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Budget 2020: देश के अलग-अलग सेक्टरों की क्या हैं मांगें, आम आदमी को क्या देंगी FM?

देखना है कि सरकार स्लोडाउन और कैश क्रंच के शिकार कई सेक्टरों को क्या रिफॉर्म देती है
अपडेटेड Feb 01, 2020 पर 12:02  |  स्रोत : Moneycontrol.com

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अपना दूसरा बजट पेश करने जा रही हैं। यह बजट मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा फुल बजट भी है। इस बजट से इकोनॉमी के रिवाइवल की उम्मीद लगाई जा रही है। देखना है कि सरकार स्लोडाउन और कैश क्रंच के शिकार कई सेक्टरों को क्या रिफॉर्म देती है, वहीं आम आदमी को वित्त मंत्री के बही खाते में से क्या मिलता है।


आम आदमी को राहत


इस बजट से देश के हर सेक्टर को खासी उम्मीदें हैं। आम आदमी को इस बजट से पर्सनल इनकम टैक्स में रेट में छूट की उम्मीदें हैं, मौजूदा टैक्स स्लैब में बदलाव और मिनिमम पर्सनल इनकम टैक्स छूट की लिमिट को बढ़ाने की उम्मीदें भी की जा रही हैं।


माना जा रहा है कि वित्त मंत्री इनकम टैक्स में बड़े छूट का ऐलान कर सकती हैं।
CNBC आवाज के सूत्रों के मुताबिक, 2.5 लाख रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक की टैक्सेबल इनकम पर टैक्स छूट मिल सकती है। अभी इस पर 5 फीसदी टैक्स लगता है। सरकार बजट में 2.5 लाख रुपए से लेकर 7 लाख रुपए तक की टैक्सेबल आमदनी पर 5 फीसदी टैक्स लग सकता है।


सालाना 7 लाख रुपए से 10 लाख रुपए के ब्रैकेट में आने वालों पर 10 फीसदी टैक्स लग सकता है। वहीं 10 लाख रुपए से 20 लाख रुपए के ब्रैकेट में आने वाले टैक्सपेयर्स पर 20 फीसदी टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। सालाना 20 लाख रुपए से लेकर 10 करोड़ रुपए तक की टैक्सेबल आमदनी होने पर 30 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है। वहीं 10 करोड़ रुपए से ज्यादा टैक्सेबल इनकम पर 35 फीसदी टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है।


इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस


इस बजट में ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रा पर सरकार अपना बजट बढ़ा सकती है। वहीं, FY20 से FY25 तक National Infrastructure Pipeline (NIP) के 102 लाख करोड़ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक रोडमैप तैयार कर सकती है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स सेक्टर की भी एक बड़ी मांग है। सेक्टर चाहता है कि उसे इंफ्रास्ट्रक्चर का स्टेटस दिया जाए। इसके लिए अलग से एक मंत्रालय बनाया जाए। सरकार बजट में नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी का ऐलान कर सकती है।


ऑटो सेक्टर को बड़े बदलाव की उम्मीद


ऑटो सेक्टर को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। ऑटो सेक्टर लगभग एक साल से स्लोडाउन झेल रहा है, ऐसे में उसे इस बजट से रिवाइवल की उम्मीद है। ऑटो सेक्टर की बड़ी मांग है कि जीएसटी रेट स्लैब 28 फीसदी से 18 फीसदी पर किया जाए लेकिन शुक्रवार को पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे के हिसाब से चूंकि सरकार के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा ऑटो सेक्टर से आता है, ऐसे में उसे रिस्क में डालते हुए जीएसटी रेट कट करने का जोखिम नहीं उठा सकती है। ये बात तो सर्वे में कही गई है, देखना होगा कि सरकार बजट में इसे लेकर क्या करती है।


NBFC सेक्टर का नकदी संकट दूर करने के उपाय


सरकार बजट में NBFCs के लिए खास एलान कर सकती हैं। NBFCs के नकदी संकट को दूर करने के लिए बजट में स्पेशल परपज व्हीकल यानी SPV के गठन का एलान हो सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार की स्पेशल एंटिटी के जरिए NBFCs की फंडिंग की योजना है।


नई एंटिटी का गठन स्पेशल परपज व्हीकल के तौर पर होगा। इस SPV में सरकार अपनी SUUTI की हिस्सेदारी डालेगी। बता दें कि SUUTI की मौजूदा मार्केट वैल्यूएशन करीब 33000 करोड़ रुपये है। ये एंटिटी वैल्यू का तीन गुना मार्केट से उधार ले सकेगी। ये स्पेशल एंटिटी चुनिंदा NBFCs में निवेश कर सकेगी। इसको NBFCs के बुक वैल्यू का 20 फीसदी तक निवेश करने की मंजूरी होगी। किन NBFCs में निवेश होगा ये सेलेक्शन RBI करेगा।


रियल एस्टेट सेक्टर को लंबे समय से सुधार की आस


लंबे वक्त से सुस्ती का शिकार रहे रियल एस्टेट को सुधार की उम्मीद है। इंडस्ट्री को चाहिए कि सरकार Alternative Investment Fund (AIF) के तहत 25,000 करोड़ का फंड तुरंत रिलीज करे, निगेटिव और RERA के साथ जो प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड नहीं है, उनके पूरा होने के लिए फंडिंग सुनिश्चित हो। वहीं, बिल्डर्स की मांग है कि लोन रिस्ट्रक्चरिंग की जाए और अफॉर्डेबल हाउसिंग की 45 लाख की लिमिट को बढ़ाया जाए।


होमबायर्स चाहते हैं कि हाउसिंग लोन पर प्रिंसिपल रीपेमेंट को 80C के तहत 1.5 लाख के ओवरऑल लिमिट से अलग किया जाए।


एग्री सेक्टर को क्या चाहिए?


एग्री सेक्टर में किसानों के क्रेडिट, डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए किसानों की मदद के लिए इंसेंटिव देने और बेहतर सिंचाई और दूसरे मैकेनिज्म में सुधार के साथ बाजार में सीधी पहुंच जैसी किसानों की मांगें हैं।


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