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चीन में बढ़ी मुश्किलें,एशियाई बाजार 7 महीनें के निचले स्तरों पर फिसले, भारतीय बाजारों पर भी दबाव

यूएस फेड की पॉलिसी मीट के पहले बॉन्ड और करेंसी मार्केट भारी दबाव में नजर आ रहे हैं
अपडेटेड Jul 28, 2021 पर 09:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आज के कारोबार में एशियाई बाजारों में लगातार तीसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली है। चीन की इंटरनेट कंपनियों में भारी दबाव देखने को मिल रहा है। इसके अलावा यूएस फेड की पॉलिसी मीट के पहले बॉन्ड और करेंसी मार्केट भारी दबाव में नजर आ रहे हैं।

जापान के बाहर के एशिया पैसेफिक शेयरों का MSPI इंडेक्स 0.25 फीसदी की गिरावट के साथ मध्य दिसंबर के बाद के अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसका असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। सेंसेक्स-निफ्टी भारी दबाव में कारोबार कर रहे हैं।


आज लागातर तीसरे दिन  बेंचमार्क Hong Kong इंडेक्स में 0.59 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। Hang Seng Tech जुलाई 2020 में अपने शुरूआत के बाद से सबसे निचले स्तर पर दिख रहा है। आज इसमें 2 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। जबकि पिछले 3 दिन में 11 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। वहीं फरवरी के अपने शिखर से 40 फीसदी से नीचे नजर आ रहा है। इसी तरह शंघाई कंपोजिट में आज 2.4 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। जबकि पिछले एक हफ्ते में यह 4.4 फीसदी टूट गया है।


अलग अलग एशियाई दिग्गज स्टॉक पर नजर डालें तो जेडी हेल्थ 20 फीसदी टूटा है। वहीं अली बाबा हेल्थ भी 20 फीसदी टूट गया है। MEIPUAN में 13 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है।  इस गिरावट की वजह चीन सरकार की टेक और एजुकेशन सेक्टर से  जुड़ी कंपनियों पर कोविड-19 के फिर से उभार के दौरान की जा रही रेग्यूलेटरी  एक्शन है।


बता दें कि चीन सरकार टेक और एजुकेशन से जुड़ी कंपनियों पर लगातार रेगुलेटरी कार्रवाई कर रही है। चीन ने इन कंपनियों को मुनाफा कमाने बाजार से पूंजी जुटाने और आईपीओ लाने पर पाबंदी लगा रही है। टेक कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वो डेटा प्रोटेक्शन नियमों का कड़ाई से पालन करें।


चीन की सरकार ने फूड कंपनियों को भी निर्देश दिए हैं कि उनको डिलिवरी बॉयज को मिनिमम वेतन का भुगतान करना होगा। इसके अलावा इन्हें हेल्थ इंश्योरेंस भी देना होगा। गौरतलब है कि चीनी सरकार क्रिप्टो करेंसी को पूरी तरह से बैन करने की तैयारी में है। चीन के सबसे बड़े क्रिप्टो करेंसी एक्सेंज HUOBI ने अपने लाइसेंस के कैंसिलेशन के लिए आवेदन भी कर दिया है।  चीन के इस एक्शन से तमाम बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल दिख रहा।


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