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नई सरकार पर ब्रोकरेज हाउसेज की रिपोर्ट

प्रकाशित Fri, 24, 2019 पर 11:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

फिर एक बार मोदी सरकार, जी हां पीएम मोदी के नेतृत्व में BJP ने प्रचंड जीत दर्ज करते हुए पिछली बार से भी बड़ा बहुमत हासिल किया है। BJP की भारी जीत पर ब्रोकरेज हाउसेज बेहद बुलिश हो गए हैं। आइए एक नजर डालते हैं मोदी की वापसी पर आए ब्रोकरेज रिपोर्ट्स पर।


नई सरकार पर क्रेडिट सुइस


क्रेडिट सुइस का कहना है कि फिर से मोदी सरकार आने से न्यायिक और डायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म तेज होने की उम्मीद है। कई और PSU बैंकों के मर्जर की उम्मीद है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में खर्च बढ़ सकता है।


नई सरकार पर CLSA


CLSA का मानना है कि नई सरकार का ग्रोथ पर फोकस होगा। पूर्ण बहुमत से सरकार को लोकलुभावन नीतियों की जरूरत नहीं होगी। आगे मिडकैप शेयरों में खरीदारी दिख सकती है। घरेलू निवेश बढ़ सकता है, रेट कट की भी उम्मीद है।


नई सरकार पर नोमुरा


नोमुरा के मुताबिक पुरानी नीतियों के जारी रहने की उम्मीद है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का जोर रहेगा। नोमुरा ने मार्च 2020 के लिए निफ्टी का टार्गेट 12250 रखा है। नोमुरा का मानना है कि सबके लिए घर नीति के तहत 5.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश संभव है।


भारतीय बाजारों पर मॉर्गन स्टैनली


मॉर्गन स्टैनली इमर्जिंग मार्केट पर ओवरवेट है। उसका मानना है कि 2020 तक सेंसेक्स में 45000 का स्तर देखने को मिल सकता है। वही, 2020 तक निफ्टी 13500 का स्तर छू सकता है।


जेपी मार्गन


जेपी मार्गन का कहना है कि अगले 6 महीने में निफ्टी में 12500 का स्तर देखने को मिल सकता है। राजनीतिक अनिश्चितता खत्म होने से बाजार में जोखिम कम हुआ है।


नई सरकार पर फिलिप कैपिटल


फिलिप कैपिटल का कहना है कि नई सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण विकास पर फोकस होगा। रेलवे, डिफेंस, पोर्ट्स पर भी फोकस रहेगा। मार्च 2020 तक निफ्टी 12200-12700 का स्तर छू सकता है।


नई सरकार पर कोटक सिक्योरिटीज


नई सरकार से कैपिटल गुड्स, कंस्ट्रक्शन सेक्टर को फायदा। कॉरपोरेट बैंक के लिए भी फायदा होगा। नई सरकार से ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को भी फायदा होगा। कोटक सिक्योरिटीज को लार्जकैप के मुकाबले मिड और स्मॉलकैप में बेहतर मौके दिख रहे हैं।


नई सरकार पर सिटी


सिटी का कहना है कि NDA को 2020 तक राज्यसभा में बहुमत मिल जाएगा। सरकार को आर्थिक चुनौतिया का मुकाबला करना होगा। वित्तीय घाटे के कारण रुपये पर दबाव मुमकिन है।