बजट में टैक्सपेयर की अनदेखी, मिडिल क्लास हुआ निराश -
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बजट में टैक्सपेयर की अनदेखी, मिडिल क्लास हुआ निराश

प्रकाशित Fri, 02, 2018 पर 18:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोदी सरकार का आखिरी फुल बजट आम आदमी को खुश करने में नाकाम रहा। ना टैक्स के मोर्चे पर कोई राहत ना ही बचत बढ़ाने का कोई विकल्प दिया गया और जो एलान किए गए वो जैसे ऊंट के मुंह में जीरा जैसे हैं। लेकिन पर्सनल इनकम टैक्स से जुड़े ये तमाम एलान आपकी जेब पर कितने भारी पड़ेंगे। मोदी सरकार का आखिरी पूरा बजट, जैसा कि कहा जा रहा था वैसा ही हुआ। यानि जेटली ने अपनी पोटली से चुनावी बजट पेश किया। 2019 में होने वाले आम चुनावों को ध्यान में रखकर बजट में गांव, गरीब और किसान पर फोकस रखा गया, लेकिन मिडिल क्लास को भूल गए।


बजट में मिडिल क्लास को बड़ी निराशा हाथ लगी है। टैक्स में छूट की उम्मीद कर रहे सैलरीड क्लास के लिए वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि वित्त मंत्री ने ट्रांसपोर्ट और मेडिकल अलाउंस खत्म करके 40 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन देने का एलान किया है। सैलरीड क्लास पर सेस का बोझ बढ़ाते हुए सेस 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी किया है। 19,200 सालाना ट्रांसपोर्ट अलाउंस और 15,000 सालाना मेडिकल अलाउंस खत्म हो गया है।


वरिष्ठ नागरिकों को कुछ राहत देते हुए सेक्शन 80टीटी(B) के तहत बैंक डिपॉजिट पर छूट दी है। बैंक में जमा राशि पर टैक्स छूट 10 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी है। इसके अलावा स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर भी टैक्स छूट 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दी है। एफडी और आरडी पर टीडीएस कटौती की सीमा बढ़ी है। एफडी और आरडी पर टीडीएस बेनिफिट 10,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी है। वहीं गंभीर बीमारी के लिए 1 लाख रुपये तक खर्च पर टैक्स राहत दी है।


वित्त मंत्री ने शेयर बाजार में निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। इक्विटी से कमाई पर एलटीसीजी यानि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स लगाया है। टैक्स वित्त मंत्री ने शेयर बेचकर 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई पर 10 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगा दिया है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स में इंडेक्सेशन की छूट नहीं है। 15 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स बरकरार रखा है। वहीं इक्विटी म्यूचुअल फंड पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लगेगा। म्यूचुअल फंड के डिविडेंड पर 10 फीसदी डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स है।