बाजार की नजर 2 दिन बाद से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र पर भी है।
अपडेटेड Dec 03, 2013 पर 18:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बाजार की नजर 2 दिन बाद से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र पर भी है। संसद के इस सत्र में लंबे समय से अटके पड़े इंश्योरेंस बिल को मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके अलावा डायरेक्ट टैक्स कोड बिल और कोल माइंस बिल भी पारित होने की संभावना है।


राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से ठीक पहले 5 दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। वैसे तो इस सत्र में सिर्फ 12 दिन संसद चलेगी, लेकिन सरकार इन बारह दिनों में आर्थिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कई अहम बिलों को पारित कराने की कोशिश करेगी। क्योंकि इसके बाद बजट सत्र में राजनीतिक माहौल की वजह से ज्यादा काम की संभावना कम रहेगी।


सरकार की कोशिश है कि आर्थिक सुधार से जुड़े इंश्योरेंस अमेंडमेंट बिल और डायरेक्ट टैक्स कोड बिल इस सत्र में पारित करा दिया जाए। इसके लिए वित्त मंत्री पी चिदंबरम जल्द ही विपक्ष के नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा सरकार कोल माइंस के विकास के लिए कोल माइंस अमेंडमेंट बिल, पंचायती राज में महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल, तय समय सीमा के अंदर गुड्स-सर्विस की डिलिवरी और शिकायतों के निपटारे के लिए राइट्स ऑफ सिटिजंस बिल 2011 लोकसभा से पारित कराने का लक्ष्य रखा गया है।


इसके अलावा चालू कारोबारी साल में अब तक हुए खर्चों के आधार पर सरकारी बजट में फेरबदल के लिए सप्लीमेंटरी डिमांड फॉर ग्रांट पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि इसके जरिए योजनागत खर्चों में कटौती का रोडमैप रखा जा सकता है। कोल सेक्टर के रेगुलेशन के लिए कोल रेगुलेटरी अथॉरिटी बिल संसद में पेश किया जाएगा। साथ ही, सरकार राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लोकपाल लोकायुक्त बिल को राज्यसभा से पारित करवाने की कोशिश करेगी। लोकसभा पहले ही इसको पारित कर चुका है।


लोकसभा से पारित हो चुके दो और महत्वपूर्ण बिल को राज्यसभा से पारित करवाने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें न्यायपालिका की जिम्मेदारी तय करने वाली ज्यूडिशियल स्टैंडर्ड एंड अकाउंटेबिलिटी बिल 2012 और व्हीसलब्लोअर प्रोटेक्शन बिल 2012 शामिल है। इसी तरह राज्यसभा से पारित मोटर व्हीकल बिल को भी लोकसभा से पारित करवाने की कोशिश की जाएगी जिसके जरिए यातायात नियमों की अनदेखी करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान है।


चूंकि सरकार के पास इस सत्र में काम करने के लिए बहुत कुछ है इसलिए संसद के इस सत्र को 1 हफ्ते और आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है और इसके लिए आज सभी दलों की बैठक बुलाई गई है। संसद का ये सत्र 5 दिसंबर से शुरू होकर 21 दिसंबर तक चलना है। हालांकि राजनीतिक रूप से भी ये सत्र हंगामेदार रहेगा।


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