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आरबीआई: रेपो रेट, सीआरआर में बदलाव नहीं

अच्छी खबर ये है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं होने से आपकी ईएमआई में बढ़ोतरी की गुंजाइश नहीं है।
अपडेटेड Nov 25, 2021 पर 15:26  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। लिहाजा रेपो रेट 7.75 फीसदी पर बरकरार रहेगा। वहीं रिवर्स रेपो रेट भी 6.75 फीसदी पर ही बना रहेगा। साथ ही आरबीआई ने सीआरआर में भी कोई बदलाव नहीं किया है और ये 4 फीसदी पर स्थिर है।


आपके लिए अच्छी खबर ये है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं होने से आपकी ईएमआई में बढ़ोतरी की गुंजाइश नहीं है। वहीं आरबीआई ने मार्जिनल स्टैडिंग फैसलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया है, ये 8.75 फीसदी पर बरकरार है।


आरबीआई का कहना है कि रिटेल महंगाई दर और थोक महंगाई दर बेहद ज्यादा हैं। लेकिन आगे सब्जियों की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है। हालांकि खाद्य और फ्यूल महंगाई दर कम नहीं हुई तो पॉलिसी में बदलाव संभव है।


आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि ऊंची रिटेल महंगाई दर के कारण पॉलिसी में ढिलाई की गुंजाइश नहीं है। महंगाई दर बहुत ज्यादा है जिस कारण पॉलिसी में बदलाव न करना मुश्किल था। लेकिन थोक महंगाई दर और कोर महंगाई दर कमी नहीं होने पर दरें बढ़ाई जा सकती हैं। आरबीआई का महंगाई पर कड़ा रुख जारी रहेगा।


रघुराम राजन के मुताबिक अक्टूबर-मार्च में जीडीपी ग्रोथ अप्रैल-सितंबर से बेहतर होगी। वहीं पॉलिसी में बदलाव के लिए कुछ और आंकड़ों का इंतजार है। सरकार वित्तीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने की पूरी कोशिश कर रही है। करेंट अकाउंट घाटे की स्थिति काफी बेहतर है। चौथी तिमाही में सरकारी खर्चों में कटौती की उम्मीद है। एनपीए मैनेजमेंट पर नए नियम 2 हफ्ते में जारी किए जाएंगे।


रघुराम राजन ने कहा है कि क्यूई3 में कटौती से इनकार नहीं किया जा सकता है लेकिन भारत उसके लिए पूरी तरह तैयार है। डब्ल्यूपीआई महंगाई दर को 5 फीसदी और कोर महंगाई दर को 3 फीसदी  से नीचे लाना चाहते हैं। दिसंबर में महंगाई दर में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि सीपीआई महंगाई दर के आंकड़ों का अनुमान नहीं देंगे।


रघुराम राजन  के मुताबिक सोने के इंपोर्ट पर लगी रोक हटाने के पक्ष में नहीं हैं और अभी रोक हटाना ठीक नहीं होगा। करेंट अकाउंट घाटा स्थिर होने पर सोने के इंपोर्ट पर रोक हटा सकते हैं। एनपीए के नए नियम बैंकों के लिए फायदेमंद होंगे। तेल कंपनियों के नेट फॉरेक्स स्वैप 700 करोड़ डॉलर से कम हैं।


आरबीआई ने इस बार नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन सरकार को आगे दरों में कमी की उम्मीद है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह ने कहा है कि महंगाई दर में गिरावट के बाद ही ब्याज दरों में आगे कमी की गुंजाइश बनती है।


प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन सी रंगराजन का कहना है कि खाने-पीने की महंगाई दर में कमी आने के संकेत हैं। महंगाई दर में स्थिरता आरबीआई की पहली प्राथमिकता होगी। दिसंबर में थोक महंगाई दर में गिरावट के संकेत हैं। दिसंबर में सब्जियों की महंगाई दर में तेज गिरावट आएगी।


एचडीएफसी के वाइस चेयरमैन और सीईओ केकी मिस्त्री का कहना है कि आरबीआई के कदमों का स्वागत है और एमएसएफ दरों में बदलाव न करने से राहत मिलेगी। हालांकि सिर्फ इस बार की रिटेल महंगाई दर दो देखकर दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं थी।


जानकारों का मानना है कि महंगाई के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी न कर आरबीआई ने चौंका दिया है। लेकिन जानकारों का मानना है कि आगे दरें बढ़ सकती हैं। क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डी के जोशी का कहना है कि महंगाई को देखते हुए आरबीआई की ओर से दरों में बढ़ोतरी जरूरी थी।


डी के जोशी का कहना है कि दिसंबर में डब्ल्यूपीआई और सीपीआई दोनों महंगाई दरों में कमी आने की उम्मीद है। इस साल वित्तीय घाटा 5.2 फीसदी रहने की उम्मीद है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा के ईडी पी श्रीनिवास का कहना है कि खाने-पीने की चीजों के दाम घटने की उम्मीद है। साथ ही पॉलिसी दरों में बदलाव न होने से बॉन्ड मार्केट में स्थिरता जारी रहेगी।


आईएनजी वैश्य बैंक की इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज का कहना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का खतरा टला नहीं है। महंगाई नीचे नहीं आई तो दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी मुमकिन है। वहीं ओबीसी के ईडी भूपिंदर नैय्यर का कहना है कि डिपॉजिट रेट्स में आगे किसी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं है। एसबीआई की चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य के मुताबिक रिजर्व बैंक के फैसले से बैंकों को राहत मिलेगी और बैंक को कर्ज की डिमांड बढ़ाने की जरूरत है।


आरबीआई पॉलिसी पर मॉनेट इस्पात के सीएफओ अजय भट्ट का कहना है कि आरबीआई गवर्नर के कदम का स्वागत है। दरअसल कारोबार और इकोनॉमी के हालात अब भी काफी खराब हैं। साथ ही ब्याज दरें भी काफी ज्यादा हैं। केवल ब्याज दरें बढ़ाने से महंगाई को काबू कर पाना मुश्किल नजर आ रहा है।


फिक्की की चेयरमैन नैनालाल किदवई का कहना है कि आरबीआई की ओर से रेपो रेट में बदलाव नहीं करना अच्छा कदम है। इंडस्ट्री की उधारी दरों पर ज्यादा नजर रखने की जरूरत है। वहीं इकोनॉमी में धीमी गति से ग्रोथ हो रही है। अगले साल जीडीपी ग्रोथ 6 फीसदी हो सकती है।


नैनालाल किदवई के मुताबिक महंगाई को काबू में करने के लिए खाद्य महंगाई पर नियंत्रण जरूरी है। इसके अलावा राजनीतिक पार्टियों को इकोनॉमी में ग्रोथ पर ध्यान देने की जरूरत है। लोकपाल बिल पर नैनालाल किदवई ने कहा कि केवल लोकपाल बिल से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा। हालांकि लोकपाल बिल के पास होने से भ्रष्टाचार पर असर पड़ेगा।


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