बजट को समझें बजट बनाने वालों के साथ -
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बजट को समझें बजट बनाने वालों के साथ

प्रकाशित Sat, 03, 2018 पर 17:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोदी सरकार का आखिरी पूरा बजट, जैसा कि कहा जा रहा था वैसा ही हुआ। यानि जेटली ने अपनी पोटली से चुनावी बजट पेश किया। 2019 में होने वाले आम चुनावों को ध्यान में रखकर बजट में गांव, गरीब और किसान पर फोकस रखा गया। कुछ बड़े महत्वकांक्षी योजनाओं जैसे गरीबों को 5 लाख रुपये का हेल्थ कवर जो सीएनबीसी-आवाज़ ने आपको पहले बताया था उस पर भी मुहर लगी है। बजट पर कैसा है पॉलिसी मेकर्स का नजरिया आइए देखते हैं।


वित्त सचिव हसमुख अढ़िया ने कहा कि सभी को मेडिकल और कनवेंस अलाउंस नहीं मिलता। पेंशनर्स को स्टैंडर्ड डिक्शन का पूरा फायदा मिलेगा। हालांकि बजट से मिडिल क्लास नौकरीपेशा लोगों को ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा। इस बजट में ग्रामीण इलाकों पर फोकस है। ग्रामीण क्षेत्र पर 14.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्र पर खर्च बढ़ने से रोजगार पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि कृषि ही नहीं दूसरे क्षेत्रों में भी नए रोजगार पैदा होंगे। उन्होंने ये भी कहा कि अगले 1 साल में जीएसटी का एक स्लैब करना मुश्किल है। जीएसटी के स्लैब कुछ कम किए जा सकते हैं।


एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी अजय नारायण झा का कहना है कि नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम का फायदा 10 करोड़ गरीब परिवारों को मिलेगा। इस स्कीम में 5 लाख का इंश्योरेंस कवर है। इस साल के लिए 2000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। केंद्र और राज्य दोनों मिलकर ये स्कीम चलाएंगे। स्कीम का 60 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। स्कीम का 40 फीसदी खर्च राज्य उठाएंगे। अगले 6 महीने में स्कीम लागू हो जाएगी। रेलवे के लिए बजट में 53000 करोड़ का आवंटन किया गया है। रेलवे के लिए बाजार से 93000 करोड़ जुटाए जाएंगे। रोड के लिए 71000 करोड़ का आवंटन किया गया है। रोड के लिए बाजार से 62000 करोड़ जुटाए जाएंगे। इंफ्रा के लिए कुल बजटीय सहायता 1.75 लाख करोड़ रुपये की है।


मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियम और आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने अपनी बातचीत में कहा कि बजट में वित्तीय अनुशासन की झलक दिखी। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगाने का फैसला सही है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से बचना मुश्किल होगा। सामाजिक सुरक्षा के लिए बड़ी स्कीम का एलान किया गया है। बजट एलानों का फायदा कृषि क्षेत्र को मिलेगा। एमएसपी बढ़ने का असर शायद इस साल महंगाई पर ना दिखे। एमएसपी बढ़ाने से मोटे अनाज महंगे नहीं होंगे, हालांकि कुछ दालें महंगी हो सकती हैं।


अब सिर्फ 1 फीसदी कंपनियों पर 30 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स लगेगा। कॉरपोरेट टैक्स की प्रभावी दर अभी भी 25 फीसदी से नीचे है। कंपनियों को कई छूट मिली हैं उन पर विचार करना होगा। कॉरपोरेट टैक्स 25 फीसदी करने के लिए रोडमैप बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें को लेकर अनिश्चितता है। क्रूड की कीमतों का अनुमान लगाना एक बड़ा जटिल काम है।


वित्तीय मामलों के सचिव राजीव कुमार और विनिवेश सचिव नीरज गुप्ता ने अपने बातचीत में कहा कि इस बजट में एमएसएमई के कैश फ्लो सुधार पर फोकस है। कॉरपोरेट टैक्स 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किया गया है। अब 250 करोड़ के टर्नओवर तक सिर्फ 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स देना होगा। कॉरपोरेट टैक्स घटने से 95-99 फीसदी कंपनियों को फायदा। छोटे-लघु उद्योगों में 15-20 फीसदी एनपीए हैं। एमएसएमई के एनपीए पर योजना तैयार है।


सरकार का 80 हजार करोड़ का विनिवेश का लक्ष्य है। विनिवेश का लक्ष्य 3.3 फीसदी वित्तीय घाटे के मुताबिक। विनिवेश के लिए आईपीओ, ओएफएस, बायबैक का इस्तेमाल किया जाएगा। 80 हजार करोड़ का विनिवेश बड़ी चुनौती है। बैंकों के रीकैपिटलाइजेशन पर बात करते हुए इनकी तरफ से कहा गया कि बैंकों के लिए ये अंतिम रीकैपिटलाइजेशन होगा। बीमा कंपनियों के लिए मर्जर में तालमेल जरूरी है। जनरल, लाइफ इंश्योरेंस अलग-अलग देखना जरूरी। वित्त वर्ष 2019 में बीमा कंपनियों के मर्जर होने की उम्मीद है।


सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा और सीबीईसी की चेयरपर्सन वनजा.एस.सरना ने अपनी बातचीत में कहा कि बजट में मिडिल क्लास का ध्यान रखा गया है। नौकरीपेशा लोगों के लिए 40 हजार का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया गया है। बजट में सीनियर सिटिजन पर फोकस है। सेक्शन 80 टीटी के तहत छूट की सीमा बढ़ाई गई है। स्टैंडर्ड डिडक्शन से 12 हजार तक की बचत हो सकती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन से सरकार को 8,000 करोड़ का घाटा होगा।


इंफ्रा में निवेश सबसे लिए फायदेमंद होगा। एक्साइज डयूटी में बदलाव के आसार नहीं हैं। पिछले साल टैक्स क्लेक्शन ग्रोथ रेट 12 फीसदी रही थी। इस साल टैक्स क्लेक्शन 18 फीसदी के करीब रहने की उम्मीद है। नोटबंदी के दौरान कई खाते संदिग्ध पाए गए। संदिग्ध खाता धारकों को नोटिस भेजी जा रही है। अभी तक 1 लाख 98 हजार नोटिस भेजे गए।


सेल्फ एसेसमेंट टैक्स का ग्रोथ रेट 23 फीसदी है। जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड कई लोग टैक्स नहीं दे रहे। दिसंबर में जीएसटी टैक्स कलेक्शन 88 हजार करोड़ रहा है। अगले दो महीने में टैक्स कलेक्शन बढ़ने की उम्मीद है। ई-वे बिल और ऑडिट शुरु होने से टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा।


सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने बताया कि देश में करीब 4 लाख लोग क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े एक्सचेंजों में किए गए सर्वे से ये पता चला है। अब निवेश में होने वाले फायदे पर एलटीसीजी टैक्स देना पड़ेगा। क्रिप्टोकरेंसी में 100 करोड़ कालेधन के निवेश का पता चला है इन निवेशकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।