Moneycontrol » समाचार » बजट प्रतिक्रियाएं

बजट के जरिए गरीबों तक पहुंचने पर फोकस

बजट से पहले मैंने कहा था कि मोदी सरकार बजट से अपनी इमेज बदलने की कोशिश करेगी, ठीक वैसा ही किया गया है।
अपडेटेड Feb 29, 2016 पर 18:03  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नीरज बाजपेयी
सीनियर एडिटर, सीएनबीसी-आवाज़


जैसा कि बजट से पहले मैंने अपने लेख में कहा था कि मोदी सरकार बजट से अपनी इमेज बदलने की कोशिश करेगी, ठीक वैसा ही किया गया है। सरकार ने सूट-बूट की इमेज से निकल कर किसानों के साथ खड़े दिखने की कोशिश की है और आने वाले चुनावों में वोट पक्का करने की जुगत भिड़ाई है। रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री ने बजट के संकेत दे ही दिए थे कि इस बार बजट कैसा होगा। सरकार का पूरा फोकस सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर और गरीबों तक पहुंचने का है।


बजट में पूरी तरह गांवों, किसानों और छोटे-छोटे कारोबारियों को तवज्जो दी गई है। सरकार ने वादा किया है कि आगे पांच सालों में किसानों की आमदनी दोगुनी कर दी जाएगी। खेती किसानी को रिकॉर्ड 9 लाख करोड़ से ज्यादा लोन देने का लक्ष्य रखा गया है। मनरेगा और सिंचाई के लिए रिकॉर्ड आवंटन किया गया है। सिंचाई पर पांच साल में 85000 करोड़ खर्च होंगे। गांवों में सड़कों और फसल बीमा योजना को तेज रफ्तार से दौड़ाने की कोशिश साफ दिख रही है। अगले 3 साल तक हर साल 1.5 करोड़ गरीब परिवारों को रसोई गैस मुहैया कराई जाएगी।


छोटे कारोबारियों को रिझाने के लिए दो करोड़ से कम के टर्नओवर पर केवल 8.33 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा, इसके अलावा 5 करोड़ के टर्नओवर पर कॉरपोरेट टैक्स घटाया गया है। ग्रामीण इकोनॉमी को बूस्ट करने के लिए फूड प्रोसेसिंग और मार्केटिंग पर 100 फीसदी एफडीआई का प्रस्ताव है। यानी आबादी के बड़े हिस्से को इससे फायदा जरूर होगा। हालांकि प्रॉविडेंट फंड और पेंशन की मैच्योरिटी के कुछ हिस्से पर टैक्स देने का प्रस्ताव नौकरीपेशा लोगों को रास नहीं आएगा।


ये सारे उपाय इस बात की ओर इशारा करते हैं कि सरकार की मंशा क्या है। असम, बंगाल, केरल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में वोटरों को अपनी ओर खींचने के लिए भरपूर कोशिश की गई है, पर याद रहे कि बिहार चुनावों से पहले बिहार के लिए डेढ़ लाख करोड़ के पैकेज एलान किया गया था पर बात नहीं बनी थी, बिहार में बीजेपी को करारी हार मिली थी. देखते हैं ये बजट क्या रंग लाता है?