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एक्सपोर्ट-इंपोर्ट की आड़ में मनी लॉन्ड्रिंग

एक्सपोर्ट इंपोर्ट में मिलने वाली सरकारी रियायतों की आड़ में कालाधन विदेशों से लाया जा रहा है।
अपडेटेड Dec 04, 2013 पर 08:51  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एक्सपोर्ट इंपोर्ट में मिलने वाली सरकारी रियायतों की आड़ में कालाधन विदेशों से लाया जा रहा है। सीएनबीसी आवाज को एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि चुनाव के करीब आते ही ऐसे मामले 10-15 फीसदी बढ़ गए हैं। चुनाव की सरगर्मी में हवाला के बढ़ते मामलों ने डीआरआई यानि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस की नींदे उड़ा दी है। डीआरआई सूत्रों के मुताबिक कारोबार के नाम पर धड़ल्ले से मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही है।


2011 में ऐसे मामले जहां सिर्फ 1450 से वहीं इस साल अब तक ही ये 1750 से ज्यादा हो चुके हैं। डीआरआई के सूत्रों के मुताबिक मनी लांड्रिंग के बढ़ते मामलों में करीब 65 फीसदी ऐसे मामले है जो एक्सपोर्ट इंपोर्ट की सरकारी पॉलिसी की आड़ में किये जा रहे हैं। जिनमें जीरो रेटेड इंपोर्टेड स्कीम, टेक्सटाइल अपग्रेडेशन फंड स्कीम और एक्सपोर्ट प्रोमोशन जैसी स्कीम्स शामिल है। सूत्रों की मानें तो इन स्कीम्स के जरिए सरकार को 2 सालों में करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


डीआरआई सूत्रों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक के सामान, आयरन ओर और ज्वेलरी का इंपोर्ट एक्सपोर्ट में हवाला का बड़ा खेल चल रहा है। अकेले इलेक्ट्रॉनिक आइटमों के इंपोर्ट से सालाना 2000 करोड़ रुपये का कालाधन भारत आ रहा है। इसी तरह कालेधन को छुपाने के लिए गोल्ड और डायमंड की सर्कुलर ट्रेडिंग हो रही है, जिसमें दुबई और हॉगकांग से इंपोर्ट किये गए डायमंड वापस सेफ हेवन में पहुंच रहे है।


सूत्रों के मुताबिक डीआरआई को शक है कि ये पैसे शेयर बाजार पहूंच रहे है और चुनावों में लगाए जा रहे है। इसी को देखते हुए डीआरआई लगातार सेबी और इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट से संपर्क में भी है।


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